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जस्टिस भंडारी की जीत से भारतीय कूटनीति का दुनिया में लहराया परचम

Wed, 22 Nov 2017 04:11 AM IST
शशिधर पाठक/ अमर उजाला, नई दिल्ली
शशिधर पाठक/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 22 Nov 2017 04:11 AM IST
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Bhandari's re-election to ICJ, a diplomatic coup
जस्टिस दलवीर भंडारी अंतरराष्ट्रीय न्यायालय की पांचवी और आखिरी सीट के लिए पुन: न्यायाधीश चुन लिए गए हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उन्हें बधाई देते हुए इसे गौरव का क्षण बताया है।
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वास्तव में जस्टिस भंडारी की यह जीत भारतीय कूटनीति की संयुराष्ट्र महासभा में अप्रत्याशित जीत है, क्योंकि 12वें राऊंड में ब्रिटेन के संयुक्त राष्ट्र में स्थायी प्रतिनिधि मैथ्यू रॉयक्राफ्ट ने दलवीर की मजबूत स्थिति को देखकर अपने उम्मीदवार क्रिस्टोफर ग्रीनवुड का नाम वापस ले लिया। यह आईसीजे के 71 साल के इतिहास में पहली बार है जब ब्रिटेन का इसमें कोई सदस्य नहीं है।
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क्रिस्टोफर ग्रीनवुड संयुक्तराष्ट्र महासभा में पांच स्थायी सदस्य वाले देश ब्रिटेन के प्रतिनिधि थे। लेकिन दुनिया भर में अपनी भद पिटने की आशंका देखकर ब्रिटेन ने ऐन वक्त पर अपनी दावेदारी वापस ले ली।
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इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि संयुक्त राष्ट्र जनरल असेंबली में उन्हें 183 वोट मिले। जबकि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सभी 15 सदस्यों ने जस्टिस भंडारी को वोट दिया।

सही अर्थो में देखा जाए तो पी-5 (अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस और चीन)सदस्य देश के पास पांच देशों का समर्थन होता है और उन्हें 15 सदस्यों वाले स्थायी सुरक्षा परिषद में केवल तीन देशों का समर्थन जुटाने की आवश्यकता पड़ती है। इसके बरअक्स भारत जैसे देशों को आठ सदस्यों के समर्थन की जरूरत पड़ती है। 

 

कूटनीति का परचम, ICJ के 71 साल के इतिहास में पहली बार हुआ

Bhandari's re-election to ICJ, a diplomatic coup
आईसीजे में भारत के जस्टिस दलवीर भंडारी की जीत दुनिया में भारतीय कूटनीति का परचम लहराने जैसा है। ऐसा पहली बार हुआ है जब संयुक्त राष्ट्रमहासभा और आईसीजे के 71 साल के इतिहास में पहली बार ब्रिटेन को उसमें कोई सदस्य नहीं है।

विदेश मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक इस सफलता को पाने के लिए भारत ने पूरी कूटनीतिक ताकत झोंक दी थी। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने खुद कमान संभाल रखी थी।

विदेश सचिव एस जय शंकर सक्रिय थे और दुनिया भर के देशों में फैले भारत के मिशन ने भी इसमें अभूतपूर्व भूमिका निभाई। खुद विदेश मंत्री ने 60 से अधिक देशों को फोन करके उनका समर्थन मांगा। 175 देशों में भारत ने संपर्क और समर्थन के लिए उच्चस्तर का संबंध साधा।

हर राऊंड में रहे आगे

विदेश मंत्रालय सूत्रों के अनुसार संयुक्त राष्ट्र में सामान्य सभा और सुरक्षा परिषद में एक साथ वोटिंग आरंभ हुई। स्थायी सदस्य अमेरिका, फ्रास, रूस, चीन ने ब्रिटेन के उम्मीदवार के पक्ष में वोट किया लेकिन हर राऊंड में भारत आगे रहा।

बताते हैं जनरल असेंबली में 121 सदस्यों का समर्थन मिलने के बाद ब्रिटेन संयुक्त सम्मेलन चाहता था, लेकिन भारत ने इससे साफ मना कर दिया। ऐसे में ब्रिटेन को लगा कि आगे उसकी स्थिति और खराब होने वाली है। लिहाजा 12वें उसके संयुक्त राष्ट्र में स्थायी प्रतिनिधि मैथ्यू रॉयक्राफ्ट ने उम्मीदवार क्रिस्टोफर की उम्मीदवारी वापस ले ली।
 

कौन हैं जस्टिस भंडारी

Bhandari's re-election to ICJ, a diplomatic coup
जरूरी है संयुक्त राष्ट्र और उसकी कार्य प्रणाली में सुधार

आईसीजे की इस जीत से साफ हो गया है कि संयुक्त राष्ट्र और उसकी कार्यप्रणाली में सुधार की नितांत आवश्यकता है। देखा जाए तो यह व्यवस्था पर एक बड़ा प्रश्न चिन्ह है। मसलन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के 15 सदस्यों में यदि बहुमत नहीं है तो भारत जैसे देश के लिए पूरी दुनिया के देशों का समर्थन किसी काम का नहीं है। यही वजह है कि आईसीजे में हमेशा ब्रिटेन जैसे पी-5 देशों के सदस्य न्यायाधीश रहे हैं। 

कौन हैं जस्टिस भंडारी

जस्टिस दलवीर भंडारी 27 अप्रैल 2012 को आईसीजे में भारत की ओर से न्यायाधीश निर्वाचित हुए थे। इस साल भारत ने एक बार फिर दूसरे कार्यकाल के लिए उनकी दावेदारी को पेश किया था और इसमें भारत को सफलता मिली है। इससे पहले जस्टिस भंडारी 2005 में देश (भारत) के उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीश बने थे।

जस्टिस भंडारी का जन्म एक अक्टूबर 1947 को जोधपुर राजस्थान में हुआ था। 70 वर्षीय भंडारी के इस पद पर दोबारा निर्वाचित होने पर जहां दुनिया के देशों से भारत को बधाई मिल रही है, वहीं देश का शीर्ष नेतृत्व भी उत्साहित है।
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