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India G20: भूपेंद्र यादव बोले- बेंगलुरु में होने वाली जी20 बैठक में ब्लू इकॉनमी को बढ़ावा देने पर होगी चर्चा

Tue, 07 Feb 2023 01:07 AM IST
गुलाम अहमद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गुलाम अहमद Updated Tue, 07 Feb 2023 01:07 AM IST
सार

केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय 9 से 11 फरवरी को बेंगलुरु में पहली पर्यावरण और जलवायु स्थिरता कार्य समूह की बैठक करेगा। पर्यावरण को लेकर भारत की अध्यक्षता में जी-20 की यह पहली बैठक है।

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Bhupender Yadav says India G20 presidency to bring integrated approach to address climate change blue economy
Bhupender Yadav - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

केंद्रीय वन पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने बताया कि बेंगलुरु में होने वाली जी-20 के पर्यावरण और जलवायु स्थिरता समूह की बैठक कई मायनों में खास होगी। बैठक में इस बार भूमि क्षरण को रोकने की दिशा में पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली में तेजी लाने और जैव विविधता को समृद्ध करने के लिए स्थाई और जलवायु लचीली ब्लू इकॉनमी को बढ़ावा देने पर चर्चा होगी। उन्होंने कहा कि बैठक में संसाधन दक्षता और अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करने के विषय पर भी सदस्य देशों के साथ परामर्श होगा।

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यादव बैठक को लेकर मीडिया के साथ जानकारी साझा कर रहे थे। केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय 9 से 11 फरवरी को बेंगलुरु में पहली पर्यावरण और जलवायु स्थिरता कार्य समूह की बैठक करेगा। पर्यावरण को लेकर भारत की अध्यक्षता में जी-20 की यह पहली बैठक है। यह एक एकीकृत व्यवस्था के तहत जलवायु परिवर्तन को संबोधित करने और सतत विकास के साथ जलवायु परिवर्तन व्यापक और सर्वसम्मति से संचालित दृष्टिकोण स्थापित करने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ेगी। 
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इस संदर्भ में केंद्रीय पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने बताया कि बेंगलुरु में होने वाली पर्यावरण और जलवायु स्थिरता समूह की बैठक लाइफ स्टाइल फॉर एनवायरनमेंट और रेसिलियंट डेवलपमेंट पैराडाइम को बढ़ावा देगी। इस आयोजन में दुनिया के साथ जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए एक एकीकृत और सर्वमान्य दृष्टिकोण के साथ पर्यावरण संरक्षण पर मंथन किया जाएगा। इस बैठक के बाद पर्यावरण को लेकर गांधीनगर, मुंबई और चेन्नई में भी ऐसी ही बैठकों का आयोजन किया जाएगा।
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भारत 2030 तक 45 फीसदी कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए प्रतिबद्ध
भूपेंद्र यादव ने मंगलवार को कहा कि भारत सतत विकास को जारी रखते हुए 2030 तक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 45 फीसदी मूल्य तक कार्बन उत्सर्जन कम करने और 2070 तक नेट-जीरो तक पहुंचने के लक्ष्य को लेकर प्रतिबद्ध है। वह यहां भारत ऊर्जा सप्ताह में ‘अनिश्चित भविष्य के लिए अनुकूलन: वैश्विक साझेदारी को फिर से आकार देना’ विषय पर मंत्रिस्तरीय सत्र को संबोधित कर रहे थे।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में भारत ऐसे समय में दुनिया में सद्भाव और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस और सामूहिक संकल्प दिखाने की क्षमता के साथ वैश्विक अगुआ देशों में उभरा है जब दुनियाभर में ऊर्जा आपूूर्ति शृंखला चरमरा गई है। इसके चलते दुनियाभर में आवश्यक वस्तुओं का संकट पैदा हो गया है।

  • यादव ने कहा कि वैश्विक साझेदारी को फिर से आकार देने के लिए भारत ने निजी क्षेत्र, नागरिक समाज संगठनों, स्थानीय समुदायों और कमजोर लोगों समेत राष्ट्रीय, राज्यीय और स्थानीय सरकारों के स्तर पर संलग्न सरकारों के साथ ‘संपूर्ण समाज’ का दृष्टिकोण अपनाया है।


ऊर्जा सुरक्षा सर्वोपरि, पर जलवायु परिवर्तन के लक्ष्यों की कीमत पर नहीं
पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा सर्वोपरि है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इसने जलवायु परिवर्तन के लक्ष्यों को हासिल करने की अपनी प्रतिबद्धता को किसी भी तरह से कम किया है।

पुरी ने कहा, भारत का विकास वैश्विक विकास को गति देगा, क्योंकि यह दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है।  उन्होंने यह टिप्पणी यहां भारत ऊर्जा सप्ताह में 9वें एशियाई मंत्रिस्तरीय गोलमेज सम्मेलन के समापन सत्र में की, जिसका विषय था ‘स्थिर और सुरक्षित ऊर्जा मार्गों का मानचित्रण-ऊर्जा सुरक्षा, न्याय, विकास और नवाचार।’ केंद्रीय मंत्री ने कहा कि एशिया के भीतर आने वाले दशकों में भारत में ऊर्जा की मांग में सबसे ज्यादा वृद्धि होगी। भारतीय ऊर्जा की मांग 2021 के 1.86 करोड़ बैरल प्रतिदिन से बढ़कर 2045 में 3.77 करोड़ बैरल प्रतिदिन होने का अनुमान है। एजेंसी

विकास, जलवायु अनुकूल नीतियां बनाने पर जोर : भारत ऊर्जा सप्ताह को संबोधित करते हुए संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के उद्योग व उन्नत प्रौद्योगिकी मंत्री सुल्तान अल जबर ने कहा कि विकास के साथ ही जलवायु परिवर्तन अनुकूल नीतियां बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि नीतियां ऐसी होनी चाहिए जो उत्सर्जन रोकें, विकास नहीं। यूएई भारत को चौथा सबसे बड़ा कच्चे तेल का आपूर्तिकर्ता है।



ऊर्जा सुरक्षा अब वैश्विक नहीं : सेचिन
रूस की बड़ी तेल कंपनी रोजनेफ्ट के मुख्य कार्यकारी इगोर सेचिन ने भारत ऊर्जा सप्ताह में कहा कि कोई एकीकृत वैश्विक ऊर्जा बाजार नहीं है और ऊर्जा सुरक्षा अब वैश्विक भी नहीं है। उन्होंने कहा कि बाजार व्यापार के सभी सिद्धांतों को नष्ट कर दिया गया है और बाजार मूल्य निर्धारण और अनुबंध कानून को समाप्त कर दिया गया है।

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