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जेटली के आम बजट से लाल हुए भगवा संगठन, सड़क पर उतरने का ऐलान
संजय मिश्र, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Thu, 01 Feb 2018 07:46 PM IST
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फाइल फोटो
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वित्त मंत्री अरुण जेटली के आम बजट पर विरोध सरकार के घर से ही शुरू हो गया है। सरकार के अपने भगवा संगठन बजट को लेकर लाल-पीले हो गए हैं। मोदी सरकार के अंतिम बजट के रूप में माने जा रहे इस आम बजट से भगवा संगठनों को काफी उम्मीदे थीं, मगर सरकार पूरी तरह से इन पर खरा नहीं उतर पाई है।
संघ की संस्था भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) ने वित्त मंत्री के जरिए संसद में पेश वर्ष 2018-19 के आम बजट को श्रम विरोधी करार दिया है। बीएमएस ने बजट के खिलाफ सड़क पर उतरने का भी ऐलान किया है।
बीएमएस का कहना है कि सरकार ने आम बजट में श्रमिकों के हित का ध्यान नहीं रखा है। पूरी तरह से श्रमिकों की अवहेलना की गई है। बीएमएस महासचिव बृजेश उपाध्याय ने कहा है कि आम बजट के खिलाफ प्रदर्शन के लिए उन्होंने अपने संगठन की सभी इकाइयों को निर्देश दे दिए हैं। आगे की रणनीति 6 से 8 फरवरी के बीच होने वाली राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक में तय होगी।
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करेंगे जेटली के घर का घेराव
आम बजट पर नाराजगी जताते हुए बीएमएस ने 2-3 फरवरी को देशव्यापी प्रदर्शन का ऐलान करते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली के सरकारी आवास के घेराव का भी आह्वान किया है। बीएमएस के क्षेत्रीय संगठन मंत्री पवन कुमार ने केंद्र सरकार के बजट को कर्मचारियों के लिए पूरी तरह से निराशाजनक बताते हुए कहा है कि इससे बड़े उद्योगपतियों को फायदा होगा।
सरकार गरीब-गरीब की बात कर रही है, मगर फायदा अमीरों का करती है। पवन कुमार ने कहा कि सरकार का यह बजट सिर्फ चंद वर्ग को फायदा पहुंचाने वाला है। सरकार बताए कि उसने आम बजट में मजदूरों के लिए किया क्या है।
इन वजहों से है नाराजगी
आम बजट पर बीएमएस की नाराजगी की वजह मुख्य रूप से आंगनवाड़ी और आशा कर्मचारियों की अनदेखी है। बीएमएस महासचिव बृजेश उपाध्याय ने कहा है कि सरकार ने आम बजट में कृषि, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे के विकास और ग्रामीण विकास पर पहली दफे जोर तो दिया है, मगर श्रमिकों के हित की पूरी तरह से अनदेखी हुई है। आंगनवाड़ी, आशाकर्मी और अन्य योजनाओं में कम तनख्वाह पर काम करने वाले जो कि केंद्र सरकार के अधीन कार्य करते हैं, उनके लिए बजट में कुछ भी नहीं किया गया है।
उपाध्याय ने कहा कि आयकर की सीमा में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है, इसलिए नौकरी करने वाला मध्यम वर्ग समाज पूरी तरह से बजट से नाराज है। बल्कि उल्टे सरकार ने सरचार्ज की सीमा 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 4 प्रतिशत करके जनता पर बोझ बढ़ा दिया है। इसके अलावा भी बीएमएस ने अपनी नाराजगी के तमाम बिंदु गिनाए हैं।
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संघ की संस्था भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) ने वित्त मंत्री के जरिए संसद में पेश वर्ष 2018-19 के आम बजट को श्रम विरोधी करार दिया है। बीएमएस ने बजट के खिलाफ सड़क पर उतरने का भी ऐलान किया है।
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बीएमएस का कहना है कि सरकार ने आम बजट में श्रमिकों के हित का ध्यान नहीं रखा है। पूरी तरह से श्रमिकों की अवहेलना की गई है। बीएमएस महासचिव बृजेश उपाध्याय ने कहा है कि आम बजट के खिलाफ प्रदर्शन के लिए उन्होंने अपने संगठन की सभी इकाइयों को निर्देश दे दिए हैं। आगे की रणनीति 6 से 8 फरवरी के बीच होने वाली राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक में तय होगी।
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करेंगे जेटली के घर का घेराव
आम बजट पर नाराजगी जताते हुए बीएमएस ने 2-3 फरवरी को देशव्यापी प्रदर्शन का ऐलान करते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली के सरकारी आवास के घेराव का भी आह्वान किया है। बीएमएस के क्षेत्रीय संगठन मंत्री पवन कुमार ने केंद्र सरकार के बजट को कर्मचारियों के लिए पूरी तरह से निराशाजनक बताते हुए कहा है कि इससे बड़े उद्योगपतियों को फायदा होगा।
सरकार गरीब-गरीब की बात कर रही है, मगर फायदा अमीरों का करती है। पवन कुमार ने कहा कि सरकार का यह बजट सिर्फ चंद वर्ग को फायदा पहुंचाने वाला है। सरकार बताए कि उसने आम बजट में मजदूरों के लिए किया क्या है।
इन वजहों से है नाराजगी
आम बजट पर बीएमएस की नाराजगी की वजह मुख्य रूप से आंगनवाड़ी और आशा कर्मचारियों की अनदेखी है। बीएमएस महासचिव बृजेश उपाध्याय ने कहा है कि सरकार ने आम बजट में कृषि, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे के विकास और ग्रामीण विकास पर पहली दफे जोर तो दिया है, मगर श्रमिकों के हित की पूरी तरह से अनदेखी हुई है। आंगनवाड़ी, आशाकर्मी और अन्य योजनाओं में कम तनख्वाह पर काम करने वाले जो कि केंद्र सरकार के अधीन कार्य करते हैं, उनके लिए बजट में कुछ भी नहीं किया गया है।
उपाध्याय ने कहा कि आयकर की सीमा में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है, इसलिए नौकरी करने वाला मध्यम वर्ग समाज पूरी तरह से बजट से नाराज है। बल्कि उल्टे सरकार ने सरचार्ज की सीमा 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 4 प्रतिशत करके जनता पर बोझ बढ़ा दिया है। इसके अलावा भी बीएमएस ने अपनी नाराजगी के तमाम बिंदु गिनाए हैं।