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एनजीटी ने पंजाब, गुजरात समेत कई राज्यों को भेजा जमानती वारंट
एजेंसी, नई दिल्ली
Updated Fri, 19 Aug 2016 12:25 AM IST
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जैव विविधता के संरक्षण पर चल रही सुनवाई में भाग नहीं लेने वाले कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई करते हुए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने उन राज्यों के स्थानीय आयुक्तों के खिलाफ जमानती वारंट जारी किया है।
एनजीटी की समिति देश में विशेष जैव विविधता पर ध्यान नहीं देने वाले कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों पर लगे आरोपों की सुनवाई कर रही थी। याचिका में जैव विविधता अधिनियम, 2002 और जैव विविधता कानून, 2004 के प्रावधान लागू करने की भी मांग की गई थी। एनजीटी के अध्यक्ष जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने गुजरात, कर्नाटक, मणिपुर, मिजोरम, ओडिशा, पंजाब और त्रिपुरा के स्थानीय आयुक्तों को नोटिस जारी करने के बावजूद समिति के समक्ष उपस्थित नहीं होने के कारण उनके खिलाफ जमानती वारंट जारी किया है।
इसके अलावा चंडीगढ़, अंडमान निकोबार, लक्षद्वीप और पुडुचेरी के अधिकारियों को भी यह वारंट जारी किया गया है। पीठ के एक अन्य सदस्य जस्टिस एम. एस. नांबियार ने कहा, ‘नोटिस जारी करने के बाद भी कोई जवाब देने के लिए सामने नहीं आया। नतीजतन हमने इन सभी जवाबदेह अधिकारियों के रेजिडेंट आयुक्तों के खिलाफ जमानती वारंट जारी किया है। हमने एनजीटी अधिनियम, 2010 के अनुच्छेद 19 (4)(ए) के प्रावधानों और अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए प्रत्येक आयुक्त के लिए 10 हजार रुपये का जमानती वारंट भेजा है।’ पुणे निवासी चंद्र भाल सिंह की याचिका पर पीठ ने अगली सुनवाई 29 सितंबर को तय की है। ट्रिब्यूनल ने इससे पहले इसी मामले में पर्यावरण एवं वन मंत्रालय, राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण और राज्य जैव विविधता बोर्डों को नोटिस जारी किया था।
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एनजीटी की समिति देश में विशेष जैव विविधता पर ध्यान नहीं देने वाले कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों पर लगे आरोपों की सुनवाई कर रही थी। याचिका में जैव विविधता अधिनियम, 2002 और जैव विविधता कानून, 2004 के प्रावधान लागू करने की भी मांग की गई थी। एनजीटी के अध्यक्ष जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने गुजरात, कर्नाटक, मणिपुर, मिजोरम, ओडिशा, पंजाब और त्रिपुरा के स्थानीय आयुक्तों को नोटिस जारी करने के बावजूद समिति के समक्ष उपस्थित नहीं होने के कारण उनके खिलाफ जमानती वारंट जारी किया है।
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इसके अलावा चंडीगढ़, अंडमान निकोबार, लक्षद्वीप और पुडुचेरी के अधिकारियों को भी यह वारंट जारी किया गया है। पीठ के एक अन्य सदस्य जस्टिस एम. एस. नांबियार ने कहा, ‘नोटिस जारी करने के बाद भी कोई जवाब देने के लिए सामने नहीं आया। नतीजतन हमने इन सभी जवाबदेह अधिकारियों के रेजिडेंट आयुक्तों के खिलाफ जमानती वारंट जारी किया है। हमने एनजीटी अधिनियम, 2010 के अनुच्छेद 19 (4)(ए) के प्रावधानों और अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए प्रत्येक आयुक्त के लिए 10 हजार रुपये का जमानती वारंट भेजा है।’ पुणे निवासी चंद्र भाल सिंह की याचिका पर पीठ ने अगली सुनवाई 29 सितंबर को तय की है। ट्रिब्यूनल ने इससे पहले इसी मामले में पर्यावरण एवं वन मंत्रालय, राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण और राज्य जैव विविधता बोर्डों को नोटिस जारी किया था।
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