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Bengal: 'सीएम ममता प्रशासन ने अपराजिता विधेयक के साथ नहीं भेजी तकनीकी रिपोर्ट', राज्यपाल बोस ने की आलोचना
Fri, 06 Sep 2024 12:38 AM IST
दीपक कुमार शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
Published by: दीपक कुमार शर्मा
Updated Fri, 06 Sep 2024 12:38 AM IST
सार
राजभवन के अधिकारी के अनुसार, 'राज्यपाल ने अपराजिता विधेयक के साथ तकनीकी रिपोर्ट संलग्न करने में विफल रहने के लिए राज्य प्रशासन की आलोचना की। नियम के अनुसार, राज्य सरकार के लिए विधेयक पर सहमति देने पर निर्णय लेने से पहले तकनीकी रिपोर्ट भेजना अनिवार्य है।'
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पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस और सीएम ममता बनर्जी
- फोटो : ANI
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विस्तार
पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी प्रशासन की आलोचना की, क्योंकि हाल ही में पारित दुष्कर्म विरोधी विधेयक के साथ तकनीकी रिपोर्ट भेजने में वह विफल रहा, जो कि इसे मंजूरी देने के लिए आवश्यक है। इस दौरान बोस बहुत निराश दिखे। उन्होंने कहा कि यह राज्य की नियमित प्रथा रही है कि वह विधेयकों के साथ तकनीकी रिपोर्ट नहीं भेजते। फिर उन्हें मंजूरी नहीं देने के लिए राज्यपाल के कार्यालय को दोषी ठहराते हैं।
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राजभवन के अधिकारी के अनुसार, 'राज्यपाल ने अपराजिता विधेयक के साथ तकनीकी रिपोर्ट संलग्न करने में विफल रहने के लिए राज्य प्रशासन की आलोचना की। नियम के अनुसार, राज्य सरकार के लिए विधेयक पर सहमति देने पर निर्णय लेने से पहले तकनीकी रिपोर्ट भेजना अनिवार्य है।' कहा, 'यह पहली बार नहीं है कि सरकार ने तकनीकी रिपोर्टों को रोक दिया है और विधेयकों को मंजूरी नहीं देने के लिए राजभवन को दोषी ठहराया है।'
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राज्यपाल ने इस जैसे महत्वपूर्ण मामलों में होमवर्क करने में विफल रहने के लिए राज्य सरकार को भी फटकार लगाई। उन्होंने कहा, ' राज्यपाल बोस ने बताया है कि (अपराजिता) विधेयक आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और अरुणाचल प्रदेश द्वारा पारित समान विधेयकों की कॉपी-पेस्ट प्रतीत होता है।' सूत्रों के अनुसार, राज्यपाल बोस ने अपनी राय व्यक्त की कि ममता बनर्जी 'केवल पश्चिम बंगाल के लोगों को धोखा देने के लिए धरने की धमकी दे रही थीं, क्योंकि वह भी अच्छी तरह से जानती हैं कि इसी तरह के विधेयक भारत के राष्ट्रपति के पास लंबित हैं।'
बता दें कि पश्चिम बंगाल विधानसभा ने तीन सितंबर को सर्वसम्मति से 'अपराजिता महिला और बाल विधेयक (पश्चिम बंगाल आपराधिक कानून और संशोधन) विधेयक 2024' पारित किया, जिसमें दुष्कर्म के दोषियों के लिए मृत्युदंड की मांग की गई है। यदि उनके कार्यों के परिणामस्वरूप पीड़िता की मृत्यु हो जाती है या उसे निष्क्रिय अवस्था में छोड़ दिया जाता है। वहीं, अन्य अपराधियों को पैरोल के बिना आजीवन कारावास की सजा की मांग की गई।
प्रस्तावित कानून की अन्य महत्वपूर्ण विशेषताओं में प्रारंभिक रिपोर्ट के 21 दिनों के भीतर दुष्कर्म के मामलों की जांच पूरी करना, पिछली दो महीने की समय सीमा में कमी और एक विशेष टास्क फोर्स शामिल है जहां महिला अधिकारी जांच का नेतृत्व करेंगी।