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BDY SPL: हरिवंश राय बच्चन की दिल को छूने वाली कविताएं

Sun, 27 Nov 2016 11:59 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sun, 27 Nov 2016 11:59 AM IST
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Birthday Special: Harivansh rai Bachchan famous poetry
हरिवंश राय बच्चन - फोटो : self

जो बीत गई सो बीत गई

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जीवन में एक सितारा था
माना वह बेहद प्यारा था
यह डूब गया तो डूब गया
अंबर के आंगन को देखो
हरिवंश राय 'बच्‍चन' की यह पंक्तियां आज भी काव्यप्रेमियों की जुबान पर है। उनकी रचना मधुशाला हिंदी साहित्य की बेस्ट सेलर है। हिंदी के लोकप्रिय कवि व रचनाकार हरिवंश राय 'बच्चन' का आज जन्मदिन है। वो कविता के आकाश के वो सितारे रहे जिसने लाखों दिलों पर राज किया। उनके शब्द आज भी लोगों की जुबान पर उनकी याद को जिंदा कर देते हैं।

वृक्ष हों भले खड़े, 
हों घने, हों बड़े
एक पत्र छाँह भी
मांग मत! मांग मत! मांग मत! 
अग्निपथ! अग्निपथ! अग्निपथ!

अग्निपथ की लाइनें भी उनकी लेखनी को हमसब के बीच लाकर खड़ा कर देती हैं।  इलाहाबाद में 27 नवंबर 1907 को जन्मे बच्चन ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री ली और भारत की आजादी की लड़ाई में शामिल हो गए। उन्होंने कुछ समय पत्रकारिता की और एक स्कूल में पढ़ाया भी। पढ़ाते हुए ही उन्होंने एमए किया। इलाहाबाद विश्वविद्यालय में ही वह 1941 में अंग्रेजी के लेक्चरर हो गए। एक लेक्चरर और लेखक हरिवंश राय बच्चन की अग्निपथ की ये पंक्तियां भी कविता के आकाश में हमेशा के लिए अमर हो गईं।
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''यह महान दृश्य है,
चल रहा मनुष्य है,
अश्रु, स्वेद, रक्त से
लथ-पथ, लथ-पथ, लथ-पथ,  
अग्निपथ! अग्निपथ! अग्निपथ! '

'तेरा हार' उनकी कविताओं का पहला संकलन था

Birthday Special: Harivansh rai Bachchan famous poetry
हरिवंश राय बच्चन

हरिवंश राय बच्चन ब्रिटेन के कैंब्रिज विश्वविद्यालय में भी पढ़ाया। वहीं से उन्होंने 1952 में अंग्रेजी साहित्य में पीएचडी की डिग्री ली। कैंब्रिज से अंग्रेजी साहित्य में पीएचडी की डिग्री लेने वाले वह पहले भारतीय थे। भारत वापस लौट कर कुछ समय के लिए उन्होंने आल इंडिया रेडियो के साथ निर्माता के तौर पर काम किया। 

फिर प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु के कहने पर 1955 में बच्चन विदेश मंत्रालय के हिंदी विभाग से जुड़ गए और इस काम को वे अपनी सेवानिवृत्ती तक करते रहे। पहली पत्नी श्यामा के असमय देहांत के बाद बच्चन ने तेजी सूरी के साथ विवाह किया।

बच्चन का रचनात्मक काल 1932 से 1995 तक चला। 'तेरा हार' उनकी कविताओं का पहला संकलन था।

मृदु भावों के अंगूरों की आज बना लाया हाला,

Birthday Special: Harivansh rai Bachchan famous poetry
हरिवंश राय बच्चन

मृदु भावों के अंगूरों की आज बना लाया हाला,
प्रियतम, अपने ही हाथों से आज पिलाऊँगा प्याला,
पहले भोग लगा लूँ तेरा फिर प्रसाद जग पाएगा,
सबसे पहले तेरा स्वागत करती मेरी मधुशाला

प्यास तुझे तो, विश्व तपाकर पूर्ण निकालूँगा हाला,
एक पाँव से साकी बनकर नाचूँगा लेकर प्याला,
जीवन की मधुता तो तेरे ऊपर कब का वार चुका,
आज निछावर कर दूँगा मैं तुझ पर जग की मधुशाला

1935 में 'मधुशाला' के प्रकाशन के बाद उन्हें हिंदी कवि के रूप में पहचान मिली। उमर खैय्याम की रूबाइयत का असर बच्चन की रचना शैली पर था। मधुशाला, मधुबाला और मधुकलश में यह असर खूब दिखा। पहली पत्नी की असामयिक मृत्यु का यह गहरा दुख उनकी रचाना 'निशा निमंत्रण' में व्यक्त हुआ। इसके बाद बच्चन ने एकांत संगीत, आकुल अंतर और सतरंगिनी की रचना की। 1943 में बंगाल में भुखमरी से आहत होकर उन्होंने 'बंगाल का कल' नामक काव्य संग्रह लिखा। जनता के दुख से दुखी बच्चन ने 1946 में 'हलाहल' का प्रकाशन किया।

जगत-घट को विष से कर पूर्ण
किया जिन हाथों ने तैयार,
लगाया उसके मुख पर, नारि,
तुम्‍हारे अधरों का मधु सार,

नहीं तो देता कब का देता तोड़
पुरुष-विष-घट यह ठोकर मार,
इसी मधु को लेने को स्‍वाद
हलाहल पी जाता संसार!

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भावाकुल मन की कौन कहे मजबूरी

Birthday Special: Harivansh rai Bachchan famous poetry
हरिवंश राय बच्चन

मिलन यमिनी, प्रणय पत्रिका, घर के इधर उधर, आरती और अंगारे बुद्ध और नाचघर और दो चट्टानें ने उनकी अन्य रचनाएं थी। बॉलीवुड में भी उन्होने यश चोपड़ा की फिल्म सिलसिला के लिए 'रंग बरसे' और आलाप के लिए 'कोई गाता मैं सो जाता' जैसे लोकप्रिय गीत लिखे।

बच्चन साहब को साहित्य अकादमी, सोवियत लैंड नेहरु पुरस्कार, पद्म भूषण और सरस्वती सम्मान से सम्‍मानित किया गया। 18 जनवरी 2003 को 96 वर्ष की उम्र में बच्चन ने आखिरी सांस ली। जानेमाने फिल्म अभिनेता अमिताभ बच्‍चन हरिवंश राय बच्चन के बेटे हैं।

उनके जन्मदिन के मौके पर आप भी इन पक्तियों को पढ़कर उन्हें याद कर सकते हैं।

भावाकुल मन की कौन कहे मजबूरी।
बोल उठी है मेरे स्वर में
तेरी कौन कहानी,
कौन जगी मेरी ध्वनियों में
तेरी पीर पुरानी,
अंगों में रोमांच हुआ, क्यों
कोर नयन के भीगे,
भावाकुल मन की कौन कहे मजबूरी।

मैंने अपना आधा जीवन
गाकर गीत गँवाया,
शब्दों का उत्साह पदों ने
मेरे बहुत कमाया,
मोती की लड़ियाँ तो केवल
तूने इनपर वारीं,
निर्धन की झोली आज गई भर पूरी।
भावाकुल मन की कौन कहे मजबूरी।
https://www.youtube.com/watch?v=n_cBqBgFAns

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