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यूपीए से ज्यादा मोदी सरकार ने दिया 'विपक्ष' को महत्त्व, फिर भी नहीं मिला साथ: भाजपा

Sun, 28 Jul 2019 08:43 PM IST
Trainee Trainee डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Trainee Trainee Updated Sun, 28 Jul 2019 08:43 PM IST
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bjp general Secretary bhupendra yadav blog on UPA and opposition resistance tendency
भूपेंद्र यादव (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

भारत की संसद देश के लोगों के लिए जरूरी कानून बनाने के लिए बनाई गई है। इसका मूल काम है कि यह देश के लिए जरूरी कानून बनाए, या पुराने पड़ते कानूनों में समय के हिसाब से संसोधन करे। आज जब सत्र बढ़ाकर संसद के उसी मूल काम को आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है तब विपक्ष के कुछ लोग सत्र बढ़ाने का विरोध कर रहे हैं। यह बेहद अतार्किक और गैर जरूरी है। यह कहना है भाजपा के राज्यसभा सांसद भूपेंद्र यादव का। एक ब्लॉग के जरिए विपक्ष पर हमला करते हुए भाजपा के महामंत्री भूपेंद्र यादव ने रविवार को कहा कि सदन का चलना देश और उसके आवाम के लिए बेहद जरूरी है। लोकतंत्र की सफलता के लिए सरकार की भूमिका के साथ-साथ विपक्ष की आपत्तियां भी आवश्यक हैं। यही कारण है कि विपक्ष की आपत्तियों को ध्यान में रखते हुए कई कानूनों में समय-समय पर बदलाव भी किया गया है। लेकिन सिर्फ विरोध के लिए विरोध करने की सोच को सही नहीं ठहराया जा सकता। 

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उन्होंने कहा कि इस तरह का भ्रम फैलाया जा रहा है कि सरकार विपक्ष की आवाज को महत्त्व नहीं दे रही है। लेकिन इस तथ्य को ध्यान में रखा जाना चाहिए कि वर्ष 2009 से 2014 के बीच यूपीए के कार्यकाल में केवल पांच विधेयकों को प्रवर समिति के पास पुन: विचार के लिए भेजा गया था, जबकि वर्ष 2014 से 2019 के मोदी सरकार के कार्यकाल के दौरान 17 विधेयकों को पुनर्विचार के लिए प्रवर समिति को भेजा गया। इसी से यह बात स्पष्ट हो जाती है कि सरकार विपक्ष की महत्त्वपूर्ण भागीदारी को स्वीकार कर रही है।  
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भूपेंद्र यादव ने कहा कि, इस सहमति पूर्ण वातावरण के बावजूद विपक्ष ने अनेक बिलों को रोकने का काम किया है। तीन तलाक बिल का उदाहरण देते हुए यादव ने कहा कि बिल के कुछ बिंदुओं पर विपक्ष की असहमति के बाद उसमें परिवर्तन किए गए। लेकिन इसके बाद भी उसे राज्यसभा में विपक्ष का साथ नहीं मिला। इसके कारण इस बिल को तीसरी बार लोकसभा में लाना पड़ा है। उन्होंने कहा कि विपक्ष को सिर्फ विरोध की बजाय रचनात्मक प्रयास की सोच को अपनाना चाहिए।

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