यूपी में 20 फीसदी दलित वोटों के लिए दिन-रात एक करेंगे भाजपा के 40 दलित सांसद
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मिशन उत्तर प्रदेश में करीब 20 फीसदी दलित वोटों को साधने के लिए भाजपा के 40 दलित सांसद दिन-रात एक करेंगे। विधानसभा चुनाव की अधिसूचना जारी होने से पहले ही इन सांसदों को दलित प्रभाव वाले 90 विधानसभा सीटों के चिह्नित इलाकों में मतदान होने तक जुटना होगा।
इन सांसदों की ड्यूटी उन्हीं इलाकों में लगेगी, जहां इनके स्वजातीय मतदाताओं की संख्या ठीक ठाक होगी। नेतृत्व ने न सिर्फ ऐसे विधानसभा बल्कि विधानसभा क्षेत्र के उन इलाकों की भी पहचान कर ली है, जहां अनुसूचित जाति के सांसदों को लगातार ड्यूटी बजानी है।
फिलहाल इस मिशन की कमान पार्टी नेतृत्व ने हाल ही में राज्यसभा लाए गए शिवप्रताप शुक्ला को दी है। शुक्ला ने सोमवार को इस क्रम में चुनिंदा दलित सांसदों के साथ लंबी बैठक भी की।
पार्टी की इस मुहिम में सक्रिय भूमिका निभा रहे एक सांसद के मुताबिक दरअसल योजना लोकसभा चुनाव की तरह विधानसभा चुनाव में भी बसपा प्रमुख मायावती के स्वजातीय जाटव मतदाताओं के इतर अनुसूचित जाति श्रेणी में शामिल अन्य जातियों को साधने की है। हालांकि, ऐसा नहीं है कि इस क्रम में जाटव मतदाताओं की अनदेखी की जाएगी।
क्या है रणनीति
रणनीति के तहत सभी दलित सांसदों के लिए विभिन्न विधानसभा क्षेत्र के चयनित गांवों का चयन किया जाना है। इस क्रम में सांसदों को उनके स्वजातीय बहुल गांव ही दिए जाएंगे। इन सांसदों को संभवत: सितंबर महीने के अंत से ही सूची में वर्णित स्थानों पर मतदान होने तक लगातार समय देना होगा।
इस क्रम में सांसद अपने स्वजातीय मतदाताओं को मोदी सरकार की दलितों के हित में किए गए कामों की जानकारी देंगे। मसलन मुद्रा योजना के तहत हर बैंक को कम से कम एक दलित को लोन देना, मंत्रिमंडल में बड़ी संख्या में दलित बिरादरी को शामिल किए जाने की जानकारी देना शामिल है।
राज्यसभा सदस्यों और सहयोगी दलों की भी लगेगी ड्यूटी
इस क्रम में राज्यसभा के दलित सांसदों और सहयोगी दलों के सांसदों की भी ड्यूटी लगेगी। सहयोगी दल की ओर से आरपीआई के रामदास अठावले का व्यापक इस्तेमाल किए जाने की योजना है।