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भाजपा ने कर्नाटक के 'सबक' से निकाला आंध्र प्रदेश में जीत का 'फार्मूला'

Mon, 18 Jun 2018 04:19 AM IST
Harendra Chaudhary Harendra Chaudhary
Updated Mon, 18 Jun 2018 04:19 AM IST
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BJP may use Karnataka jds formula for victory in Andhra Pradesh assembly elections

आंध्र प्रदेश में होने वाले आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनावों को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी ने भावी रणनीति तैयार की है। भाजपा की रणनीति है कि आंध्र प्रदेश में अकेले अपने दम पर चुनाव लड़े जाएं और राज्य में तीसरी शक्ति के रूप में खुद को स्थापित किया जाए। साथ ही भाजपा ने कर्नाटक में हुई रणनीतिक विफलता से एक बड़ा 'सबक' लिया है, जिसे वह आंध्र प्रदेश में 'तुरुप के इक्के' की तरह इस्तेमाल करेगी। 

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अकेले लड़ेगी भाजपा

हाल ही में आंध्र प्रदेश के नेताओं के साथ हुई कोर ग्रुप की बैठक में भाजपा ने आंध्र प्रदेश में होने वाले लोकसभा और विधानसभा चुनावों को लेकर विस्तृत रणनीति बनाई है। पार्टी ने इसके लिए पूरा रोडमैप तैयार किया है। 
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बैठक में पार्टी ने साफ कर दिया कि आंध्र प्रदेश में दोनों चुनाव अकेले लड़े जाएं और चुनावों से पहले कोई प्री-पोल अलायंस नहीं किया जाए। साथ ही भाजपा को टीडीपी और वाईएसआरसीपी के तीसरे विकल्प के रूप में लोगों के सामने पेश किया जाए। आंध्र प्रदेश में लोकसभा की 25 सीटें है, जबकि विधानसभा की 175 सीटें हैं। 
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कांग्रेस से लिया 'सबक'

सूत्रों का कहना है कि आंध्र प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए पार्टी वहां सत्ता तक पहुंचने का रास्ता भी तैयार कर रही है। इसके लिए भाजपा ने कर्नाटक में पार्टी की हुई रणनीतिक विफलता से बड़ा सबक लिया है। सूत्रों के मुताबिक भाजपा ने कर्नाटक में सरकार बनाने में विफल होने पर हतोत्साहित होने की बजाए इसे एक बड़े सबक के तौर पर लिया है। 

पार्टी सूत्रों का कहना है कि कर्नाटक में सरकार बनाने की जेडीएस और कांग्रेस की सफल रणनीति का फार्मूला भाजपा आंध्र प्रदेश में भी अपना सकती है। सूत्रों के मुताबिक पार्टी की सोच है कि आंध्र प्रदेश में विधानसभा चुनावों में अगर पार्टी को 176 में से 40-50 सीटें मिलती हैं, तो वाईएसआर कांग्रेस और पवन कल्याण की जनसेना पार्टी से समर्थन लेकर सत्ता तक पहुंचने की दावेदारी पेश कर सकते हैं। 

तीसरा विकल्प बन पहुंचेगी सत्ता तक

BJP may use Karnataka jds formula for victory in Andhra Pradesh assembly elections

पार्टी सूत्रों का कहना है कि जब कर्नाटक में कुमारस्वामी 38 सीटों के साथ कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बना सकते हैं, तो आंध्र प्रदेश में भाजपा ऐसा क्यों नहीं कर सकती। सूत्रों का कहना है कि इसके लिए जरूरी है कि भाजपा को राज्य में तीसरी विकल्प के रूप में पेश किया जाए। 

गौरतलब है कि आंध्र प्रदेश में वतर्मान विधानसभा में टीडीपी की 103, वाईएसआरसीपी की 66 और भाजपा की 4 सीटें हैं। भाजपा का मानना है कि टीडीपी के ‘‘दुष्प्रचार’’ के मुकाबले के लिए राज्य में व्यापक स्तर पर संपर्क कार्यक्रम चलाने की जरूरत है। 

एंटी इंकंबेंसी फैक्टर का मिलेगा फायदा

सूत्रों के मुताबिक भाजपा ने आंध्र प्रदेश में पार्टी को मजबूती देने के लिए राज्य को 3 जोन में विभाजित किया है। जिसके तहत पार्टी बूथ स्तर पर कमेटी बनाने के अलावा डोर-टू-डोर कैंपेन शुरू करेगी और सत्ताधारी पार्टी टीडीपी सरकार में भ्रष्टाचार और सरकारी योजनाओं के लिए धन के दुरुपयोग को जनता के सामने रखेगी।

साथ ही भाजपा ने टीडीपी के खिलाफ पैदा हुए एंटी इंकंबेंसी फैक्टर का फायदा उठाने के लिए भी रणनीति तैयार की है। इसके लिए टीडीपी को अवसरवादी पार्टी के रूप में लोगों के सामने पेश करने की होगी। इसके अलावा भाजपा उन आरोपों से निपटने के लिए काम करेगी, जिसमें टीडीपी राज्य के विकास में केंद्र की भाजपा सरकार के सहयोग न मिलने का प्रचार कर रही है। 

कोर कमेटी की बैठक में पार्टी ने आंध्रप्रदेश में प्रचार के लिए 3 वरिष्ठ केंद्रीय मंत्रियों नितिन गडकरी, पीयूष गोयल एवं प्रकाश जावड़ेकर को जिम्मेदारी सौंपी है। जिसमें केंद्र की कल्याणकारी योजनाओं के लाभों को घर-घर तक पहुंचाया जाएगा।

पीएम को दी 12 मांगों की सूची

BJP may use Karnataka jds formula for victory in Andhra Pradesh assembly elections

सूत्रों के मुताबिक भाजपा की रणनीति है कि टीडीपी और वाईएसआर कांग्रेस की मांगों को भी 'अपने तरीके से' जनता के सामने पेश किया जाए। सूत्रों का कहना है कि हाल ही में 11 जून को आंध्र प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष कन्ना लक्ष्मी नारायण ने राजधानी में प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की थी। 

नवनिर्वाचित भाजपा अध्यक्ष और पूर्व कांग्रेसी नेता ने राज्य की 12 मांगों की सूची प्रधानमंत्री को सौंपी, जिसमें विजाग रेलवे जोन, कडप्पा स्टील प्लांट, गिरिजन यूनिवर्सिटी, विजयवाड़ा और विशाखापट्टनम में मेट्रो चलाने और चार रायलसीमा वाले जिलों में विशेष औद्योगिक गलियारा बनाने की मांग उठाई गई। 

इसमें गौर करने वाली बात यह है कि ये सभी 12 मांगें राज्य के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की उन 19 मांगों वाली सूची से ली गई हैं, जिनके पूरा न होने के चलते नायडू ने एनडीए से किनारा कर लिया था। लेकिन कन्ना लक्ष्मी नारायण की सूची में राज्य को विशेष दर्जा देने और पोलावरम प्रोजेक्ट के विस्थापितों के पुर्नवास और जमीन अधिग्रहण को लेकर केन्द्र से मिलने वाली 33 हजार करोड़ रुपए का राशि का कोई जिक्र नहीं था। असल में केन्द्र में बैठी भाजपा इसे स्वर्णिम अवसर के तौर पर देख रही है कि कैसे टीडीपी सरकार पर प्रभावित परिवारों की अनदेखी का आरोप लगा कर सत्ता तक पहुंचने का रास्ता तय किया जा सकता है।

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