Ayush centres: 12,500 आयुष वेलनेस सेंटर से तैयार होंगे दुनिया के सबसे बड़े 'पारंपरिक' अस्पताल
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विस्तार
देश और दुनिया में भारतीय पुरातन चिकित्सा पद्धति से इलाज करने की केंद्र सरकार की योजना को बढ़ाने के नए आयाम मिलने लगे हैं। इस कड़ी में अगले साल तक पूरे देश में साढ़े बारह हजार आयुष स्वास्थ्य एवं वैलनेस केंद्र शुरू किए जाने हैं। इसके अलावा दुनिया के 23 अलग-अलग मुल्कों समेत 13 प्रमुख चिकित्सा संस्थानों के साथ मिलकर आयुष शैक्षणिक पीठ का गठन किया जाना है। सोमवार को हुई आयुष मंत्रालय की समीक्षा बैठक में मोदी सरकार की इस प्रमुख योजना को लेकर कई बिंदुओं पर न सिर्फ चर्चा हुई, बल्कि उसको आगे बढ़ाने का पूरा खाका तैयार किया गया। हालांकि अगले साल शुरू होने वाले ऐसे वैलनेस सेंटर के लिए कई राज्यों की तैयारियां अधूरी भी पाईं गईं।
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आयुष मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक समीक्षा बैठक में देश में खुलने वाले साढ़े बारह हजार आयुष स्वास्थ्य एवं वैलनेस सेंटर की प्रगति की रिपोर्ट पर चर्चा की गई। इसमें जिन राज्यों में अभी ऐसे सेंटर स्थापित हैं, वहां आने वाले मरीजों और उनको मिलने वाले इलाज के बारे में विस्तार से जानकारी हासिल की गई। इसके अलावा अगले साल तक जिन राज्यों में इन सेंटर्स को स्थापित किया जाना है, उसे जल्द से जल्द शुरू किए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया। मंत्रालय से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी बताते हैं कि यह सेंटर्स देश के सभी राज्यों में खुल रहे हैं। वह बताते हैं कि इनमें से कई आयुर्वेद स्वास्थ्य केंद्र अपग्रेड होकर वैलनेस सेंटर के तौर पर तैयार किए जा रहे हैं। जबकि कुछ नए सेंटर भी बनाए जा रहे हैं। आयुष मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक आयुर्वेद योगा यूनानी सिद्धा और होम्योपैथी के माध्यम से जिस तरीके से लोगों ने इलाज में न सिर्फ भरोसा जताया है, बल्कि देश और दुनिया में इसकी मान्यता लगातार बढ़ रही है, उससे ऐसे सेंटर के स्थापित होने से एविडेंस बेस्ड रिसर्च और इलाज में सुविधा भी होगी।
अगले साल तक देश भर में खुलने वाले 12,500 सेंटर्स में सबसे ज्यादा सेंटर राजस्थान में खोले जाने हैं। राजस्थान में अगले साल तक 2019 केंद्र खुलने हैं। जबकि इस वक्त 484 आयुष स्वास्थ्य एवं वैलनेस केंद्र समूचे राजस्थान में चल रहे हैं। पूरे देश में दूसरे नंबर पर सबसे ज्यादा आयुष स्वास्थ्य एवं वैलनेस केंद्र उत्तर प्रदेश में शुरू होने हैं। प्रदेश में इनकी संख्या 1034 है। जबकि अभी पूरे प्रदेश में 570 वैलनेस सेंटर खुल चुके हैं। इसी तरह तीसरे नंबर पर मध्यप्रदेश में 762 सेंटर खोले जाने हैं। यहां पर 416 वैलनेस सेंटर काम कर रहे हैं। चौथे नंबर पर झारखंड में 745 सेंटर खोले जाने हैं। जबकि पूरे देश में पांचवें नंबर पर खुलने वाले आयुष स्वास्थ्य वैलनेस केंद्र हिमाचल प्रदेश में है। यहां इनकी संख्या 740 है। झारखंड और हिमाचल प्रदेश में क्रमशः 249 और 240 वैलनेस सेंटर काम कर रहे हैं।
केंद्रीय आयुष मंत्रालय के आंकड़ों में फिलहाल दिल्ली में कोई भी सेंटर नहीं अपग्रेड किया जाना है। जबकि दमन दीव में एक, पुडुचेरी में चार, अंडमान निकोबार दीप समूह में छह, लक्षद्वीप में सात, चंडीगढ़ में 12 और लद्दाख में 14 सेंटर खोले जाने हैं। केंद्रीय आयुष मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक इनमें से कुछ राज्य ऐसे हैं, जो अपने खुलने वाले केंद्रों के लक्ष्य को पूरा कर चुके हैं। इसमें सिक्किम में 18 सेंटर अगले साल तक खोले जाने थे। यहां के सभी सेंटर खुलकर मरीजों का इलाज भी शुरू कर चुके हैं। अंडमान निकोबार दीप समूह में भी तय लक्ष्य के मुताबिक छह सेंटरों का काम पूरा किया जा चुका है। जबकि लक्ष्यदीप में भी सात सेंटर खुलने थे और सभी सेंटर शुरू हो चुके हैं। पुडुचेरी में भी खुलने वाले सभी चारों सेंटर पूरी तरीके से शुरू हो चुके हैं।
