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हिंदुत्व के साइनबोर्ड पर भाजपा संगठन और विकास के बूते लड़ सकती है 2019 का चुनाव

Thu, 27 Dec 2018 02:25 AM IST
गौरव द्विवेदी शशिधर पाठक, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, नई दिल्ली Published by: गौरव द्विवेदी Updated Thu, 27 Dec 2018 02:25 AM IST
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BJP can fight in Lok Sabha election on basis of development and organization with base of Hinduism
अमित शाह-नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो)

भाजपा हिंदुत्व को नहीं छोड़ सकती। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के एक बड़े अधिकारी का कहना है कि संघ भाजपा का मातृसंगठन है और उसका आधार हिंदुत्व है। संघ के मुख पत्र आर्गनाइजर ने अपने संपादकीय में भाजपा को हिंदुत्व और विकास के मुद्दे को समान महत्व देने का सुझाव दिया है।

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आर्गनाइजर की संपादकीय से साफ है कि भाजपा और संघ के भीतर हिन्दुत्व और हिन्दुत्व से जुड़े राम मंदिर जैसे मुद्दों को लेकर गंभीर विमर्श चल रहा है। भाजपा के महासचिव राम माधव लंबे समय से संघ के अघोषित प्रवक्ता रहे हैं। उन्होंने अधिकारिक बयान देते हुए कहा है कि राम मंदिर निर्माण को लेकर आध्यादेश का विकल्प हमेशा रहा है।
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राम माधव का कहना है कि उच्चतम न्यायालय ने चार जनवरी को अगली बेंच के निर्धारण के लिए तारीख दी है। भाजपा को उम्मीद है कि उच्चतम न्यायालय फास्ट ट्रैक तरीके से इस मामले की सुनवाई करके जल्द फैसला देगी। राम माधव ने कहा कि ऐसा नहीं होता, तो अन्य विकल्पों पर विचार करेंगे। राम माधव के इस बयान को कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद द्वारा लखनऊ में दिए वक्तव्य से जोड़कर देखा जा रहा है। भाजपा और केंद्र सरकार दोनों फिलहाल उच्चतम न्यायालय की तरफ देख रही है।

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राम मंदिर और इसे बनाने का कानून चाहिए : विहिप

हमें राम मंदिर और राम मंदिर बनाने का कानून चाहिए। विश्व हिंदू परिषद के अंतराष्ट्रीय संयुक्त महासचिव सुरेंद्र जैन ने कहा कि भाजपा 1989 में पारित हुए रिजॉल्यूशन से बंधी हुई है। इससे भाग नहीं सकती। उन्होंने कहा कि राम मंदिर निर्माण को लेकर विहिप पूरे देश में 500 सभाएं कर चुका है। लखनऊ में युवा कुंभ में देश के कोने-कोने से 5000 छात्र आए थे। 

सबने एक सुर में कहा कि जो राम मंदिर बनाएगा, वहीं हमारे वोट पाएगा। सुरेंद्र जैन कहते हैं कि राम मंदिर का निर्माण भाजपा और भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार की प्रतिबद्धता है। जैन का कहना है कि राम मंदिर को लेकर देश का माहौल बदल रहा है। भाजपा और केंद्र सरकार को भी अब इसका एहसास हो रहा है, बस देखते रहिए।

राम मंदिर निर्माण पर नहीं बनाया कानून तो?

यहां आकर विहिप की असहाय स्थिति नजर आने लगती है। सुरेंद्र जैन कहते हैं कि 29 जनवरी 2019 तक केंद्र सरकार के पास समय है। यदि तब तक सरकार ने कानून बनाने की पहल नहीं की या आध्यादेश नहीं लाई तो मामला प्रयागराज में आयोजित कुंभ में जाएगा। वहां 31 जनवरी और एक फरवरी 2019 को धर्म संसद में इसे रखा जाएगा और साधु संत समाज जो निर्णय लेंगे, उस पर आगे बढ़ेंगे। जैन कहते हैं कि राम भक्तों की सरकार है। यह राम मंदिर निर्माण को कैसे नजरअंदाज कर सकती है। 

राम के लिए राम भक्तों की सरकार ने क्या किया?

सुरेंद्र जैन के होंठ लड़खड़ाने लगे। विहिप के अंतरराष्ट्रीय संयुक्त महासचिव ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार ने कई कानून बनाए। राम का काम किया। उत्तर प्रदेश में गोरक्षा का सख्ती से पालन हो रहा है। पूरे देश में गोवध का कानून प्रभावी ढंग से अमल में आ रहा है। केंद्र सरकार ने ऐसे 600 धर्मांतरण कराने और विदेशों से चंदे के बल पर चलने वाले एनजीओ बंद कराए हैं। 

लेकिन यह पूछने पर कि भाजपा को 2019 के आम चुनाव में अयोध्या में राम मंदिर का मामला मुफीद नहीं लग रहा है और उत्तर प्रदेश में गोवंश से किसानों की बर्बाद हो रही फसल उसे भारी नुकसानदेह लग रही है? पार्टी इस तरह की रिपोर्ट से तंग है तो सुरेंद्र जैन ने कहा कि 31 जनवरी का इंतजार कीजिए। सब स्पष्ट हो जाएगा।

भाजपा को संगठन और विकास का सहारा

भाजपा सूत्रों की माने तो पार्टी हिंदुत्व से किनारा नहीं कर सकती, लेकिन हिंदुत्व को एक सीमा तक ही गले में बांधे रखा जा सकता है। इसलिए राम मंदिर निर्माण पर कोई निर्णायक निर्णय लेना भाजपा के लिए दुविधा की स्थिति है। इसे लेकर संघ और भाजपा में एक राय नहीं है। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह लगातार संगठन को धार दे रहे हैं। 

वह उत्तर प्रदेश से लेकर पूरे देश में पार्टी के बूथ प्रबंधकों, पन्ना प्रमुखों से लेकर ब्लाक, जिला, प्रदेश स्तर के लोगों के साथ संवाद करके सभी कील कांटे दुरुस्त कर रहे हैं। ताकि पार्टी के प्रचार, प्रसार, चुनाव प्रचार, प्रबंधन और कार्यकर्ता, नेता, जनता में बेहतर संबंध के जरिए लक्ष्य को हासिल किया जा सके। लोगों तक सरकार के कामकाज का संदेश पहुंचाया जा सके और उन्हें जागरूक किया जा सके। 

इसके सामानांतर केंद्र सरकार और भाजपा की राज्य सरकारों ने मिलकर विकास के कामकाज, इसके संदेश के प्रसारण और उच्चस्तरीय विकास की छवि बनाने को मुख्य एजेंड़ा बनाया है। माना जा रहा है कि हिंदुत्व के साइन बोर्ड पर भाजपा संगठन को दुरुस्त करके मोदी सरकार के विकास के एजेंडे पर 2019 के लोकसभा चुनाव में सत्ता में वापसी की तैयारी कर रही है।  

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