फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Bhopal Gas Tragedy: SC tells Centre Can not decide curative plea for additional funds as lawsuit

भोपाल गैस कांड: SC ने केंद्र से कहा- अतिरिक्त धन के लिए क्यूरेटिव याचिका को मुकदमे के रूप में तय नहीं कर सकते

Thu, 12 Jan 2023 02:15 AM IST
देव कश्यप पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली। Published by: देव कश्यप Updated Thu, 12 Jan 2023 02:15 AM IST
सार

शीर्ष अदालत ने कहा कि वह पहले ही अपने उपचारात्मक क्षेत्राधिकार की 'मर्यादा' (पवित्रता) के बारे में कह चुकी है और कुछ छूट होने के बावजूद कानून के दायरे में विवश है।

विज्ञापन
Bhopal Gas Tragedy: SC tells Centre Can not decide curative plea for additional funds as lawsuit
सुप्रीम कोर्ट। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को केंद्र से कहा कि वह 'चमकते कवच में शूरवीर' की तरह काम नहीं कर सकता और 1984 के भोपाल गैस त्रासदी के पीड़ितों को मुआवजा देने के लिए यूनियन कार्बाइड कॉरपोरेशन (यूसीसी) की उत्तराधिकारी कंपनियों से 7,844 करोड़ रुपये की अतिरिक्त मांग वाली उपचारात्मक याचिका (Curative Plea) पर फैसला नहीं कर सकता।

विज्ञापन


शीर्ष अदालत ने कहा कि वह पहले ही अपने उपचारात्मक क्षेत्राधिकार की 'मर्यादा' (पवित्रता) के बारे में कह चुकी है और कुछ छूट होने के बावजूद कानून के दायरे में विवश है।न्यायमूर्ति संजय किशन कौल की अध्यक्षता वाली पांच-सदस्यीय संविधान पीठ ने केंद्र की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी से कहा कि किसी और की जेब ढीली कराना और पैसा निकालना बहुत आसान होता है। अपनी खुद की जेब ढीली करें और पैसे दें और फिर विचार करें कि क्या आप उनकी (यूसीसी की) जेब ढीली करवा सकते हैं या नहीं।
विज्ञापन


केंद्र 1989 में हुए समझौते के हिस्से के रूप में अमेरिकी कंपनी से प्राप्त 47 करोड़ अमेरिकी डॉलर (करीब 715 करोड़ रुपये) के अलावा अमेरिकी कंपनी यूसीसी की उत्तराधिकारी कंपनियों से 7,844 करोड़ रुपये चाहता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


उपचारात्मक याचिका दाखिल करने को लेकर केंद्र से सवाल करते हुए जस्टिस कौल ने कहा कि मैंने अधिकार क्षेत्र की 'मर्यादा' कहकर सुनवाई की शुरुआत की। आप देखिए, हम शूरवीर नहीं बन सकते। यह संभव नहीं है। हम विवश हैं। हालांकि कानून के दायरे में हमारे पास कुछ छूट हैं, लेकिन हम यह नहीं कह सकते कि हम एक मूल मुकदमे के क्षेत्राधिकार के आधार पर एक उपचारात्मक याचिका का फैसला करेंगे।

संविधान पीठ में न्यायमूर्ति कौल के अलावा न्यायमूर्ति संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति अभय एस ओका, न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति जेके माहेश्वरी शामिल हैं। पीठ ने मंगलवार से लेकर बुधवार तक वेंकटरमणी के माध्यम से केंद्र की दलीलें कम से कम सात घंटे तक सुनी। संविधान पीठ ने कहा कि जहां तक देयता और मुआवजे का संबंध है, पक्षों के लिए यह हमेशा खुला होता है कि वह कहे कि मैं समझौता करना चाहता हूं और किसी भी तरह के मुकदमेबाजी से छुटकारा पाना चाहता हूं। अब, आप (केंद्र) समझौते को संशोधित करना चाहते हैं। क्या आप इसे एकतरफा कर सकते हैं? यह एक डिक्री नहीं बल्कि एक समझौता है।

केंद्र इस बात पर जोर देता रहा है कि 1989 में बंदोबस्त के समय मानव जीवन और पर्यावरण को हुई वास्तविक क्षति की विशालता का ठीक से आकलन नहीं किया जा सका था। बुधवार को सुनवाई बेनतीजा रही और बृहस्पतिवार को भी इस मामले में सुनवाई जारी रहेगी।


गौरतलब है कि साल 1984 में दो और तीन दिसंबर की रात में यूनियन कार्बाइड के कारखाने से लगभग 40 टन ‘मिथाइल आइसोसाइनेट’ गैस का रिसाव हुआ था। ये गैस पूरे भोपाल शहर में फैल गई थी, जिससे वहां अफरा-तफरी मच गई थी। इस त्रासदी से सबसे ज्यादा प्रभावित इलाके यूनियन कार्बाइड के कारखाने के आस-पास के थे। इस दौरान लोग अचानक बेहोश होकर गिरने लगे थे। जिसके बाद उनकी मौत हो गई थी। सरकारी दस्तावेजों के मुताबिक, हादसे में मरने वालों की संख्या 5,295 के करीब थी। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed