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मानसून सत्र में पास होगा ये विधेयक... प्रावधानों को लेकर 'सेक्स वर्कर' में आक्रोश

Thu, 26 Jul 2018 05:39 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 26 Jul 2018 05:39 PM IST
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Bill to be passed in monsoon session : sex workers anguished on provisions

"मुझे एक फोन कॉल आता है, उनके बताए पते पर मैं जाती हूं, हम सेक्स करते हैं और फिर दोनों के रास्ते अलग-अलग। फिर शुरू हो जाता है अगले फोन कॉल का इंतजार। अगला दिन भी ऐसे ही गुजरता है। कभी इंतजार में तो कभी धंधे में। ये सब मैं अपनी आजीविका के लिए करती हूं। महीने में शायद 10 दिन काम मिलता है बाकी के दिन खाली बैठी रहती हूं"

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सेक्स वर्कर के तौर पर अपनी मर्जी से काम करने वाली कुसुम अपने बारे में खुल कर बात करती हैं।

कुसुम का कहना है कि कानून की नजर में वो कोई गलत काम नहीं कर रही हैं। लेकिन मानव तस्करी के नए कानून से वो खफा हैं। उनका मानना है कि इस कानून की वजह से वो अपनी जिदगी सही तरीके से नहीं चला सकेंगी।

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एड्स शब्द से परहेज

Bill to be passed in monsoon session : sex workers anguished on provisions
गुस्से में कुसुम कहती हैं, "लोगों को ऐसा लगता है कि देश भर में हम एड्स फैलाने वाली कोई मशीन हैं। नए कानून में हमारे लिए सीधे तौर कुछ नहीं कहा गया है। पर एक जगह लिखा है कि तस्करी कर लाए लोगों में जो कोई भी एड्स फैलाएगा उस पर भी ये कानून लागू होगा। साफ है कि इशारा हमारी तरफ़ है। नहीं तो मानव तस्करी के कानून में एड्स शब्द क्यों डाला जाएगा।"

Bill to be passed in monsoon session : sex workers anguished on provisions

व्यक्तियों की तस्करी (रोकथाम, सुरक्षा और पुनर्वास) बिल, 2018 में सरकार ने नए सिरे से तस्करी के सभी पहलुओं को परिभाषित किया है।

नई परिभाषा के मुताबिक़ तस्करी के गंभीर रूपों में जबरन मजदूरी, भीख मांगना, समय से पहले जवान करने के लिए किसी व्यक्ति को इंजेक्शन या हॉर्मोन देना, विवाह या विवाह के लिए छल या विवाह के बाद महिलाओं और बच्चों की तस्करी शामिल है।

नए बिल के नए प्रावधानों के मुताबिक :

  • पीड़ितों, शिकायतकर्ताओं और गवाहों की पहचान को गोपनीय रखना
  • 30 दिन के अंदर पीड़ित को अंतरिम राहत और चार्जशीट दायर करने के बाद 60 दिन के अंदर पूरी राहत देना
  • एक साल के अंदर अदालत में सुनवाई पूरी करना
  • इमेज कॉपीरइट AINSW
  • पकड़े जाने पर कम से कम 10 साल और अधिकतम उम्र क़ैद की सजा और एक लाख रुपए का जुर्माना
  • पहली बार मानव तस्करी में शामिल होने पर सम्पत्ति जब्त करने का अधिकार
  • राष्ट्रीय जांच एजेंसी ( एनआईए) को तस्करी विरोधी ब्यूरो बनाना
  • इतना ही नहीं पीड़ितों के लिए पहली बार पुनर्वास कोष भी बनाया गया है, जो पीड़ितों के शारीरिक, मनोवैज्ञानिक समर्थन और सुरक्षित निवास के लिए होगा।
  • पुनर्वास पर आपत्ति


नए प्रावधानों को जब हमने कुसुम के सामने रखा तो उनका एक सवाल था, ' हमारी जीविका छीन लो और फिर कहो कि पुनर्वास करवा देंगे. ये कहां का इंसाफ है'?

