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Bharat Jodo Yatra: क्या विपक्ष के मजबूत नेता के तौर पर उभरेंगे राहुल, कांग्रेस को संभालने में होंगे कामयाब?

Wed, 07 Sep 2022 03:08 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Wed, 07 Sep 2022 03:08 PM IST
सार

कांग्रेस ने भारत यात्रा का जो डिजाइन तैयार किया है, उसमें यह सबसे पहले देश के दक्षिणी हिस्सों से होकर गुजरेगी जहां कांग्रेस की पकड़ अभी भी मजबूत बनी हुई है। इससे यात्रा की शुरूआत में इसे जनता का बड़ी संख्या में समर्थन मिल सकता है।

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Bharat Jodo Yatra: Will Rahul Gandhi emerge as strong leader of opposition? be successful in handling congress
राहुल गांधी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा (Bharat Jodo Yatra) आज सात सितंबर से शुरू हो चुकी है। कन्याकुमारी से शुरू होने वाली यह यात्रा 12 राज्यों से 3,570 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए देश के सबसे उत्तरी हिस्से जम्मू-कश्मीर में समाप्त होगी। देश में राजनीतिक यात्राओं का एक लंबा इतिहास रहा है। कई बार उनके परिणाम देश का इतिहास बदलने वाले रहे हैं। लेकिन स्वतंत्र भारत में अब तक किसी नेता ने दक्षिण से लेकर उत्तरी हिस्से तक की इतनी लंबी यात्रा का आयोजन नहीं किया है। ऐसे में स्वाभाविक प्रश्न उठता है कि लगभग पांच महीने चलने वाली इस यात्रा का उद्देश्य क्या है? क्या इस यात्रा के बाद राहुल गांधी राष्ट्रीय स्तर पर एक मजबूत नेता के तौर पर उभर सकेंगे और क्या इससे कांग्रेस इससे मजबूत हो पाएगी?
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कांग्रेस ने भारत यात्रा का जो डिजाइन तैयार किया है, उसमें यह सबसे पहले देश के दक्षिणी हिस्सों से होकर गुजरेगी जहां कांग्रेस की पकड़ अभी भी मजबूत बनी हुई है। इससे यात्रा की शुरूआत में इसे जनता का बड़ी संख्या में समर्थन मिल सकता है। इससे यात्रा के उत्तर भारत में पहुंचने तक एक बेहतर माहौल बनाने में मदद मिलेगी जिसका लाभ उत्तर भारत के राज्यों में भी मिल सकता है। इससे राहुल गांधी की राष्ट्रीय स्तर पर संघर्ष करने वाले एक नेता की छवि बनेगी जिसका लाभ न केवल उन्हें, बल्कि कांग्रेस को भी मिल सकता है।
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लाखों यात्री भी होंगे साथ

कांग्रेस नेता संजय निरूपम ने अमर उजाला से कहा कि इस यात्रा में प्रतिदिन 300 पद यात्रियों को साथ लेकर चलने का काम किया जाएगा, लेकिन यह रणनीति बनाई गई है कि यात्रा के बीच-बीच में उसे भारी संख्या में किसानों, छात्रों, युवाओं और महिलाओं का साथ मिले। महाराष्ट्र के कुछ जिलों में यात्रा में लाखों यात्री शामिल होते दिखाई पड़ेंगे। दूसरे राज्यों में भी जगह-जगह पर समाज के विभिन्न वर्गों के लोग कुछ समय के लिए यात्रा में शामिल होते रहेंगे।
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जाहिर है कि इससे न केवल कई चुनावी हार का सामना कर चुके राहुल गांधी के मनोबल को मजबूती मिलेगी, बल्कि कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में भी जोश का संचार होगा। यह जोश पार्टी के लिए तेलंगाना, कर्नाटक और ओडिशा राज्यों के विधानसभा चुनावों के दौरान मिल सकता है। साथ ही यह 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान भी पार्टी को बढ़त दिलाने में मददगार साबित हो सकती है।   

जनता से जुड़ना कितना संभव होगा

राहुल गांधी ने रविवार को दिल्ली के रामलीला मैदान में कांग्रेस द्वारा आयोजित ‘महंगाई पर हल्लाबोल’ रैली के दौरान ही स्पष्ट संकेत दे दिया था कि उन्हें अपनी बात रखने के लिए अब मीडिया पर भरोसा नहीं है। उन्होंने कहा था कि जब सारे रास्ते बंद हो जाते हैं, तब सीधे जनता के पास जाना ही एकमात्र विकल्प बचता है। आज वे उसी यात्रा पर निकल चुके हैं। इस मन:स्थिति के साथ यात्रा के संघर्ष में उतरने से माना जा रहा है कि इस का बेहतर परिणाम निकल सकता है। लोगों के बीच पहुंच रही इस यात्रा को नजरअंदाज कर पाना किसी के लिए भी संभव नहीं होगा।    

