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Maharashtra: बदलापुर केस में बॉम्बे हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी- ठोस मामला बनाएं, जनता के दबाव में काम न करें

Tue, 03 Sep 2024 07:39 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: पवन पांडेय Updated Tue, 03 Sep 2024 07:39 PM IST
सार

महाराष्ट्र के ठाणे जिले के बदलापुर में एक स्कूल में दो बच्चियों के कथित यौन उत्पीड़न के मामले में सुनवाई के दौरान बॉम्बे हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि ये केस एसआईटी को इसलिए दिया गया है, क्योंकि स्थानीय पुलिस ने सही से जांच नहीं की।

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Badlapur sexual assault: Make watertight case, don't act under public pressure; says HC
बॉम्बे हाईकोर्ट - फोटो : एएनआई

विस्तार

महाराष्ट्र के बदलापुर में स्कूल की दो बच्चियों के साथ अटेंडेंट के कथित यौन उत्पीड़न के मामले में आज बॉम्बे हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान जांच कर रही पुलिस टीम से मंगलवार को बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि वे एक ठोस मामला बनाएं और जनता के दबाव में आकर जल्दबाजी में आरोप पत्र दाखिल न करें।
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'बेटे को पढ़ाओ बेटी को बचाओ'
न्यायमूर्ति रेवती मोहिते डेरे और पृथ्वीराज चव्हाण की खंडपीठ ने इस दौरान यह भी कहा कि लड़कों को संवेदनशील बनाया जाना चाहिए। न्यायमूर्ति डेरे ने सरकार के नारे में बदलाव करते हुए कहा, लड़कों की शिक्षा महत्वपूर्ण है। 'बेटे को पढ़ाओ बेटी को बचाओ'।
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जल्दबाजी में आरोपपत्र दाखिल न करें- हाईकोर्ट
बता दें कि हाईकोर्ट की पीठ ने पिछले महीने इस घटना का स्वतः संज्ञान लिया था। वहीं सरकार की ओर से पेश हुए महाधिवक्ता बीरेंद्र सर्राफ ने सुनवाई के दौरान अदालत को बताया कि जल्द ही आरोप पत्र दाखिल किया जाएगा। पीठ ने कहा कि विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन इसलिए किया गया क्योंकि स्थानीय पुलिस ने मामले की ठीक से जांच नहीं की और आम आदमी का गुस्सा फूट पड़ा। अदालत ने कहा, यह एक बड़ा मुद्दा है। ये केस भविष्य में ऐसे सभी मामलों के लिए मिसाल कायम करेगा। जनता देख रही है और हम जो संदेश दे रहे हैं वह महत्वपूर्ण है। इसलिए, जल्दबाजी में आरोपपत्र दाखिल न करें। अभी भी समय है। जनता के दबाव में न आएं। आरोपपत्र दाखिल करने से पहले जांच ठीक से होनी चाहिए। आरोपपत्र दाखिल करने से पहले, सुनिश्चित करें कि सब कुछ ठीक है। एक मजबूत मामला बनाएं।
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पुराने तरीके से केस डायरी बनाने पर SIT को फटकार
वहीं अदालत ने केस डायरी को बनाए रखने के पुराने तरीके के लिए एसआईटी को फटकार भी लगाई। क्या केस डायरी को बनाए रखने का यही तरीका है?। न्यायाधीशों ने कहा कि जांच के हर चरण का उल्लेख केस डायरी में किया जाना चाहिए, उन्होंने कहा कि डायरी में विवरण का उल्लेख नहीं किया गया है। पीठ ने आगे कहा कि, केस डायरी में रूढ़िवादी शब्दों का इस्तेमाल किया गया है। हम विवरण के संबंध में जांच के तरीके से संतुष्ट नहीं हैं। हमें कोई ठोस कदम नहीं दिख रहा है। पीठ ने कहा कि केस डायरी लिखने का उद्देश्य तब विफल हो जाता है जब इसे इस तरह से लिखा जाता है और यह वास्तव में इस मामले की घटिया जांच को दर्शाता है।


अब एक अक्तूबर को होगी मामले की अगली सुनवाई
इस बीच, महाधिवक्ता सर्राफ ने उच्च न्यायालय को सूचित किया कि सरकार ने स्कूलों में लड़कियों की सुरक्षा के पहलू पर विचार करने के लिए एक समिति बनाई है। न्यायालय ने कहा कि उसे लड़कों की सुरक्षा की भी जांच करनी चाहिए। न्यायालय ने कहा, समिति स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा पर विचार करेगी। उच्च न्यायालय ने सुनवाई 1 अक्तूबर तक स्थगित करने से पहले सुझाव दिया कि सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी मीरान बोरवणकर और एक सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय न्यायाधीश - साधना जाधव या शालिनी फनसालकर-जोशी - को समिति में शामिल किया जाना चाहिए।

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