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2017-18 में भाजपा को दस लोकसभा सीटों पर मिली पराजय
शशिधर पाठक/ अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Thu, 15 Mar 2018 06:29 PM IST
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आजादी के बाद पहली बार केंद्र में कोई गैर कांग्रेस पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने वाली भाजपा के पास अब बहुमत के आस-पास ही लोकसभा सदस्य बचे हैं। लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन के कार्यालय के अनुसार भाजपा के पास इस समय 274 लोकसभा सदस्य हैं। लोकसभा अध्यक्ष को जोड़ ले तो यह संख्या 275 पहुंचती है, लेकिन उपचुनाव के नतीजे को जोड़ लें तो भाजपा के पास लोकसभा सांसदों की संख्या घटकर 272 हो गई है।
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दरअसल 2017 और 18 में हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा का ग्राफ बहुत ही खराब रहा है। दस सीटों पर लोकसभा उपचुनाव हुए और इसमें से पार्टी को एक सीट पर भी सफलता नहीं मिल पाई। यहां तक कि यूपी के विधानसभा चुनाव में पिछले साल 311 सीटों पर प्रचंड बहुमत पाने के बाद भी नतीजा सिफर ही रहा।
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यूपी विधानसभा चुनाव 2017 में भाजपा को 311 तो उसके सहयोगियों को 13 सीटें मिली थीं। इस तरह से आंकड़ा 324 का था, लेकिन फूलपुर और गोरखपुर लोकसभा उपचुनाव में उसे हार का सामना करना पड़ा। बिहार की अररिया सीट पर भी भाजपा को मुंह की खानी पड़ी।
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रतलाम (म.प्र.), अलवर और अजमेर (राजस्थान), गुरदासपुर और अमृतसर (पंजाब), मलापुरम (तमिलनाडु), श्रीनगर (जम्मू-कश्मीर) में लोकसभा के उपचुनाव हुए। इन सभी सीटों पर भारतीय जनता पार्टी को हार का मुंह देखना पड़ा।
लेकिन राज्यों में बजाया डंका
आजादी के बाद पहली बार डेढ़ दर्जन से अधिक राज्यों में भाजपा की सरकार है। जम्मू-कश्मीर, बिहार, नगालैंड, मेघालय, असम सहयोगी दलों के साथ मिलकर राज्य सरकार का गठन हुआ है। 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद पार्टी ने देश के राज्यों में जमकर विस्तार किया। 2017 में पार्टी ने उत्तराखंड, उ.प्र., गोवा, हिमाचल, गुजरात, मणिपुर समेत अन्य राज्यों में परचम फहराया।