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CJI: सड़क सुरक्षा नियम तय करने के लिए दो हफ्ते में हो बैठक, सीजेआई की अध्यक्षता वाली पीठ का समिति को आदेश
Sat, 07 Jan 2023 06:37 AM IST
वीरेंद्र शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: वीरेंद्र शर्मा
Updated Sat, 07 Jan 2023 06:37 AM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने इस बात पर सहमति जताई कि मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा- 136ए (सड़क सुरक्षा की इलेक्ट्रॉनिक निगरानी व प्रवर्तन) को लागू करने के लिए तत्काल कदम उठाए जाने की आवश्यकता है।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : Social media
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने शीर्ष अदालत के पूर्व न्यायाधीश एएम सप्रे की अध्यक्षता वाली समिति को राज्यों में इलेक्ट्रॉनिक निगरानी और सड़क सुरक्षा मानदंडों को लागू करने के तौर तरीके तय करने का कहा है। कोर्ट ने समिति को दो हफ्ते के अंदर बैठक बुलाने का निर्देश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस जेबी पारदीवाला की पीठ ने इस बात पर सहमति जताई कि मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा- 136ए (सड़क सुरक्षा की इलेक्ट्रॉनिक निगरानी व प्रवर्तन) को लागू करने के लिए तत्काल कदम उठाए जाने की आवश्यकता है। मोटर वाहन अधिनियम को 2019 में संशोधित किया गया था ताकि राष्ट्रीय राजमार्गों, राज्य राजमार्गों, शहरी सड़कों पर सड़क सुरक्षा की इलेक्ट्रॉनिक निगरानी और प्रवर्तन के लिए धारा-136 ए के प्रावधानों को शामिल किया जा सके। मुद्दा अब प्रावधानों के उचित प्रवर्तन को सुनिश्चित करने के बारे में है। अगली सुनवाई फरवरी के पहले हफ्ते में होगी।
सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल माधवी दीवान ने कहा, सरकार धारा-136(2) के तहत पहले ही नियम बना चुकी है। धारा-136 (2) के अनुसार, केंद्र सरकार स्पीड कैमरा, सीसीटीवी, स्पीड गन, बॉडी वियरेबल कैमरा और ऐसी अन्य तकनीक समेत सड़क सुरक्षा की इलेक्ट्रॉनिक निगरानी और प्रवर्तन के लिए नियम बनाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सप्रे समिति का गठन किया था।
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सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस जेबी पारदीवाला की पीठ ने इस बात पर सहमति जताई कि मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा- 136ए (सड़क सुरक्षा की इलेक्ट्रॉनिक निगरानी व प्रवर्तन) को लागू करने के लिए तत्काल कदम उठाए जाने की आवश्यकता है। मोटर वाहन अधिनियम को 2019 में संशोधित किया गया था ताकि राष्ट्रीय राजमार्गों, राज्य राजमार्गों, शहरी सड़कों पर सड़क सुरक्षा की इलेक्ट्रॉनिक निगरानी और प्रवर्तन के लिए धारा-136 ए के प्रावधानों को शामिल किया जा सके। मुद्दा अब प्रावधानों के उचित प्रवर्तन को सुनिश्चित करने के बारे में है। अगली सुनवाई फरवरी के पहले हफ्ते में होगी।
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सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल माधवी दीवान ने कहा, सरकार धारा-136(2) के तहत पहले ही नियम बना चुकी है। धारा-136 (2) के अनुसार, केंद्र सरकार स्पीड कैमरा, सीसीटीवी, स्पीड गन, बॉडी वियरेबल कैमरा और ऐसी अन्य तकनीक समेत सड़क सुरक्षा की इलेक्ट्रॉनिक निगरानी और प्रवर्तन के लिए नियम बनाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सप्रे समिति का गठन किया था।
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