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भाजपा शासन में 'क्लीन मीट' तैयार, जल्द खाने को मिलेगा

Sun, 26 Aug 2018 01:14 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली Updated Sun, 26 Aug 2018 01:14 PM IST
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BJP government prepare to 'clean meat', get food soon
अहिंसा मीट से पूरा होगा मीट का स्वाद

भारत में भी 'अहिंसा मीट' मिलने वाला है। केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने भारत में भी क्लीन मीट का जिक्र छेड़ दिया है और इसे नाम दिया है- 'अहिंसा मीट'। ये ऐसा मीट होता है, जो लैब में तैयार किया जाता है। इसे तैयार करने में किसी जानवर की जान नहीं ली जाती है। यूरोपीय देशों में ऐसे क्लीन मीट के फॉर्मूले को अपनाने की कोशिश पहले ही जारी है। अब मेनका ने कहा है कि भारत भी क्लीन मीट को अपनाने के लिए तैयार है। 

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हैदराबाद में हुई एक बैठक में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री ने क्लीन मीट का जिक्र किया है, उन्होंने कहा-
 
53% लोग परंपरागत मीट छोड़ अहिंसा मीट खाने को तैयार।
मीट खाने वालों में से 66% परंपरागत मीट के साथ अहिंसा मीट भी अपनाने के लिए तैयार हैं। 
53% लोग तो अहिंसा मीट मिलने पर परंपरागत मीट छोड़ने तक को तैयार हैं। 
46% लोग अहिंसा मीट मिलने पर रोज इसे खरीदने के लिए तैयार हैं। 
यूएन फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गनाइजेशन की रिपोर्ट के मुताबिक- 2050 तक दुनिया में मीट की मांग 73% तक बढ़ जाएगी। ऐसे में क्लीन मीट प्रभावी विकल्प हो सकता है। 
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सबसे पहले 2013 में नीदरलैंड के वैज्ञानिक मार्क पोस्ट ने लैब में क्लीन मीट बनाया था।

BJP government prepare to 'clean meat', get food soon
meat
मेनका शनिवार को हैदराबाद में "फ्यूचर ऑफ प्रोटीन-फूड टेक रेवॉल्यूशन' विषय पर आयोजित एक बैठक में हिस्सा लेने आई थीं। यहां उन्होंने कहा- "भारत अहिंसा मीट के लिए पूरी तरह तैयार है। हम सामान्य मीट को अहिंसा मीट से रिप्लेस कर सकते हैं। अहिंसा मीट भारत में सूचना प्रौद्योगिकी और बिजली के बाद अगली बड़ी उपलब्धि होगा। इसके इस्तेमाल से गोहत्या और इसकी वजह से होने वाली लिंचिंग भी रुकेगी।' मेनका ने कहा कि भारत की प्रयोगशालाओं में ऐसा क्लीन मीट तैयार करने की टेक्नोलॉजी मौजूद है। 5 साल में इसे बाजार में लाने का लक्ष्य होना चाहिए। 

मेनका ने एक प्राइवेट सर्वे का हवाला देते हुए कहा कि- 66% लोग परंपरागत मीट के साथ-साथ अहिंसा मीट को भी खाने में शामिल करने के लिए तैयार हैं। 53% लोग तो अहिंसा मीट मिलने पर परंपरागत मीट खाना छोड़ने तक को तैयार हैं। वहीं 46% लोग तो ये तक कह रहे हैं कि अहिंसा मीट बाजार में आने लगा तो वो रोज ये मीट खरीदेंगे। अहिंसा मीट लैब में जानवरों के स्टेम सेल से तैयार किया जाता है। यानी जानवर की एक कोशिका की मदद से लैब में पूरा मीट तैयार होता है। 

बिना खून-खराबे के तैयार होने की वजह से ही इसे क्लीन मीट भी कहते हैं। पारंपरिक मीट की तुलना में क्लीन मीट महंगा जरूर पड़ता है। लेकिन टेक्नोलॉजी के सुलभ होने के साथ-साथ ये सस्ता भी हो सकता है। मेनका के साथ बैठक में शामिल विशेषज्ञों ने कहा कि कुछ दिनों में बीयर मेकिंग की तरह ही मीट मेकिंग का भी बड़ा बाजार होगा। मीटिंग में ये भी कहा गया कि उपभोक्ताओं को अपनी खाने की आदतें बदलने के लिए 3-आर फॉर्मूले का इस्तेमाल करना चाहिए। 3-आर का मतलब- रिड्यूसिंग (पुराने खाने को घटाना), रिप्लेसिंग (नए खाने को लाना) और रिफाइनिंग (पोषक तत्वों को लेना)। 
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