हालांकि केंद्र के इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट को भी शुरू होने के लिए कई राज्य में कड़ी मेहनत करनी पड़ रही है। आयुष मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक देश में पांच राज्य ऐसे भी हैं, जहां पर अभी एक भी आयुष स्वास्थ्य एवं वैलनेस सेंटर नहीं शुरू हो पाया है। समीक्षा बैठक में इन राज्यों में जल्द से जल्द ऐसे सेंटर को शुरू करने के लिए राज्य सरकार के साथ समन्वय करने को कहा गया है। आयुष मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक अगले साल तक पंजाब में 217 आयुष स्वास्थ्य वैलनेस केंद्र शुरू होने हैं। लेकिन यहां पर अभी एक भी सेंटर अपग्रेड होकर इस केंद्र के तौर पर नहीं शुरू हो पाया है। इसी तरह मेघालय में भी 45 सेंटर शुरू होने हैं, लेकिन यहां पर भी एक भी सेंटर शुरू नहीं हो पाया है। त्रिपुरा में यह संख्या 84 है, लेकिन त्रिपुरा में भी अब तक सेंटर शुरू नहीं हो पाया है। लद्दाख में 14 वैलनेस सेंटर की शुरुआत होनी है, लेकिन यहां भी एक भी सेंटर अब तक शुरू नहीं हुआ है। हालांकि दादर नगर हवेली में एक सेंटर शुरू होना है, लेकिन इस राज्य में भी अब तक एक सेंटर नहीं शुरू हो पाया है।
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देश में शुरू होने वाले आयुष के इन वैलनेस केंद्रों के अलावा दुनिया के अलग-अलग देशों में भी आयुष को बढ़ावा देने के लिए तमाम देशों और अलग-अलग मुल्कों के विश्वविद्यालयों के साथ करार किया जा चुका है। आयुष मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक दुनिया के 23 अलग-अलग देशों से आयुष में शोध के लिए करार हुआ है। इसके अलावा 13 अलग-अलग विश्वविद्यालयों के साथ आयुष शैक्षणिक पीठ के गठन का भी समझौता किया गया है। जिस तरीके से समूची दुनिया में भारतीय पुरातन चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा मिल रहा है, उसी के चलते दुनिया की अलग-अलग विश्वविद्यालयों में फैलोशिप आयोजन के तहत कई मसौदों पर हस्ताक्षर किए जा चुके हैं। भारतीय पुरातन चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा देने के लिए दुनिया के अलग-अलग देशों में आयोजित होने वाले फैलोशिप प्रोग्राम्स और कार्यक्रमों और आगे बढ़ाने की योजना भी बनाई गई। इसके लिए दुनिया भर में भारत के दूतावासों से संपर्क कर इस मिशन को आगे बढ़ाने के लिए विचार-विमर्श भी किया जा चुका है।
कोविड के दौर में जब पूरी दुनिया में हाहाकार मचा हुआ था, तो भारतीय पुरातत्व शिक्षा पद्धति के माध्यम से एविडेंस बेस्ड इलाज शुरू हुआ, जिसकी समूची दुनिया में वाहवाही हुई। भारतीय पुरातन चिकित्सा पद्धति के चिकित्सकीय परिणामों के चलते ही विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भारत में ही आयुर्वेदिक ग्लोबल सेंटर की स्थापना की है। केंद्रीय आयुष राज्यमंत्री डॉक्टर महेंद्रभाई मुंजपरा कहते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भारतीय पुरातन चिकित्सा पद्धति को आगे बढ़ाने के विजन को उनका मंत्रालय सिर्फ देश ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में आगे बढ़ाने पर जोर दे रहा है। केंद्रीय राज्य मंत्री मुंजपरा कहते हैं कि देश में खुलने वाले 12,500 आयुष स्वास्थ्य एवं वैलनेस सेंटर हमारे देश के लोगों को बेहतर पुरातन चिकित्सा पद्धति के माध्यम से इलाज करेंगे। उनका कहना है कि ऐसे वैलनेस सेंटर खोलने की प्रक्रिया सतत चलती रहेगी।