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सतर्कता: 'कच्चा दूध न पीएं, मांसाहारी भोजन पर्याप्त तापमान पर पकाएं', बर्ड फ्लू को लेकर केंद्र की सलाह

Tue, 30 Apr 2024 06:34 AM IST
निर्मल कांत परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली।
परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Tue, 30 Apr 2024 06:34 AM IST
सार

केंद्र ने राज्यों से कहा है कि अभी तक के मौजूदा साक्ष्य बताते हैं कि इन्सानों तक एवियन इन्फ्लूएंजा को पहुंचने से रोका जा सकता है। अमेरिका के करीब आठ राज्यों में संक्रमित मवेशियों के दूध में वायरस की पुष्टि हुई है।

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Bird Flu: Do not drink raw milk, cook non-vegetarian food at adequate temperature, Centre's advice
बर्ड फ्लू (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

अमेरिका और भारत के कुछ हिस्सों में फैले बर्ड फ्लू को लेकर केंद्र सरकार ने सतर्कता बरते हुए लोगों से कच्चे दूध का सेवन न करने की सलाह दी है। साथ मांसाहारी भोजन पर्याप्त तापमान पर पकाकर खाने की सलाह दी है।

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केंद्र ने राज्यों से कहा है कि अभी तक के मौजूदा साक्ष्य बताते हैं कि इन्सानों तक एवियन इन्फ्लूएंजा को पहुंचने से रोका जा सकता है। अमेरिका के करीब आठ राज्यों में संक्रमित मवेशियों के दूध में वायरस की पुष्टि हुई है। भारत के केरल, झारखंड और महाराष्ट्र के कुछ जिलों में भी यह संक्रमण पाया गया है। ऐसे में लोगों को दूध को अच्छे से उबालकर सेवन  करने की सलाह दी है। ऐसा करने से मनुष्यों में वायरस के संचरण को रोकने में मदद मिलेगी।
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केंद्रीय स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. अतुल गोयल की अध्यक्षता में मौसमी इन्फ्लूएंजा को लेकर समीक्षा की गई, जिसमें प्रभावित राज्यों के अलावा आईसीएमआर के शीर्ष अधिकारी और वैज्ञानिक मौजूद रहे। बैठक में एच5एन1 और एच1एन1 दोनों तरह के इन्फ्लूएंजा को लेकर चर्चा की गई। यह दोनों ही वायरस एक परिवार का हिस्सा हैं और केरल के तीन जिलों की बत्तख में एच1एन1 संक्रमण की पुष्टि हुई है। अगर भारत की बात करें तो हर साल कम से कम दो बार इस वायरस का पीक देखने को मिलता है। पहला पीक जनवरी से मार्च और दूसरा मानसून के बाद सामने आता है।
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अस्पतालों में मरीजों की रखें निगरानी 
बैठक में अधिकारियों ने सलाह दी है कि जिन जिलों में संक्रमण के मामले सामने आ रहे हैं वहां के अस्पतालों की ओपीडी और मरीजों के भर्ती होने पर निगरानी बढ़ाई जाए। अस्पतालों में इन्फ्लूएंजा (आईएलआई) और गंभीर तीव्र श्वसन संक्रमण (एसएआरआई) के मामलों को दर्ज किया जाए और इसकी जानकारी राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) को भेजी जाए। साथ ही प्रत्येक संदिग्ध या संक्रमित रोगी के सैंपल की जीनोम सीक्वेंसिंग अनिवार्य है जिसके लिए आईसीएमआर की देश भर में प्रयोगशाला हैं।


केंद्र ने टीकाकरण के दिए आदेश 
स्वास्थ्य महानिदेशक ने कहा है कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है। मौसमी और एवियन इन्फ्लूएंजा वायरस पर भी निगरानी रखी जा रही है। मंत्रालय ने राज्य सरकारों को एच1एन1 मामलों से निपटने वाले स्वास्थ्य देखभाल कर्मियों के टीकाकरण के लिए भी  सलाह दी है। अभी तक देश के किसी भी जिले में चिंताजनक हालात सामने नहीं आए हैं लेकिन एहतियात के तौर पर सह बीमारी, मासूम बच्चे और बुजुर्गों की निगरानी रखना बहुत जरूरी है।

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