491 साल से चल रहे विवाद पर नवंबर में आएगा फैसला
- अयोध्या: साल 1528 से 2019 तक की सम्पूर्ण यात्रा।
- 1853: यह वो साल था जब पहली बार इस स्थान के पास सांप्रदायिक दंगे हुए।
- 7 जुलाई, 2009: अयोध्या विवाद से जुड़ी 23 महत्वपूर्ण फाइल हो गयी गायब।
- 6 दिसंबर 1992: जब गिरा दी गई बाबरी मस्जिद।
- अभी सुरक्षित है फैसला।
- इंतजार है अयोध्या की ऐतिहासिक जीत का।
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विस्तार
देश के सबसे पुराने व सबसे संवेदनशील अयोध्या विवाद की सुनवाई सर्वोच्च न्यायालय में 40वें दिन पूरी हो गई। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने छह अगस्त 2019 से विवाद की रोजाना सुनवाई शुरू की थी। 16 अक्टूबर तक कुल 40 दिन में अदालत ने हिंदू व मुस्लिम पक्ष की दलीलें सुनीं।
सुनवाई पूरी होने के साथ कोर्ट ने सभी पक्षों को अगले तीन दिन में 'मोल्डिंग ऑफ रिलीफ' पर लिखित में दलीलें पेश करने का निर्देश दिया है। संविधान पीठ के प्रमुख मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई हैं। उनके अलावा जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एसए नजीर उसमें शामिल हैं।
क्या है 'मोल्डिंग ऑफ रिलीफ'
सुप्रीम कोर्ट को संविधान के अनुच्छेद 142 के दीवानी प्रक्रिया संहिता (सीपीसी) की धारा 151 के तहत दो पक्षों की मांगों के अलावा तीसरे तरह का फैसला देने का अधिकार है। चूंकि अयोध्या मामले में हिंदू पक्ष पूरी जन्मभूमि पर अपना दावा कर रहा है। मुस्लिम पक्ष 1992 के पहले की बाबरी मस्जिद जमीन समेत जस की तस मांग रहा है। इसलिए यदि सुप्रीम कोर्ट तथ्यों, सबूतों व गवाहों के मद्देनजर दोनों पक्षों में से किसी एक के पक्ष में फैसला देने की स्थिति में ना हो तो वह 'मोल्डिंग ऑफ रिलीफ' के तहत दोनों पक्षों की मांग के अलावा तीसरे विकल्प पर विचार कर फैसला दे सकती है।
इस विवाद के इतिहास और महत्वपूर्ण तारीखों पर डालते हैं एक नजर:
- 1528: अयोध्या में मस्जिद का निर्माण हुआ। कहा जाता है कि मुगल सम्राट बाबर ने इस मस्जिद को बनवाया था। इस कारण इसे बाबरी मस्जिद के नाम से जाना जाता था। हिंदू उस स्थल को भगवान राम का जन्मस्थान मानते हैं और वहां राम मंदिर बनाना चाहते हैं।
- 1853: पहली बार इस स्थल के पास सांप्रदायिक दंगे हुए।
- 1859: ब्रिटिश शासकों ने विवादित स्थल पर बाड़ लगा दी और परिसर के भीतरी हिस्से में मुसलमानों को और बाहरी हिस्से में हिंदुओं को प्रार्थना करने की अनुमति दे दी।
- 1949: भगवान राम की मूर्तियां मस्जिद में पाई गईं। कथित रूप से कुछ हिंदुओं ने ये मूर्तियां वहां रखवाई थीं। मुसलमानों ने इस पर विरोध व्यक्त किया और दोनों पक्षों ने अदालत में मुकदमा दायर कर दिया। सरकार ने इस स्थल को विवादित घोषित करके ताला लगा दिया।
- 1984: कुछ हिंदुओं ने विश्व हिंदू परिषद के नेतृत्व में भगवान राम के जन्मस्थल को मुक्त करने और वहां राम मंदिर का निर्माण करने के लिए एक समिति का गठन किया। बाद में इस अभियान का नेतृत्व भाजपा के प्रमुख नेता लालकृष्ण आडवाणी ने संभाल लिया।
- 1986: फैजाबाद के जिला मजिस्ट्रेट ने हिंदुओं को प्रार्थना करने के लिए विवादित मस्जिद के दरवाजे पर लगा ताला खोलने का आदेश दिया। मुसलमानों ने इसके विरोध में बाबरी मस्जिद संघर्ष समिति का गठन किया।
