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भाजपा की कमाई एक हजार करोड़ से ज्यादा, इलेक्टोरल बॉन्ड से मिले 210 करोड़

Sat, 01 Dec 2018 07:34 PM IST
हरेन्द्र ,नई दिल्ली
हरेन्द्र ,नई दिल्ली Updated Sat, 01 Dec 2018 07:34 PM IST
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bjp gets 1027 crore and 210 crore from electoral bond spends most on rallies
भाजपा - फोटो : BJP
मुख्य निर्वाचन आयोग को सौंपी भाजपा की 2017-18 की सालाना ऑडिट रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि उसे इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए 210 करोड़ रुपए मिले हैं। जबकि वित्त वर्ष 2017-18 में 1027 करोड़ रुपए की आय हुई है, जो पिछले वित्त वर्ष की आय से 7 करोड़ रुपए कम है। ऑडिट रिपोर्ट में यह भी पता चला है कि चुनावी प्रोपेगेंडा, रैलियों और आंदोलनों पर पार्टी ने 567 करोड़ रुपए खर्च किए है।
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95 फीसदी भाजपा के खाते में

24 नवंबर को मुख्य निर्वाचन आयोग को सौंपी भाजपा की सालाना ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक मार्च 2018 तक इलेक्टोल बॉन्ड के जरिए 210 करोड़ रुपए मिले हैं। सरकार ने इलेक्टोरल बन्ड जारी करने का नोटिफिकेशन जनवरी 2018 में किया था। राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदों यानी चुनावी फंडिंग को साफ-सुथरा और पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने इसे लागू किया था। 01 से 10 मार्च तक चले पहले चरण में सरकार ने 222 करोड़ के 520 बॉन्ड जारी किए थे, जिसका 95 फीसदी हिस्सा भाजपा के खाते में गया है।
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अब तक 1678 बॉन्ड्स ही बिके

एसबीआई के आंकड़ों के मुताबिक ई-बॉन्ड का आखिरी पांचवा चरण 01 नवंबर से 10 अक्तूबर तक था और पहले तीन चरण में स्टेट बैंक ने 400 करोड़ के 900 बॉन्ड जारी किए थे और अब तक जारी 1785 बॉन्ड में से 1678 बॉन्ड्स खरीदे जा चुके हैं। इनमें सबसे ज्यादा मांग 10 लाख और एक करोड़ वाले बॉन्ड्स की रही है। वहीं पहले चरण में 212 बॉन्ड्स अकेले कोलकाता में ही खरीदे गए। वहीं 122 करोड़ के बॉन्ड्स मुंबई में खरीदे गए। इन बॉन्ड्स को एसबीआई की 29 शाखाओं से बेचा गया।
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कांग्रेस-एनसी ने नहीं दी रिपोर्ट

वहीं देश के सात राष्ट्रीय दलों में से केवल भाजपा, बसपा, सीपीआई और सीपीएम ने अपनी ऑडिट रिपोर्ट जारी की है। कांग्रेस, और राष्ट्रवादी कांग्रेस ने अभी तक अपनी रिपोर्ट जमा नहीं की है। सवाल उठता है कि इलोक्टोरल बॉन्ड्स के बाकी 12 करोड़ रुपए कहां हैं, क्योंकि भाजपा को छोड़ कर बाकी 4 दलों ने इलेक्टोरल बॉन्ड से मिली राशि का खुलासा नहीं किया है। हालांकि नियमों के तहत एक हजार, 10 हजार, एक लाख, 10 लाख और एक करोड़ के बॉन्ड खरीदे जा सकते हैं। इसे चुनाव आयोग की ढिलाई कहें या नियमों की अनदेखी पिछले वित्त वर्ष में 6 राष्ट्रीय दलों ने अपनी सालाना ऑडिट रिपोर्ट 13 सितंबर को ही जमा कर दी थी, केवल तृणणूल कांग्रेस की ऐसी थी, जिसने 18 अक्टूबर, 2017 को रिपोर्ट जमा की थी।

 

भाजपा की आय 1027 करोड़, खर्च 758 करोड़

ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक 1027 करोड़ की कुल आय में से भाजपा ने 758 करोड़ रुपए खर्च किए। रिपोर्ट में दिखाया गया है कि 22.79 करोड़ रुपए स्टाफ की सेलरी पर और विज्ञापनों पर 404 करोड़ रुपए खर्च किए, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह राशि 264 करोड़ रुपए थी। वहीं चुनावी प्रचार प्रसार पर कुल 567 करोड़ रुपए खर्च हुए। गौर करने वाली बात यह है कि पार्टी ने चुनावी साल में मोर्चा रैली और आंदोलनों पर 35 करोड़ रुपए खर्च किए, वहीं पिछले वित्त वर्ष में 78 करोड़ 90 लाख रुपए रैली-मोर्चों पर खर्च किए थे।

यात्राओं पर 86 करोड़ खर्च

रिपोर्ट से पता चलता है कि भाजपा का प्रशासनिक खर्च भी बढ़ा है मार्च तक 143 करोड़ रुपए प्रशासनिक कार्यों पर खर्च हुए, जबकि पिछले साल 69 करोड़ 78 लाख रुपए प्रशासनिक कार्यों पर खर्च हुए थे। वहीं पिछले साल मुकाबले इस वर्ष भाजपा नेताओं ने सबसे ज्यादा खर्च यात्राओं पर किया है। मार्च, 2018 तक भाजपा नेताओं ने 86 करोड़ 82 लाख रुपए ट्रैवल पर खर्च किए, जबकि मार्च, 2017 तक यह खर्च 31 करोड़ 96 लाख रुपए था। वहीं भाजपा का बिजली और पानी का खर्च भी बढ़ा है, जिस पर 4 करोड़ 94 लाख रुपए खर्च हुए, जबकि पिछले साल यह 3 करोड़ 37 लाख रुपए था। भाजपा ने बैठकों पर 32 करोड़ 64 लाख रुपए खर्च किए, जबकि मार्च 2017 तक यह खर्च 51 करोड़ 65 लाख रुपए था।

भाजपा के पास 496 करोड़ की एफडी 

इलेक्टोरल बॉन्ड के अलावा भाजपा की कमाई आजीवन सहयोग निधि से 64 करोड़ (2016-17 में 44 करोड़), मोर्चाओं से मिले 87 लाख 65 हजार (2016-17 में 25 करोड़) और बैठकों से 18 लाख (2016-17 में 4 करोड़ 37 लाख) मिले हैं। भाजपा को इस साल 437 करोड़ रुपए चंदा मिला है, जिसमें से 2017-18 में इलेक्टोरल ट्रस्टों से ही 167 करोड़ रुपए चंदा दिया। रिपोर्ट से पता चलता है कि भाजपा के पास कैश रिजर्व 16 करोड़ 52 लाख रुपए का है, जो पिछले साल के मुकाबले 2 करोड़ 87 लाख रुपए ज्यादा है। जबकि बैंकों में 309 करोड़ रुपए और 496 करोड़ रुपए से ज्यादा फिक्सड डिपोजिट में जमा है। 
 
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