कार्टून पर विवाद: केरल ललित कला अकादमी ने दिया अवार्ड, भाजपा ने बताया देश के लिए अपमानजनक
भारतीय जनता पार्टी ने केरल ललित कला अकादमी की ओर से एक कार्टून को सम्मानित किए जाने के फैसले पर सवाल उठाया है और कार्टून को देश के लिए अपमानजनक करार दिया है।
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केरल ललित कला अकादमी को एक कार्टून का सम्मानजनक उल्लेख करना भारी पड़ रहा है। भारतीय जनता पार्टी ने इस कार्टून को देश को अपमानित करने वाला बताते हुए अकादमी को निशाने पर लिया है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के सुरेंद्रन ने कहा कि अगर जिम्मेदार लोग अपने खुद के देश का अपमान करेंगे तो जो लोग देश से प्रेम करते हैं वो उनका विरोध करने में दो बार भी नहीं सोचेंगे। सुरेंद्रन ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, 'इस तरह के अन्याय की जांच के लिए जिम्मेदार लोगों को अपने कदम वापस लेने चाहिए वरना इसे खत्म करने के लिए लोग दखल देंगे।'
जिस कार्टून को लेकर यह विवाद हो रहा है वह अनूप राधाकृष्णन ने बनाया है। अकादमी ने कुछ दिन पहले इस कार्टून को सम्मानजनक उल्लेख के लिए चयनित किया था। इस कार्टून में विभिन्न देशों के प्रतिनिधि एक कोविड-19 चिकित्सा सम्मेलन में शामिल होते दिख रहे हैं। इस कार्टून में भारत के प्रतिनिधि को एक गाय के रूप में दिखाया गया है जो नारंगी रंग की एक शॉल में लिपटी हुई है।
समाचार एजेंसी पीटीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार अकादमी के चेयरमैन नेमोम पुष्पराज ने इस फैसले में अकादमी की कोई भूमिका न होने की बात कहते हुए कहा कि इस कार्टून का चयन एक ज्यूरी द्वारा किया गया था। इस ज्यूरी में कई जाने-माने कार्टूनिस्ट शामिल थे। उन्होंने कहा, 'अवार्ड के लिए कार्टून का चयन एक प्रख्यात ज्यूरी ने किया जिसमें कई प्रसिद्ध कार्टूनिस्ट शामिल थे। और हमारी इसमें कोई भूमिका नहीं है।' उन्होंने आगे बताया कि इससे पहले हमारी अकादमी ऐसे ही एक और कार्टून को भी अवार्ड दे चुकी है जिसमें हमारे मुख्यमंत्री की आलोचना की गई थी।'
पोन्नुरुन्नी के रहने वाले राधाकृष्णन और पेरुमनूर के रतीश रवि को सम्मानजनक उल्लेख के लिए चयनित किया गया था। पुरस्कार में प्रत्येक व्यक्ति को 25,000 रुपये और एक प्रशस्ति पत्र दिया जाता है। अवार्ड के लिए 58 प्रविष्टियां आई थीं और इनमें से 32 को छांटा गया था। इससे पहले साल 2019 में केरल ललित कला अकादमी ने एक कार्टून को सम्मानित किया था जिसमें दुष्कर्म के आरोपी बिशप फ्रैंको मुलक्कल को एक मुर्गे के रूप में दिखाया गया था। चर्च ने इस कार्टून की निंदा करते हुए इसे अभद्र बताया था और ईसाई प्रतीकों के प्रति अपमानजनक करार दिया था।