धारा 370 के खिलाफ थे बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर, जानिए उनसे जुड़ी रोचक बातें
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14 अप्रैल यानि आज संविधान के निर्माता और भारत रत्न डॉ. बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर की 128 वीं जयंती है। शोषित और वंचित तबके के लोगों को आवाज देने वाले डॉ. आंबेडकर का जन्म 1891 में आज ही के दिन हुआ था। भारत में हजारों लोग आंबेडकर को पसंद करते हैं, उनके नक्शेकदम पर चलने की कोशिश करते हैं।
डॉ. आंबेडकर ने अपना पूरा जीवन शोषितों, वंचितों और दलितों के उत्थान में लगा दिया और जीवन भर उनके हक की लड़ाई लड़ते रहे। आरक्षण को लेकर लोगों में आपसी मतभेद हो सकता है पर बाबा साहेब की मेधा, प्रतिभा, व्यक्तित्व की गहराई, विपुल अध्ययन और दूरदर्शिता जैसे गुणों को लेकर सभी एकमत हैं।
धारा 370 पर राजनीतिक दलों और देश में बवाल मचा हुआ है। बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर भारतीय संविधान की इस धारा के खिलाफ थे। धारा 370 जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देता है। अनुच्छेद 370 को लेकर आंबेडकर ने शेख अब्दुल्ला को पत्र लिखा था।
आंबेडकर ने भारतीय श्रम सम्मेलन के 7 वें सत्र में भारत में काम करने का समय 14 घंटे से घटाकर आठ घंटे कर दिया था। अगर ऐसा न हुआ होता तो हमारा औसत कार्य दिवस सुबह 9 से रात 11 बजे तक का होता।
आंबेडकर का मूल नाम अंबावडेकर था, लेकिन उनके शिक्षक ने स्कूल के रिकॉर्ड में उनका नाम बदलकर आंबेडकर कर दिया। 'आंबेडकर' शिक्षक का स्वयं का उपनाम था। असल में वे शिक्षक आंबेडकर को बहुत पसंद करते थे।