Bharat Jodo Nyay Yatra: नॉर्थ ईस्ट से कांग्रेस को मिला बूस्टर! ज्यादा सीटों वाले राज्यों में कितना रहेगा असर?
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विस्तार
राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा छठे दिन असम से गुजर रही है। इन छह दिनों में राहुल गांधी ने मणिपुर और नागालैंड समेत असम के एक हिस्से में लोगों से न्याय यात्रा के माध्यम से संपर्क किया है। कांग्रेसी नेताओं के मुताबिक राहुल गांधी की न्याय यात्रा ने इन छह दिनों के भीतर ही हजारों लोगों के माध्यम से समूचे राज्य में एक मजबूत पहुंच बनाई है। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव जयराम रमेश कहते हैं कि जिस तरह नॉर्थ ईस्ट में लोगों ने राहुल गांधी की न्याय यात्रा का समर्थन किया है, उससे उनकी यात्रा को बड़ा बूस्टर भी मिला है। हालांकि सियासी गलियारों में चर्चाएं इस बात की भी हो रही हैं कि क्या राम मंदिर के जयघोष के बीच में राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा फीकी पड़ गई है? या कांग्रेस पार्टी ने इसे अपना बूस्टर मानते हुए हिंदी भाषी राज्यों के साथ-साथ ज्यादा लोकसभा सीटों वाले राज्यों में मजबूत टाइमिंग के साथ एंट्री की योजना बनाई है। सियासी जानकारों का मानना है कि न्याय यात्रा की टाइमिंग सियासी नजरिए से बिल्कुल सटीक है।
दरअसल राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा 14 जनवरी से मणिपुर से शुरू हो चुकी है। शुक्रवार को राहुल गांधी की यात्रा असम के माजुली में पहुंची। पार्टी के नेता जयराम रमेश कहते हैं कि राहुल गांधी की यात्रा में जिस तरीके से लोग जुड़ते जा रहे हैं, वह अभूतपूर्व है। उनका कहना है कि राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा को नॉर्थ ईस्ट में जितना समर्थन मिल रहा है, उतना किसी भी सियासी दल को नहीं मिला होगा। उनका कहना है राहुल गांधी शनिवार को अरुणाचल प्रदेश में होंगे और 21 तारीख को कालियाबोर में एक विशाल जनसभा को भी संबोधित करने वाले हैं। पार्टी के नेताओं का कहना है कि राहुल गांधी की इस यात्रा में हर वर्ग के लोग उनसे आकर मिल रहे हैं। राहुल गांधी खुद उन लोगों से जाकर मिल रहे हैं, जिनके लिए वह न्याय यात्रा कर रहे हैं।
कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव जयराम रमेश ने असम के मुख्यमंत्री पर भी निशाना साधा। दरअसल राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा को लेकर असम में एक एफआईआर दर्ज हुई है। कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता कहते हैं कि जिस तरीके से राहुल गांधी की यात्रा के रूट को लेकर एफआईआर दर्ज हुई है, उससे पता चलता है कि भाजपा शासित राज्य उनकी यात्रा से घबराकर परेशानियां पैदा करना चाह रहे हैं। जयराम रमेश कहते हैं कि असम के मुख्यमंत्री भारत जोड़ो न्याय यात्रा से इतना घबराए हैं कि वह हर तरह की साजिश कर रहे हैं। इसका कोई असर नहीं पड़ने वाला। बल्कि इस तरीके की साजिशों से तो भाजपा शासित राज्य और मुख्यमंत्री बेनकाब हो रहे हैं। वह कहते हैं कि उनकी यात्रा तो 25 जनवरी तक असम में ही रहने वाली है।
वहीं सियासी गलियारों में चर्चाएं इस बात की भी हो रही हैं कि राहुल गांधी की इस यात्रा का फायदा क्या वास्तव में उन मैदानी राज्यों में भी मिलने वाला है, जहां पर लोकसभा की सबसे ज्यादा सीटें हैं और राजनीतिक करंट भी। वरिष्ठ पत्रकार सौरभ चटर्जी बताते हैं कि राहुल गांधी की नॉर्थ ईस्ट से शुरू हुई यात्रा और देश में राम मंदिर के शुभारंभ को लेकर बना माहौल चर्चा में है। चटर्जी कहते हैं कि निश्चित तौर पर राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा नॉर्थ ईस्ट के जिन हिस्सों में जा रही है, उसके अलावा देश के अन्य बाकी हिस्सों में बहुत ज्यादा चर्चा में नहीं है। लेकिन वह कहते हैं कि ऐसा नहीं है कि लोगों को राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के बारे में जानकारी नहीं है। उनका कहना है कि 22 जनवरी को राममंदिर के शुभारंभ वाले दिन जयघोष में यह यात्रा दब तो गई ही है।
हालांकि सियासी जानकारी सीडी प्रसाद कहते हैं कि ऐसा नहीं है कांग्रेस को राम मंदिर के शुभारंभ और उसको लेकर देशभर में बने हुए माहौल के बारे में जानकारी नहीं है। वह कहते हैं कि कांग्रेस ने राममंदिर के इस भव्य शुभारंभ के जबरदस्त माहौल के बीच में अपनी न्याय यात्रा की शुरुआत कर लोगों में एक बड़ा संदेश भी दिया है। उनका कहना है राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा शुरू करने के लिए उस मौके की तलाश नहीं की, जिसमें यात्रा राम मंदिर के शुभारंभ के बाद शुरू की जाती। प्रसाद कहते हैं कि दूसरा और महत्वपूर्ण पहलू राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा का यह भी है कि जिन राज्यों में लोकसभा की सीटें और सियासी तपिश ज्यादा है, वहां पर उनकी यात्रा जब पहुंचेगी, तब तक लोकसभा चुनावों का एक तरह से माहौल बनना शुरू हो चुका होगा। वह कहते हैं कि राम मंदिर के शुभारंभ के बाद ही राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा पश्चिम बंगाल जैसे राज्य में एंट्री करने वाली है। उसके बाद अन्य हिंदी भाषी और ज्यादा सीटों वाले राज्यों से गुजरते हुए महाराष्ट्र पहुंचेगी। उनका कहना है कि यह एक सधी हुई सियासी रणनीति का हिस्सा भी है।