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राजनीति के 14 बरस: कई बार बिखरे फिर संभले हैं 48 के राहुल, सांसद से पार्टी आलाकमान बनने तक का सफर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Tue, 19 Jun 2018 11:49 AM IST
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कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी मंगलवार 19 जून को 48 साल के हो गए। देशभर में कांग्रेस पार्टी उनके जन्मदिन को उत्सव की तरह मना रही है और कई कार्यक्रम का आयोजन किया है। प्रधानमंत्री मोदी समेत देश के जाने माने विपक्षी नेता भी उन्हें बधाई संदेश भेज रहे हैं।
ये वही राहुल हैं जिनकी कही बातों को कल तक मजाक में उड़ा दिया जाता था। उनकी बातों पर कान न देने की बात कही जाती थी। लेकिन आज उनमें देशवासियों को आगामी प्रधानमंत्री की छवि दिख रही है। उनकी बातों को संजीदगी से लिया जाने लगा है। पिछले एक से डेढ़ साल में राहुल में गजब परिवर्तन देखने को मिला है। वह आज जो भी बोलते हैं उनकी बातों में वजन होता है। उनकी बातें सुनी जाती है। राहुल ने राजनीति की शुरुआत 2004 में अमेठी में एक भाषण से की थी। विरासत में राजनीति मिलने के बाद भी राहुल के लिए सांसद से पार्टी उपाध्यक्ष और अब अध्यक्ष बनने का सफर कांटों भरा रहा है। उन्हें एक फ्लॉप राजनेता साबित करने की सारी चालें धराशाई होती नजर आ रही हैं क्योंकि 14 सालों में राहुल एक बेहतरीन नेता के रूप में उभरे हैं।
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ये वही राहुल हैं जिनकी कही बातों को कल तक मजाक में उड़ा दिया जाता था। उनकी बातों पर कान न देने की बात कही जाती थी। लेकिन आज उनमें देशवासियों को आगामी प्रधानमंत्री की छवि दिख रही है। उनकी बातों को संजीदगी से लिया जाने लगा है। पिछले एक से डेढ़ साल में राहुल में गजब परिवर्तन देखने को मिला है। वह आज जो भी बोलते हैं उनकी बातों में वजन होता है। उनकी बातें सुनी जाती है। राहुल ने राजनीति की शुरुआत 2004 में अमेठी में एक भाषण से की थी। विरासत में राजनीति मिलने के बाद भी राहुल के लिए सांसद से पार्टी उपाध्यक्ष और अब अध्यक्ष बनने का सफर कांटों भरा रहा है। उन्हें एक फ्लॉप राजनेता साबित करने की सारी चालें धराशाई होती नजर आ रही हैं क्योंकि 14 सालों में राहुल एक बेहतरीन नेता के रूप में उभरे हैं।
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राहुल की शख्सियत है कि कल तक हरबात पर मजाक का पात्र बने
यह राहुल की शख्सियत ही है कि कल तक हरबात पर मजाक का पात्र बनाए जाने वाले को पक्ष और विपक्ष गंभीरता से सुन रहा है। मौजूदा सरकार ने राहुल की बातों की काट के लिए पूरी टीम बना रखी है। वहीं देश की सभी छोटी बड़ी पार्टियां उनकी एक आवाज पर एकत्रित हो रहे हैं और देश तीसरे सबसे बड़े गठबंधन की ओर बढ़ रहा है।
आज राहुल का वह भाषण याद आ रहा है जहां उनका मजाक उड़ाने के लिए सोशल मीडिया पर उसे खूब तोड़- मरोड़ कर पेश किया गया। उनके भाषणों के वीडियो मॉर्फ्ड किया गया। फिरोजाबाद में उन्होंने किसानों से बातचीत करते हुए आलू के चिप्स की फैक्ट्री लगाने की बात कही थी लेकिन उसे आलू की फैक्ट्री बता कर वायरल कराया गया। उनकी छवि बिगाड़ने की भरपूर कोशिश की गई।
राहुल ने पिछले दिनों कुछ ऐसा कहा जिसका मजाक बनाने की कोशिश की गई, लेकिन आलू के चिप्स वाले भाषण जैसा प्रभाव नहीं डाल सका।
राजधानी दिल्ली में एससी एसटी सम्मेलन में राहुल गांधी ने कहा, 'कोका-कोला कंपनी को शुरू करने वाला एक शिकंजी बेचने वाला व्यक्ति था। वह अमेरिका में शिकंजी बेचता था। पानी में शक्कर मिलाता था। उसके काम का आदर हुआ। उसे पैसा मिला और कोका-कोला कंपनी बनी। '
