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नन्हे-मुन्नों पर होमवर्क का बोझ हटाने के लिए मानसून सत्र में आएगा बिल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
Updated Sun, 03 Jun 2018 09:45 PM IST
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जिस उम्र में खेल-कूद किसी भी बच्चे के लिए बेहद अहम माना जाता है, उस उम्र में अपने नन्हे-मुन्ने के स्कूल से आने के बाद भी होमवर्क में फंसे रहने को लेकर चिंतित रहने वाले अभिभावकों के लिए खुशखबरी है। मानव संसाधन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने बताया कि केंद्र सरकार कक्षा 1 और कक्षा 2 में बच्चों को होमवर्क नहीं देने के लिए मानसून सत्र में संसद में बिल पेश करने जा रही है।
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मानव संसाधन मंत्री का ये बयान मद्रास हाईकोर्ट के 30 मई को इस मामले में केंद्र सरकार को राज्य सरकारों को निर्देश जारी करने का निर्णय देने के बाद आया है। जावड़ेकर ने शनिवार को एक प्रेस वार्ता के दौरान कहा, मेरा मानना है कि बिना मस्ती के कुछ भी नहीं सीखा जा सकता है। मैं अदालत के निर्णय का स्वागत करता हूं। हम निर्णय का अध्ययन कर रहे हैं और जो भी आवश्यक होगा, जरूर करेंगे।
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सरकार आगामी मानसून सत्र में ही संसद में बच्चों को मुफ्त व अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 को अनुपालन में ‘नो होमवर्क’ बिल पेश करेगी और उम्मीद है कि इस मंजूरी मिल जाएगी। उन्होंने कहा, बच्चों पर कोई भी दबाव नहीं होना चाहिए। हम अदालत के निर्णय के अनुपालन में बच्चों के ऊपर से दबाव घटाने के लिए जो भी आवश्यक होगा, वह करेंगे।
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हाईकोर्ट ने कहा था, वेटलिफ्टर नहीं हैं बच्चे
बता दें कि मद्रास हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा था कि बच्चे कोई वेटलिफ्ट नहीं हैं, ना ही स्कूल बैग भरे हुए कंटेनर हैं। हाईकोर्ट ने सरकार को ये सुनिश्चित करने को कहा था कि स्कूल बैग का वजन बच्चे के अपने वजन के 10 फीसदी से ज्यादा नहीं होना चाहिए। साथ ही जस्टिस एन. किरुबाकरन ने केंद्र सरकार को राज्य सरकारों से ये कहने के निर्देश दिए थे कि कक्षा 1 व 2 के बच्चों को भाषा व गणित छोड़कर कोई अन्य विषय निर्धारित ना करें।