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हमारी गलती से कश्मीर मुद्दे पर पाक तीसरा पक्ष’ बन गया: यशवंत सिन्हा

Tue, 03 Oct 2017 08:01 AM IST
एजेंसी, हैदराबाद
एजेंसी, हैदराबाद Updated Tue, 03 Oct 2017 08:01 AM IST
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bjp leader Yashwant Sinha says Pakistan has become the ' needed third party' on the Kashmir issue

अर्थव्यवस्था पर अपनी ही सरकार को घेरने वाले भाजपा के वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा ने कहा है कि जम्मू-कश्मीर में सेना को बैरकों में लौट जाना चाहिए। वहां चल रहे आतंकवाद रोधी अभियानों को सीआरपीएफ और राज्य पुलिस पर छोड़ देना चाहिए। यह वहां की आवाम के मन-मस्तिष्क पर मरहम की तरह काम करेगा।

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पूर्व विदेश मंत्री सिन्हा ने कहा, जम्मू-कश्मीर के मसले पर पाकिस्तान ‘जरूरी तीसरा पक्ष’ बन गया है। ऐसा हमारी ओर से ‘बार-बार की गई गलतियों’ के कारण हुआ है। हैदराबाद में एक कार्यक्रम में ‘कश्मीर - अब और आगे’ विषय पर बोलते हुए सिन्हा ने जम्मू-कश्मीर में अपने लोगों के साथ तत्काल बात किए जाने पर जोर दिया।
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उन्होंने कहा, पहले ही काफी हिंसा हो चुकी है। काफी लोग जान गंवा चुके हैं। इसमें सुरक्षा बलों के जवान भी शामिल हैं। अब यह सब खत्म करने का समय है। सिन्हा ने कहा, ‘जम्मू-कश्मीर में आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई में आगे रहना सेना की प्राथमिकता बन गई है। गावों या कस्बों, जहां भी आतंकी घटना होती है, सेना आगे रहती है।
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सीआरपीएफ और पुलिस उसके पीछे होते हैं।’ पूर्व मंत्री ने कहा, वह जम्मू-कश्मीर समेत देश के अंदर कानून एवं व्यवस्था की स्थिति संभालने के लिए सुरक्षा बलों के अत्यधिक इस्तेमाल के खिलाफ हैं। उन्होंने कहा, सेना को बैरकों में लौट जाना चाहिए।

'आंतरिक हितधारकों की पहचान करनी होगी' 

bjp leader Yashwant Sinha says Pakistan has become the ' needed third party' on the Kashmir issue

आतंकवादी ऑपरेशन को सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस पर छोड़ देना चाहिए। यह वहां की आवाम के मन-मस्तिष्क पर मरहम का काम करेगा। उन्होंने तर्क दिया कि सीआरपीएफ आतंकवाद से निपटने के लिए पूरी तरह प्रशिक्षित और सुसज्जित है। वह नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में स्थानीय पुलिस की मदद से नक्सलियों से अच्छे से निपट रही है।

यशवंत ने कहा, कश्मीर एक राजनीतिक समस्या थी। वहां के लोग बातचीत शुरू करना चाहते हैं, जैसा कि उनसे वादा किया गया था। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में बड़ी संख्या में लोगों ने पीएम नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस के उस संदेश का स्वागत किया था जिसमें उन्होंने कश्मीर समस्या को गोली और गाली से नहीं बल्कि कश्मीरियों को गले लगाकर हल करने की बात कही थी।

भाजपा नेता ने कहा, ‘कश्मीरी आवाम राजनीतिक प्रक्रिया शुरू होने का इंतजार कर रही है। लेकिन पहला काम आंतरिक हितधारकों की पहचान करना है। कृपया यह तय कीजिए कि वास्तविक हितधारक कौन हैं। उनकी पहचान करनी होगी। निसंदेह हितधारक राजनीतिक दल, सिविल सोसाइटी, विद्वान, व्यापारिक संस्थाएं, युवा और जम्मू-कश्मीर के विभिन्न क्षेत्रों से होंगे।

इसके बाद हमें यह तय करना होगा कि वार्ताकार कौन होगा।’ उन्होंने कहा, ‘जिस दिन केंद्र वार्ता शुरू करने में दिलचस्पी दिखाएगा और यह घोषणा करेगा कि ये लोग वार्ता करेंगे, राज्य के हालात में नाटकीय सुधार दिखने लगेगा।’ उन्होंने कहा, ‘आइये अपने लोगों, जम्मू-कश्मीर के अपने नागरिकों से वार्ता प्रक्रिया शुरू करते हैं। यह वार्ता शुरू करने का समय है क्योंकि कोई भी इंसान हिंसा नहीं चाहता। लोग शांति चाहते हैं।’

पूर्व मंत्री ने कहा, कुछ समय बाद हम पाकिस्तान से वार्ता शुरू करेंगे लेकिन यह जम्मू-कश्मीर में हमें अपने लोगों से वार्ता करने से नहीं रोकता। हमें पाकिस्तान को इस बात के लिए बाध्य करना होगा कि वह आतंकवाद और हिंसा का निर्यात बंद करे। 

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