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नाक के जरिए दी जाएगी यह वैक्सीन, भारत बायोटेक ने किया अमेरिकी यूनिवर्सिटी से समझौता

Wed, 23 Sep 2020 09:04 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Wed, 23 Sep 2020 09:04 PM IST
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Bharat Biotech agreement with Washington University School of Medicine for an intranasal vaccine for COVID19
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : पेक्सेल्स

कोरोना वायरस के लिए भारत बायोटेक कंपनी नाक के जरिए ली जाने वाली एक विशेष वैक्सीन विकसित कर रही है। भारत बायोटेक ने इसके लिए अमेरिका के सेंट लुईस में स्थित वाशिंगटन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन के साथ एक समझौता किया है। इस वैक्सीन को कोरोफ्लू नाम दिया गया है। 

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भारत बायोटेक ने कहा है कि कंपनी के पास अमेरिका, जापान और यूरोप को छोड़कर अन्य सभी बाजारों में वैक्सीन के वितरण का अधिकार होगा। कंपनी ने बताया कि इस वैक्सीन के पहले चरण का परीक्षण सेंट लुइस विश्वविद्यालय की इकाई में होगा, जबकि नियामक मंजूरियां हासिल करने के बाद भारत बायोटेक अन्य चरणों का परीक्षण भारत में भी करेगी।
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इस वैक्सीन को इंजेक्शन के स्थान पर नाक में ड्रॉप की तरह डाला जाएगा। विशेषज्ञ बताते हैं कि कोरोनो वायरस सहित अन्य कई विषाणु या रोगाणु, म्यूकोसा के माध्यम से ही शरीर में प्रवेश करते हैं। ये गीले ऊतकों को जो नाक, मुंह, फेफड़े और पाचन तंत्र में पाए जाते हैं, उन्हें प्रभावित करते हैं। 

आम तौर पर वैक्सीन शरीर के ऊपरी हिस्सों में लगाई जाती है। लेकिन हर वायरस की अपनी अलग प्रवृत्ति होती है और कोरोना वायरस भी पूर्व के वायरसों से अलग है। इसके बचाव और तुरंत असर के लिए अगर नाक के जरिए वैक्सीन अंदर जाएगी तो सीधे वायरस पर हमला कर उसे खत्म करेगी।


पूर्व में हुए एक अध्ययन में ब्रिटिश शोधकर्ताओं ने दावा किया था कि कोरोना के लिए वैक्सीन इन्हेलर के रूप में या नाक के स्प्रे के रूप में ज्यादा प्रभावी साबित होगी। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और इंपीरियल कॉलेज के वैज्ञानिकों का मानना है कि सीधे फेफड़े में दवा डालना बेहतर तरीका हो सकता है। 

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