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आरक्षण का जिन्न बाहर आने से भाजपा परेशान

Sun, 22 Jan 2017 04:58 AM IST
संजय मिश्र/ अमर उजाला, नई दिल्ली
संजय मिश्र/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sun, 22 Jan 2017 04:58 AM IST
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BJP leadership worried about reservation comment
फाइल फोटो

यूपी चुनाव के ऐन मौके पर आरक्षण का जिन्न बाहर आने से भाजपा नेतृत्व परेशान है। संघ के प्रचार प्रमुख मनमोहन वैद्य ने आरक्षण को लेकर अपने बयान पर भले ही सफाई दे दी है। मगर पार्टी को यूपी में बिहार दोहराने की आशंका सताने लगी है। यही वजह है कि भाजपा से लेकर संघ का पूरा भगवा परिवार डैमेज कंट्रोल की कवायद में जुट गया है। वैद्य के बयान से मचे सियासी बवाल पर रणनीति के तहत भाजपा ने अपने आप को बैकफूट पर रखा है। 

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तो नुकशान की भरपाई के लिए संघ ने अपने सबसे तेजतर्रार सह सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले को मैदान में उतार रखा है। यदि मामला ज्यादा सियासी तूल पकड़ेगा तो संघ प्रमुख मोहन राव भागवत खुद किसी न किसी बहाने आरक्षण पर संघ के मत को सामने रख सकते हैं। वैसे होसबोले ने आरक्षण पर संघ का रूख स्पष्ट करते हुए कहा है कि संघ एससी, एसटी और ओबीसी को संविधान से प्रदत आरक्षण को जारी रखने के पक्ष में है। अभी इसकी आवश्यक्तता है। 
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आरक्षण बवाल पर संघ की ओर से मार्चे पर उतरे होसबोले ने शुक्रवार को भी वैद्य के बयान तुरंत बाद जयपुर में पत्रकार वार्ता कर आरक्षण पर रूख स्पष्ट किया। तो शनिवार को उन्होंने मनमोहन वैद्य के पिता और संघ के पूर्व प्रवक्ता रह चुके एमजी वैद्य के उस बयान पर भी सफाई दी है जिसमें वैद्य ने एससी और एसटी बिरादरी के अलावा बाकी जातियों को मिले आरक्षण के समीक्षा की बात कही है। 
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आरक्षण पर संघ के रूख को दोबारा से सामने रखते हुए होसबोले ने शनिवार को कहा है कि आरक्षण के विषय में संघ के मत को लेकर कुछ विवाद जारी करने का प्रयास हो रहा है। हम उसका कड़ा विरोध करते हैं। संघ आरक्षण के संबंध में क्या कहता है उसपर जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल और उसके बाद पत्रकार वार्ता में भी मैंने स्पष्ट किया था। 

क्यों सता रहा भाजपा को भय

BJP leadership worried about reservation comment
फाइल फोटो - फोटो : pti
नागपुर में मागो गोविंद वैद्य ने जो बयान दिया है वह उनका व्यक्तिगत अभिप्राय है। संघ उससे सहमत नहीं, संघ का मत स्पष्ट है कि एससी, एसटी और ओबीसी के लिए संविधान प्रदत आरक्षण जारी रहनी चाहिए। उसकी आवश्यक्त्ता आज भी है यही राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का अधिकारिक मत है। 

यूपी के संघ अधिकारी भी चिंतित
मनमोहन वैद्य के बयान के बाद से आरक्षण का सियासी जिन्न बाहर आने के बाद यूपी के वरिष्ठ संघ अधिकारी भी चिंतित हैं। वे भी मान रहे हैं कि वैद्य के बयान ने बेवजह का विवाद बढ़ा दिया है। चुनाव के मौके पर वैद्य को ऐसे मामलों पर जवाब से बचाना चाहिए था। यूपी से जुड़े संघ अधिकारियों को इस बात का भय सता रहा है कि बडे मुश्किल से यूपी में खत्म हो रहा सत्ता का बनवास वैद्य के बयान के बाद बिहार की तरह कहीं दूर न खिसक जाए। सूबे के शीर्ष प्रचारकों ने संघ के वरिष्ठ एवं केंद्रीय अधिकारियों से भी मामले पर चर्चा की है। 

क्यों सता रहा भाजपा को भय
यूपी चुनाव के ऐन मौके पर आरक्षण का राग निकले से भाजपा को भय सता रहा है। पिछले चुनावों परिणामों के अनुभव बताते हैं कि लोकसभा हो या विधानसभा के चुनाव जाति आधारित राजनीति भाजपा पर भारी पड़ी है। यही वजह है कि चुनाव के वक्त पार्टी की रणनीति जाति के बजाय धर्म , राष्ट्रवाद और विकास के मुद्दे पर ले जाने की रहती है। जिससे छोटे और क्षेत्रीय दल उसके आगे बौने हो जाते हैं। 

गौरतलब है कि संघ के प्रचार प्रमुख मनमोहन वैद्य ने जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में शुक्रवार को कहा था कि संविधान निर्माता बी आर अंबेडकर ने भी आरक्षण के हमेशा जारी रहने का समर्थन नहीं किया था। वैद्य ने कहा कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षण का विषय एक अलग संदर्भ में आया था। यह उनसे हुए ऐतिहासिक अन्याय को दूर करने के लिए संविधान में मुहैया कराया गया था। वह हमारी जिम्मेदारी थी, इसलिए उनके लिए आरक्षण का प्रावधान आरंभ से किया गया। 

वैद्य के इस बयान से ही यूपी के चुनावी दंगल में आरक्षण को लेकर सियासी बवाल खड़ा हो गया है। इससे पहले संघ प्रमुख मोहन भागवत ने भी बिहार चुनाव से ठीक पहले आरक्षण नीति की समीक्षा की जरूरत होने की ऐसी ही टिप्पणी की थी। बिहार विधानसभा चुनाव में भाजपा को इसका बड़ा खामियाजा उठाना पड़ा था क्योंकि पिछड़ी वर्गों का वोट नीतीश कुमार नीत महागठबंधन के पक्ष में समेकित हो गया था। 
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