केरल में वाम सरकार की सबसे बड़ी चुनौतियां
केरल के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले 72 साल के सीपीएम नेता पिनराई विजयन को पार्टी का एक मजबूत नेता माना जाता है।
वे करीब 17 साल तक पार्टी की राज्य इकाई के सचिव रह चुके हैं जो इस पद पर उनका सबसे लंबा कार्यकाल रहा है।
उन्हें सरकार में ऊर्जा मंत्री रहने के दौरान प्रशासनिक कामों का अनुभव है, जिसकी आगे और परीक्षा होने वाली है। विजयन के कैबिनेट में 12 सीपीएम के, चार सीपीआई के और जनता दल सेक्युलर, एनसीपी और कांग्रेस (एस) के एक-एक मंत्री हैं।
पहली चुनौती आर्थिक मोर्चे पर होगी
कैबिनेट के चयन की सोशल मीडिया पर मलयालियों के बीच काफी तारीफ हो रही है। कैबिनेट में केवल नए चेहरे शामिल नहीं हैं बल्कि ऐसे लोगों की संख्या अधिक है जिनके पास जनता के मुद्दों का राजनीतिक हल निकालने का अच्छा खासा अनुभव है।
इस कैबिनेट की अहमियत इसलिए भी अधिक है क्योंकि त्रिपुरा के बाद केरल दूसरा राज्य है जहां वामदल की सरकार सत्ता में है।
विश्लेषकों का मानना है कि विजयन और उनके मंत्रियों के लिए पहली चुनौती आर्थिक मोर्चे पर होगी।
वहीं राजनीतिक स्तर पर उसका सामना कांग्रेस नेतृत्व वाले यूडीएफ और बीजेपी से है। तिरुवनंतपुरम में सेंटर ऑफ डेवलपमेंटल स्टडीज में प्रोफेसर केएन हरिलाल ने बीबीसी को बताया, "आर्थिक मोर्चे पर सरकार को कई चुनौतियों का सामना करना पडेगा।
खाडी संकट केरल की अर्थव्यवस्था पर बुरी तरह से प्रभाव डाल रहा है। मध्यपूर्व में बसे कई मलयाली वापस आ रहे हैं। वहां से आने वाली रकम पर भी खतरा मंडरा रहा है। वैसे ही राज्य में अन्य राज्यों की तुलना में विकास दर कम है।''
शासन प्रणाली की पारदर्शिता में लोगों का विश्वास बहाल करना सबसे बड़ी चुनौती होगी
प्रोफेसर हरिलाल का कहना है कि पिछले तीन चार सालों में कर वसूली में कमी आई है जिससे राज्य पर कर्ज बढा है।"
पूर्व मंत्री और सीपीएम नेता प्रोफेसर एमए बेबी भी प्रोफेसर हरिलाल की बात से सहमत दिखते हैं।
उनका कहना है, "नई सरकार के लिए सबसे अहम होगा शासन प्रणाली की पारदर्शिता में लोगों का विश्वास बहाल करना। सार्वजनिक उपयोग वाली सेवाओं को दुरुस्त करना, लाखों कर्मचारियों को पेंशन का एरियर और मनरेगा का बकाया देना।"
प्रोफेसर हरिलाल के अनुसार, नई सरकार के लिए कमाई के वैकल्पिक स्रोतों को ढूंढना मुख्य चुनौती होगी।
शराबबंदी को लेकर नीति बनाना होगा अहम चुनौती
उनका कहना है, "बीयर और वाइन की बिक्री बढी है और राज्य में शराबबंदी को लेकर कोई नीति नहीं है। इस पर नई सरकार को काम करना होगा।"
लेकिन प्रोफेसर हरिलाल और प्रोफेसर बेबी दोनों का ही मानना है कि केरल के समाज में राजनीतिक तौर पर धर्मनिरपेक्ष चरित्र को बनाए रखना भी सरकार के लिए चुनौती होगी।
हरिलाल का कहना है कि बीजेपी ने एक सीट जीती है लेकिन वो काफी प्रभावशाली बनकर उभरी है और उसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
बेबी ने कहा, "हाल में दिल्ली में बीजेपी के प्रतिनिधिमंडल के राष्ट्रपति से मिलने का उद्देश्य मात्र ऐसा दिखाना है कि लेफ्ट उन पर हमला कर रहा है। जबकि सच्चाई कुछ और है।
यह मुख्यमंत्री विजयन का ही चुनावी क्षेत्र था, जहां बीजेपी ने हमारे एक कामरेड की हत्या कर दी थी।"