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भाजपा को पूर्वी यूपी में ठाकुर बनाम ब्राह्मण जंग का डर, विवाद निपटारे का निर्देश

Fri, 08 Mar 2019 12:47 AM IST
आसिम खान हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली
हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली Published by: आसिम खान Updated Fri, 08 Mar 2019 12:47 AM IST
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BJP leadership's concern about the ruckus between Sharad Tripathi and Rakesh Singh Baghel

बुधवार को सांसद शरद त्रिपाठी और विधायक राकेश सिंह बघेल के बीच आम चुनाव से ठीक पहले ऑन कैमरा हुई मारपीट से भाजपा नेतृत्व सकते में है। नेतृत्व को डर है कि हालात नहीं संभालने की स्थिति में यह मामला पूर्वी उत्तर प्रदेश में ठाकुर बनाम ब्राह्मण का रूप न ले ले। यही कारण है कि केंद्रीय नेतृत्व ने राज्य सरकार के साथ-साथ राज्य संगठन को हर हाल में विवाद के निपटारे का निर्देश दिया है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक सांसद-विधायक मारपीट मामले में पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने राज्य पार्टी के अध्यक्ष, संगठन मंत्री, मुख्यमंत्री और वरिष्ठ मंत्रियों के साथ फोन पर अलग-अलग बात की है। 

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इन्हें हर हाल में विवाद का जल्द निपटारा करने और किसी भी सूरत में इसे दो बिरादरी के बीच जंग की धारणा नहीं बनने देने का निर्देश दिया है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि खासतौर से पूर्वी यूपी में इन दोनों बिरादरियों के बीच सियासी अदावत रही है। बीते लोकसभा और विधानसभा में भाजपा बहुत मुश्किल से दोनों बिरादरी को एक साथ साधने में सफल रही थी। अब जिस प्रकार दोनों के समर्थकों ने उग्र रूप अपना रखा है, उससे पूरे पूर्वी उत्तर प्रदेश में पार्टी का सियासी समीकरण गड़बड़ा सकता है। यह इसलिए भी कि कांग्रेस पहले से अगड़ी जातियों को साधने के लिए पूरा जोर लगा रही है।
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किसी एक पर नहीं होगी कार्रवाई

दो बिरादरी के बीच जंग की धारणा न बने, इसलिए इस मामले में शामिल दोनों नेताओं में से किसी एक के खिलाफ कार्रवाई नहीं होगी। पार्टी की पहली कोशिश दोनों के बीच समझौता करा कर विवाद को टालने की होगी। इसमें असफल रहने के बाद दोनों पक्षों पर समान कार्रवाई का रास्ता चुना जा सकता है।
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टिकट की लड़ाई भी है जड़

दरअसल इस जंग के पीछे लोकसभा चुनाव का टिकट भी है। सांसद त्रिपाठी के समर्थकों का कहना है कि राज्य भाजपा और सरकार का एक धड़ा बीते करीब डेढ़ साल से सांसद को अलग-थलग करने की कोशिश में था। इसी कोशिश के तहत उद़घाटनों और शिलान्य पट्टिका में सांसद का नाम नहीं डाला जा रहा था। विधायक बघेल सांसद त्रिपाठी के विरोधी खेमे के माने जाते हैं। 

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