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भीमा कोरेगांव हिंसा: फडणवीस ने पवार पर लगाया आरोप, कहा- बिना सबूत हिंदुत्ववादियों को फंसा रहे हैं
Sun, 23 Feb 2020 09:28 PM IST
अनवर अंसारी
पीटीआई, मुंबई
पीटीआई, मुंबई
Published by: अनवर अंसारी
Updated Sun, 23 Feb 2020 09:28 PM IST
सार
महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस ने रविवार को एनसीपी प्रमुख शरद पवार पर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके पास भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में हिंदुत्ववादियों (हिंदू समर्थकों) को लेकर कोई ठोस सबूत नहीं है और वह केवल उन्हें फंसाने की कोशिश कर रहे हैं। महाराष्ट्र विधानसभा में बजट सत्र के शुरू होने से एक दिन पहले फडणवीस ने पत्रकारों से बातचीत में ये आरोप लगाए।
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देवेंद्र फडणवीस (फाइल फोटो)
- फोटो : Facebook
विस्तार
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि मेरे कार्यकाल के दौरान राज्य के गृह विभाग ने भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में व्यापक जांच की थी। फडणवीस के कार्यकाल के दौरान गृह विभाग का प्रभार भी उनके पास ही था। उन्होंने कहा कि हिंसा पर राकांपा प्रमुख शरद पवार की पहली प्रतिक्रिया यही थी कि इसके पीछे हिंदुत्ववादियों का हाथ है। लेकिन पुलिस को उनके दावे के समर्थन में कोई सबूत नहीं मिला।
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फडणवीस ने आरोप लगाया कि जांच की समूची प्रक्रिया के दौरान न तो बॉम्बे हाईकोर्ट और न ही सुप्रीम कोर्ट ने आपत्ति जताई। एक अलग एसआईटी की स्थापना के बावजूद पवार भीमा कोरेगांव हिंसा घटना में हिंदुत्ववादियों को फंसाना चाहते हैं।
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पुणे पुलिस के अनुसार 31 दिसंबर, 2017 को माओवादियों ने समर्थन से पुणे में एल्गार परिषद के सम्मेलन में भड़काऊ भाषण दिए गए थे, जिसके कारण अगले दिन जिले में भीमा कोरेगांव युद्ध स्मारक में जातीय हिंसा हुई थी। दक्षिणपंथी धड़े के नेता मिलिंद एकबोटे और सांभाजी भीड़े भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में आरोपी हैं।
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पुणे पुलिस ने एल्गार परिषद मामले में माओवादियों से संबंध के आरोप में वामपंथी विचारधारा के सामाजिक कार्यकर्ता सुधीर धावले, रोना विल्सन, सुरेंद्र गाडलिंग, महेश राउत, शोमा सेन, अरुण फेरीरा, वरनॉन गोंजाल्विस, सुधा भारद्वाज और वरवर राव को गिरफ्तार किया है।
पवार ने इससे पहले इन गिरफ्तारियों को गलत और बदला लेने के इरादे से की गई गिरफ्तारी बताया था और पुणे पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई के संबंध में जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) के गठन की मांग की थी।
इस पर पूछे गए सवाल के जवाब में फडणवीस ने कहा कि महाराष्ट्र पुलिस को इस बात के ठोस सबूत मिले हैं कि शहरी नक्सलवाद का मुद्दा सिर्फ महाराष्ट्र तक सीमित नहीं है। यह देश भर में फैल चुका है। इसलिए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे द्वारा इस मामले को एनआईए को सौंपे जाने का फैसला स्वागत योग्य है।