राहुल ने आगे कहा, 'कोका-कोला की तरह मैकडोनाल्ड कंपनी का मालिक भी कभी ढाबा चलाता था और आज दुनियाभर में उसका नाम है। भारत में आज एक भी ऐसा ढाबा वाला नहीं है, जो कोका-कोला जैसी बड़ी कंपनी खड़ा कर सकता है।'
आज राहुल का वह भाषण याद आ रहा है जहां उनका मजाक उड़ाने के लिए सोशल मीडिया पर उसे खूब तोड़- मरोड़ कर पेश किया गया। उनके भाषणों के वीडियो मॉर्फ्ड किया गया। फिरोजाबाद में उन्होंने किसानों से बातचीत करते हुए आलू के चिप्स की फैक्ट्री लगाने की बात कही थी लेकिन उसे आलू की फैक्ट्री बता कर वायरल कराया गया। उनकी छवि बिगाड़ने की भरपूर कोशिश की गई।
राहुल ने पिछले दिनों कुछ ऐसा कहा जिसका मजाक बनाने की कोशिश की गई, लेकिन आलू के चिप्स वाले भाषण जैसा प्रभाव नहीं डाल सका।
राजधानी दिल्ली में एससी एसटी सम्मेलन में राहुल गांधी ने कहा, 'कोका-कोला कंपनी को शुरू करने वाला एक शिकंजी बेचने वाला व्यक्ति था। वह अमेरिका में शिकंजी बेचता था। पानी में शक्कर मिलाता था। उसके काम का आदर हुआ। उसे पैसा मिला और कोका-कोला कंपनी बनी। '
राहुल ने आगे कहा, 'कोका-कोला की तरह मैकडोनाल्ड कंपनी का मालिक भी कभी ढाबा चलाता था और आज दुनियाभर में उसका नाम है। भारत में आज एक भी ऐसा ढाबा वाला नहीं है, जो कोका-कोला जैसी बड़ी कंपनी खड़ा कर सकता है।'
पिछले एक साल में राहुल ने लच्छेदार भाषण देने की कला सीखी है
राहुल गांधी
पिछले एक साल में राहुल ने लच्छेदार भाषण देने की कला सीखी है। आम जनता को कैसे बातों से आकर्षित किया जाता है वह भी सीखा है। उनके हाव-भाव में बड़ा बदलाव देखा जा रहा है। और इसी बदलाव के बीच राहुल के उन भाषण की बात जिसके बाद उनका मजाक बनाया गया लेकिन जैसे ही उन्होंने 'जीएसटी' की तुलना 'गब्बर सिंह टैक्स'से की वह अचानक ही हीरो बन गए।
यह कहना गलत नहीं होगा कि अब राहुल गांधी का भाषण पीएम नरेंद्र मोदी जैसा लच्छेदार होने लगा है। मोदी आम लोगों के सामने जिस तरह से अपनी बात रखते हैं, अपने भाषण के दौरान लोगों से जुड़ाव बनाते हैं, वही कला अब राहुल में भी झलकती है।
गुजरात चुनाव के दौरान उन्होंने जीएसटी को 'गब्बर सिंह टैक्स' कहकर इसे लोगों की जुबान पर चढ़ाया उसने खूब वाहवाही बटोरी। वहीं उन्होंने बार-बार देश की जनता के सामने अपनी गलती स्वीकारी। उन्होंने कहा कि हम अपनी गलतियों से सीखते हैं।
भ्रष्टाचार के कुंए में डूबी कांग्रेस को राहुल ने निकालना शुरू कर दिया है। लगातार हार का सामना कर रही कांग्रेस की स्थिति उपचुनावों में सुधरी है बल्कि पार्टी ने कांग्रेस ने समझौता करना भी सीख लिया है। हाल ही में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उपरने के बाद भी कर्नाटक में उन्होंने जेडीएस के साथ समझौता किया।
यह कहना गलत नहीं होगा कि अब राहुल गांधी का भाषण पीएम नरेंद्र मोदी जैसा लच्छेदार होने लगा है। मोदी आम लोगों के सामने जिस तरह से अपनी बात रखते हैं, अपने भाषण के दौरान लोगों से जुड़ाव बनाते हैं, वही कला अब राहुल में भी झलकती है।
गुजरात चुनाव के दौरान उन्होंने जीएसटी को 'गब्बर सिंह टैक्स' कहकर इसे लोगों की जुबान पर चढ़ाया उसने खूब वाहवाही बटोरी। वहीं उन्होंने बार-बार देश की जनता के सामने अपनी गलती स्वीकारी। उन्होंने कहा कि हम अपनी गलतियों से सीखते हैं।
भ्रष्टाचार के कुंए में डूबी कांग्रेस को राहुल ने निकालना शुरू कर दिया है। लगातार हार का सामना कर रही कांग्रेस की स्थिति उपचुनावों में सुधरी है बल्कि पार्टी ने कांग्रेस ने समझौता करना भी सीख लिया है। हाल ही में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उपरने के बाद भी कर्नाटक में उन्होंने जेडीएस के साथ समझौता किया।