हर वर्ग का साथ पाने की रणनीति

कांग्रेस की इस भारत यात्रा का डिजाइन तैयार करने में प्रसिद्ध किसान नेता योगेंद्र यादव ने विशेष भूमिका निभाई है। उनकी अगुवाई में देश के अलग-अलग हिस्से में इस यात्रा को विभिन्न  किसान संगठनों और सिविल सोसाइटी के लोगों का समर्थन मिलता रहेगा। यात्रा के बीच समय-समय पर छोटी जनसभा या नागरिक समूह से मुलाकात कर कांग्रेस के लोगों के मुद्दे के लिए संघर्ष करने का संदेश दिया जाएगा। इससे समाज के विभिन्न वर्गों के कांग्रेस के साथ होने का सकारात्मक संदेश जाएगा। इसका मनोवैज्ञानिक संदेश दूसरे क्षेत्रों में भी पड़ सकता है।

योगेंद्र यादव का कौशल आएगा काम

एक चुनाव विश्लेषक के रूप में ख्याति कमा चुके योगेंद्र यादव ने बाद में आंदोलनों का रास्ता चुना और अन्ना आंदोलन में उन्हें प्रमुख आंदोलनकारी के रूप में देखा गया था। माना गया कि  इस आंदोलन भी एक परिणाम रहा कि यूपीए सरकार को सत्ता से हटना पड़ा। इसके बाद योगेंद्र यादव की भूमिका संयुक्त किसान मोर्चा की अगुवाई में होने वाले किसान आंदोलन के दौरान दिखाई पड़ी। इस आंदोलन के बाद भी नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार को तीन कृषि कानून वापस लेने पड़े। आंदोलनों को सफलतापूर्वक अपने परिणाम तक पहुंचाने का योगेंद्र यादव का कौशल एक बार कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा में दिखाई पड़ सकता है। किसानों और सिविल सोसाइटी के लोगों को साथ लाने की उनकी कुशलता कांग्रेस को मजबूत कर सकती है।    

एक प्रश्न अवश्य पूछा जा रहा है कि जो योगेंद्र यादव यूपीए सरकार को सत्ता से हटाने में प्रमुख भूमिका निभा चुके हैं, आज वे स्वयं कांग्रेस को मजबूत करने का काम कर रहे हैं। क्या यह अवसरवादिता नहीं है? उनके सहयोगी इसे समय की मांग और देश की संवैधानिक संस्थाओं को बचाने की जरूरत बता रहे हैं।  

मुद्दों पर संघर्ष का संदेश देने की रहेगी कोशिश

यात्रा के दौरान राहुल गांधी लोगों की आम जिंदगी से जुड़े मुद्दे उठाने की कोशिश करेंगे। महंगाई और बेरोजगारी के साथ-साथ सामाजिक समरसता और सद्भाव उनकी योजना के केंद्र में रहेगा। चूंकि, वर्तमान परिस्थितियों में समाज का एक वर्ग इन मुद्दों पर विचलित है, माना जा रहा है कि उन्हें इस वर्ग का साथ मिल सकता है।  

राहुल की दावेदारी होगी मजबूत

राहुल गांधी ने यह यात्रा ऐसे समय पर शुरू की है जब कांग्रेस पार्टी अपने लिए नया अध्यक्ष चुनने की प्रक्रिया शुरू कर चुकी है। यदि चुनाव की स्थिति आई तो 17 अक्टूबर को मतदान के बाद 19 अक्टूबर को कांग्रेस को नया अध्यक्ष मिल जाएगा। 2019 लोकसभा चुनाव में हार की जिम्मेदारी लेते हुए पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे चुके राहुल गांधी स्वयं दुबारा अध्यक्ष पद स्वीकार करने से इनकार करते रहे हैं, लेकिन अशोक गहलोत और सलमान खुर्शीद जैसे अनेक पार्टी नेता उन्हें दुबारा पार्टी अध्यक्ष बनाए जाने की मांग करते रहे हैं। इन नेताओं का कहना है कि कांग्रेस को आरएसएस-भाजपा की चाल में नहीं फंसना चाहिए और राहुल गांधी को दुबारा पार्टी अध्यक्ष बनाकर केंद्र सरकार के विरुद्ध राजनीतिक लड़ाई को तेज किया जाना चाहिए।

माना जा सकता है कि यदि भारत जोड़ो यात्रा से राहुल गांधी की छवि बेहतर होती है और उन्हें जनता का साथ मिलता है तो इससे कांग्रेस के अध्यक्ष के रूप में उनकी नई पारी ज्यादा महत्त्वपूर्ण साबित हो सकती है। इससे कांग्रेस की 2024 की दावेदारी ज्यादा मजबूत होगी। जिस प्रकार नीतीश कुमार ने विपक्षी दलों की एकता की मुहिम चलाने के शुरुआती दौर में ही राहुल गांधी से मुलाकात की है, उन्होंने कांग्रेस के महत्त्व को स्वीकार कर लिया है। यह स्वीकार्यता  राहुल गांधी को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने में और कांग्रेस की अगुवाई में यूपीए-3 के गठन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
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