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उनके मुताबिक : ट्रांसजेंडर भी साथ नहीं हैं

Bill to be passed in monsoon session : sex workers anguished on provisions

वो आगे कहती हैं, ''सरकारी पुनर्वास का मतलब कौन नहीं जानता? हम सुधार गृह के किसी कोने में डाल दिए जाएंगे जहां हमारी सुध लेने वाला कोई नहीं होगा? हमें ऐसा सुधार नहीं चाहिए।''

कुसुम खुद एक सेक्स वर्कर तो हैं, साथ ही साथ वो ऑल इंडिया नेटवर्क ऑफ सेक्स वर्कर (AINSW) की अध्यक्ष भी हैं। ऑल इंडिया नेटवर्क ऑफ सेक्स वर्कर के मुताबिक देश में तकरीबन 10 लाख सेक्स वर्कर हैं, जिनमें से तकरीबन 80 फीसदी अपनी मर्जी से इस पेशे से जुड़ी हैं।
 

कमेटियों से क्या मिलेगा?

AINSW की ओर से आरोप लगाए गए हैं कि सरकार ने कानून लाने के पहले न तो कोई रिसर्च की और न ही कोई स्टडी।

इस बिल से कुछ और आपत्तियां भी हैं।

  • बिल में 10 नई कमेटियां बना दी गई हैं, कई पहले से भी मौजूद थीं। ये सिर्फ दिक्कतों को और बढ़ावा देगा न कि तस्करी रोकने में मदद करेगा।
  •  तस्करी रोकने के लिए पहले से मौजूद कई और कानून जैसे आईपीसी में धारा 370 तस्करी के लिए है। बंधुआ मज़दूरी के लिए भी कई कानून मौजूद हैं, इस नए कानून से किसी का भला होता नहीं दिखता।
  • ट्रांसजेंडर और सेक्स वर्कर को इस नए कानून के बाद ज्यादा परेशान किया जाएगा।

Bill to be passed in monsoon session : sex workers anguished on provisions
ट्रांसजेंडर भी साथ नहीं हैं

यही बात बिहार की किन्नर कल्याण बोर्ड की अध्यक्ष रेशमा भी कहती हैं। उनका कहना है, "ट्रांसजेंडर के लिए भी नए कानून में कुछ साफ नहीं कहा गया है। हमारे यहां गुरू-शिष्या परंपरा सदियों से चली आ रही है। शिष्य एक गुरू से निकल कर दूसरे गुरू के पास जाते हैं तो उसमें पैसे का लेन देन भी होता है। अब इसे भी तस्करी से जोड़ कर देखा जाने लगेगा और पुलिस परेशान करने लगेगी।"

लेकिन क्या अपनी आपत्तियों के बारे में किन्नर और सेक्स वर्कर समुदाय ने सरकार को बताया है?

रेशमा कहती हैं, "इस मुद्दे पर हम मेनका गांधी से मिले, सांसदों से मिले, कुछ सांसदों ने हमारी ओर से मंत्री को चिट्ठियां भी लिखी, लेकिन हाथ कुछ नहीं लगा। इसी सूरत में अगर ये कानून पास हो गया तो हमारे बुरे दिन शुरू हो जाएंगे।"

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक़ 2016 में मानव तस्करी के कुल 8132 आंकड़े सामने आए थे जबकि 2015 में इनकी संख्या 6877 थी। राज्यों की बात करें तो 2016 में मानव तस्करी के सबसे ज़्यादा मामले पश्चिम बंगाल से सामने आए। दूसरे नंबर पर राजस्थान और तीसरे नंबर पर गुजरात था।

इन आपत्तियों के बीच सरकार संसद के इसी सत्र में ये बिल ले कर आ रही है।
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