बेटियों को हिम्मत देने अमेरिका से भारत आई स्काउट गर्ल
शोहदों के डर से कई दिन तक स्कूल नहीं जाने वाली धनेली की बेटियों को हिम्मत देने शुक्रवार को अमेरिका की स्काउट गर्ल पूजा नागपाल पहुंचीं। उन्होंने न सिर्फ मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग दी बल्कि छात्राओं में आत्मविश्वास भी जगाया।
धनेली की बेटियों के खौफ की दास्तां टीवी पर देखकर पूजा ने उनका मनोबल बढ़ाने का निश्चय किया था। 18 साल की पूजा एनआरआई हैं और चार साल की उम्र से ही ताइक्वांडो सीखना शुरू कर दिया था।
नारी सशक्तिकरण के लिए अपने पिता पवन नागपाल के साथ इन दिनों भारत भ्रमण पर निकलीं अमेरिका के लास एजेंल्स की 18 साल की पूजा शुक्रवार को दुनका इंटर कालेज पहुंचीं।
उन्होंने बताया कि चंडीगढ़ में दृष्टिबाधित बच्चों को जूडो कराटे की ट्रेनिंग के दौरान बरेली के दुनका में शोहदों के डर से बेटियों के स्कूल न जाने की खबर सुर्खियां बनीं तभी छात्राओं के मन से डर भगाने और शोहदों से लड़ने का जज्बा भरने के लिए वर्कशाप करने का निर्णय लिया।
तीन साल से मार्शल आर्ट सीख रहीं पूजा सेकंड डिग्री ब्लैक हैं और अमेरिका की गर्ल्स स्काउट हैं। उन्हें हाल ही में अमेरिका का गर्ल्स स्काउट गोल्ड अवार्ड मिला है। उन्हें नेशनल यंग वूमेन ऑफ डिस्टिंक्शन भी नामित किया गया है।
वह अब तक हिमाचल और हरियाणा में कई छात्राओं को जूडो कराटे के टिप्स दे चुकी हैं। शुक्रवार को उन्होंने कॉलेज में 40-40 का ग्रुप बनाकर छात्राओं को जूडो कराटे की ट्रेनिंग दी। छात्राओं से कहा कि जूडो-कराटे सीखकर शोहदों से डरने के बजाय एकजुट होकर उन्हें मुंहतोड़ जवाब देना सीखें।
उन्होंने कहा कि जब आप शारीरिक रूप से मजबूत होंगी तभी पढ़ाई भी कर सकेंगी। इसलिए खुद पर भरोसा करना सीखें। पूजा के पिता पवन नागपाल ने बताया कि 2013 के आखिरी महीनों में दोनों तीन साल के वीजा पर भारत आए थे।
वर्ष 2013 में हिमाचल और 2015 में हरियाणा में छात्राओं को एक-एक महीने का जूडो-कराटे का विशेष प्रशिक्षण दे चुके हैं। उन्होंने बताया कि वह मूलत: पंजाब के रहने वाले हैं। मुंबई और आईआईटी खड़गपुर से इंजीनियरिंग करने के बाद तीस साल पहले वह अमेरिका चले गए थे।