Bihar: 'नीतीश सोचें कब तक जनता पर होगी गोलीबारी, महागठबंधन में रहने की क्या मजबूरी', संतोष मांझी बोले
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विस्तार
नीतीश कुमार सरकार में मंत्री रह चुके संतोष कुमार सुमन ने बिजली की मांग पर जनता पर गोलीबारी किये जाने की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा है कि नीतीश कुमार को बताना चाहिए कि उनकी ऐसी क्या मजबूरी है कि वे एक ऐसे गठबंधन में हैं, जहां उनके नाम को लगातार बदनाम किया जा रहा है। आइए पढ़ते हैं उनसे की बातचीत विस्तार से...
प्रश्न- बिजली मांगने पर बिहार में जनता के ऊपर गोली चलाए जाने की घटना घटी है। आप नीतीश कुमार सरकार में मंत्री रह चुके हैं। इस घटना पर क्या कहेंगे?
उत्तर- यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और शर्मनाक है कि लोकतंत्र की जननी माने जाने वाले बिहार में आज बिजली मांगने पर लोगों के ऊपर गोली चलाई जा रही है। उससे भी ज्यादा शर्मनाक है कि बिहार सरकार के ऊर्जा मंत्री इस गोलीबारी को सही ठहरा रहे हैं। पूरे बिहार में लोगों को शिकायत है कि बिजली नहीं आती है, स्मार्ट मीटर गलत बिल बना रहे हैं। लोगों को उपयोग से ज्यादा बिल भरना पड़ रहा है। इन गलतियों को दूर करने की बजाय बिजली मांगने पर लोगों पर गोली चलाई जा रही है। इससे ज्यादा अपमानजनक और कुछ नहीं हो सकता।
प्रश्न- सरकार ने कहा है कि बिजली के लिए प्रदर्शन में लोग उग्र हो गए थे जिसके कारण पुलिस को गोली चलानी पड़ी।
उत्तर- ये क्या बात हुई? यदि प्रदर्शन के दौरान जनता थोड़ी उग्र हो भी गई, तो क्या जनता पर गोली चलाई जाएगी। वे अपनी ही जनता पर जनरल डायर की तरह गोलीबारी नहीं करा सकते। यह केवल एक घटना नहीं है। इसके पहले जब भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया था तब भी उनके ऊपर लाठीचार्ज कर दिया गया, जिसमें एक वरिष्ठ नेता की मौत हो गई। क्या अब सरकार विपक्षी दलों और जनता सब पर गोली चलाएगी। क्या बिहार में अब शासन इसी तरह चलेगा?
प्रश्न- आप नीतीश कुमार सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। क्या कहेंगे, नीतीश कुमार से कहां गलती हो रही है?
उत्तर- इस बात में कोई शक नहीं कि नीतीश कुमार जी का पहले का शासन बहुत अच्छा था। उस दौरान बिहार में विकास के कई कार्य हुए। जनता ने बिहार के जंगलराज से परेशान होकर ही एक विकल्प के रूप में उन्हें अवसर दिया था। लेकिन अचानक ही वे एक बार फिर उन्हीं लोगों के साथ जाकर खड़े हो गए हैं जो बिहार में जंगलराज लाने के दोषी थे। नीतीश कुमार जी को बताना चाहिए कि उनकी ऐसी क्या राजनीतिक मजबूरी है कि वे ऐसे लोगों के साथ महागठबंधन में होने के लिए मजबूर हैं, जिन्होंने बिहार को जंगलराज दिया था। उनके साथ आते ही नीतीश कुमार के शासन में भी उसी तरह की घटनाएं घटने लगी हैं। मुख्यमंत्री बताएं कि ऐसा कब तक चलेगा?
प्रश्न- यदि समस्या ऐसी है तो इसका विकल्प क्या है, स्थिति में सुधार कैसे होगा?
उत्तर- सरकार को बताना चाहिए कि ऐसा क्यों हो रहा है। हम जनता के बीच जाएंगे और सरकार से सवाल पूछेंगे। बिहार में कानून-व्यवस्था इतनी खराब हो चुकी है कि अब सरकार को सत्ता में रहने का कोई अधिकार नहीं है। हम केंद्र सरकार और राष्ट्रपति से मांग करते हैं कि बिहार की जनता को इस आतंक से बचाने के लिए तत्काल राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाना चाहिए।
प्रश्न- एक सवाल चुनाव को लेकर, पिछली बार भाजपा ने जदयू को साथ में लेकर 39 सीटों पर शानदार सफलता हासिल की थी। लेकिन इस बार जदयू राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस के साथ खड़ी है। ऐसे में अगले लोकसभा चुनाव में एनडीए के सामने क्या चुनौती रहने वाली है? आप कितनी सीटों पर जीत हासिल कर पाएंगे?
उत्तर- पिछले चुनाव के सबसे बड़े लाभार्थी तो नीतीश कुमार ही थे, जो बिहार में तीसरे नंबर की पार्टी रहने के बाद भी इतनी ज्यादा सीटों पर जीत गए थे। यानी उनकी अपनी लोकप्रियता नहीं थी, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता का लाभ उन्हें मिला। इस बार भी एनडीए अपना पिछला प्रदर्शन बरकरार रखेगा। आज नीतीश कुमार और महागठबंधन की छवि खराब हो चुकी है। बिहार की जनता उन्हें इस बार सबक सिखाने के लिए तैयार है। उन्हें भी इस जमीनी बदलाव का पता जल्द ही चल जाएगा।