जन्मदिन विशेष: मोहन भागवत को विरासत में मिला है संघ, उनके पिता ही आडवाणी को आरएसएस में लेकर आए थे
मोहन भागवत, यह एक ऐसा नाम है, जो किसी परिचय का मोहताज नहीं है। वह दुनिया के सबसे बड़े स्वयंसेवी संस्थान माने जाने वाले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के छठवें प्रमुख हैं। उनका पूरा नाम मोहनराव मधुकरराव भागवत है। 21 मार्च, 2009 को उन्हें संघ के सरसंघचालक के रूप में चुना गया था। संघ के पांचवें प्रमुख रहे के. एस. सुदर्शन ने अपनी सेवानिवृत्ति पर मोहन भागवत को अपने उत्तराधिकारी के रूप में चुना था।
महाराष्ट्र के चंद्रपुर नामक एक छोटे से नगर में 11 सितंबर, 1950 को जन्मे मोहन भागवत को संघ का काम विरासत में मिला है। उनके पिता मधुकरराव भागवत चंद्रपुर क्षेत्र के प्रमुख थे। उन्होंने गुजरात के प्रांत प्रचारक के रूप में भी कार्य किया था। मोहन भागवत के पिता ने ही भाजपा के 'पितामह' कहे जाने वाले लाल कृष्ण आडवाणी का परिचय संघ से कराया था।
एक बहन और तीन भाइयों में सबसे बड़े मोहन भागवत की स्कूली शिक्षा चंद्रपुर के ही लोकमान्य तिलक विद्यालय से हुई और उसके बाद अकोला से पशु चिकित्सा और पशुपालन में स्नातक की उपाधि प्राप्त की। हालांकि, साल 1975 में आपातकाल के समय उन्होंने पशु चिकित्सा में अपना स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम अधूरा छोड़ दिया और संघ के पूर्णकालिक स्वयंसेवक बन गये। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और संघ के कामों में लगे रहे, जिसका सबसे बड़ा फायदा उन्हें 2009 में मिला, जब उन्हें संघ का प्रमुख चुना गया।
मोहन भागवत अविवाहित हैं और वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख चुने जाने वाले सबसे कम आयु के व्यक्तियों में से एक हैं। उन्हें एक स्पष्टवादी, व्यावहारिक और दलगत राजनीति से संघ को दूर रखने के एक स्पष्ट दृष्टिकोण के लिये जाना जाता है।
महिलाओं के घोर विरोधी हैं भागवत?
भागवत को महिलाओं और पश्चिमी सभ्यता का घोर विरोधी भी माना जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि 6 जनवरी, 2013 को उन्होंने इंदौर में एक रैली के दौरान कहा था 'एक पति और पत्नी एक अनुबंध (कॉन्ट्रैक्ट) में बंधे होते हैं, जिसके तहत पति कहता है कि आपको मेरे घर का ख्याल रखना चाहिए और उसके बदले मैं आपकी सभी जरूरतों का ख्याल रखूंगा, मैं आपकी हमेशा रक्षा करूंगा। महिलाओं से घरों का काम करने की अपेक्षा की जाती है। पत्नियों को इस कॉन्ट्रैक्ट का पालन हमेशा करना पड़ता है, जबतक कि पति साथ है। लेकिन अगर पत्नी इस कॉन्ट्रैक्ट को तोड़ती है तो पति उसका परित्याग कर सकता है।'
इसके अलावा उन्होंने महिलाओं के साथ हो रहे रेप को लेकर भी एक विवादित बयान दिया था। उन्होंने कहा था 'ऐसे अपराध शायद ही कभी 'भारत' में होते हैं, लेकिन ये अक्सर 'इंडिया' में देखने को मिलते हैं। आप देश के गांवों और जंगलों में जाकर देखें तो वहां गैंगरेप या सेक्स अपराधों की ऐसी कोई घटना नहीं होती है। ये अपराध कुछ शहरी क्षेत्रों में ही प्रचलित हैं। नए कानूनों के अलावा, प्राचीन भारतीय मूल्यों के संदर्भ में महिलाओं के भारतीय संस्कार और दृष्टिकोण का पुनरीक्षण किया जाना चाहिए।'