- 1989: विश्व हिंदू परिषद ने राम मंदिर निर्माण के लिए अभियान तेज किया और विवादित स्थल के नजदीक राम मंदिर की नींव रखी।
- 1990: विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं ने विवादित ढांचे को कुछ नुकसान पहुंचाया। तत्कालीन प्रधानमंत्री चंद्रशेखर ने वार्ता के जरिए विवाद सुलझाने के प्रयास किए मगर वार्ताएं विफल हो गईं।
- 1992: विश्व हिंदू परिषद, शिवसेना और भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने छह दिसंबर को विवादित ढांचे को ध्वस्त कर दिया। इसके परिणामस्वरूप देश भर में सांप्रदायिक दंगे भड़क उठे जिसमें 2000 से ज्यादा लोग मारे गए।
- जनवरी 2002: अयोध्या विवाद सुलझाने के लिए प्रधानमंत्री वाजपेयी ने अयोध्या समिति का गठन किया। वरिष्ठ अधिकारी शत्रुघ्न सिंह को हिंदू और मुसलमान नेताओं के साथ बातचीत के लिए नियुक्त किया गया।
- फरवरी 2002: विश्व हिंदू परिषद ने 15 मार्च से राम मंदिर निर्माण कार्य शुरू करने की घोषणा कर दी। सैंकड़ों हिंदू कार्यकर्ता अयोध्या में इकठ्ठे हुए। अयोध्या से लौट रहे हिंदू कार्यकर्ता जिस रेलगाड़ी में यात्रा कर रहे थे, उस पर गोधरा में हुए हमले में 58 कार्यकर्ता मारे गए।
- 13 मार्च: सर्वोच्च न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि अयोध्या में यथास्थिति बरकरार रखी जाएगी।
- 15 मार्च: विश्व हिंदू परिषद और केंद्र सरकार के बीच इस बात को लेकर समझौता हुआ कि विहिप के नेता सरकार को मंदिर परिसर से बाहर शिलाएं सौंपेंगे।
- 22 जून: विश्व हिंदू परिषद ने मंदिर निर्माण के लिए विवादित भूमि के हस्तांतरण की मांग उठाई।
- जनवरी 2003: रेडियो तरंगों के जरिए ये पता लगाने की कोशिश की गई कि क्या विवादित राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद परिसर के नीचे किसी प्राचीन इमारत के अवशेष दबे हैं। कोई पक्का निष्कर्ष नहीं निकला।
- अप्रैल: इलाहाबाद हाइकोर्ट के निर्देश पर पुरातात्विक सर्वेक्षण विभाग की खुदाई में मंदिर के अवशेष मिले हैं।
- मई: सीबीआई ने 1992 में अयोध्या में ढांचा गिराए जाने के मामले में उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी सहित आठ लोगों के खिलाफ पूरक आरोपपत्र दाखिल किए।
- जून: कांची पीठ के शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती ने मामले को सुलझाने के लिए मध्यस्थता की।
- जनवरी 2005: लालकृष्ण आडवाणी को अयोध्या में छह दिसंबर 1992 को ढांचा विध्वंस में उनकी कथित भूमिका के मामले में अदालत में तलब किया गया।
- 28 जुलाई: लालकृष्ण आडवाणी पर रायबरेली की एक अदालत ने आरोप तय किए। विवादित स्थल पर बने अस्थाई राम मंदिर की सुरक्षा के लिए बुलेटप्रूफ कांच का घेरा बनाए जाने का प्रस्ताव किया।
- 30 जून 2009: ढांचा ध्वंस मामले की जांच के लिए गठित लिब्रहान आयोग ने 17 वर्षों के बाद अपनी रिपोर्ट प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को सौंपी।
- 7 जुलाई: उत्तर प्रदेश सरकार ने एक हलफनामे में स्वीकार किया कि अयोध्या विवाद से जुड़ी 23 महत्वपूर्ण फाइलें सचिवालय से गायब हो गई हैं।
- 24 नवंबर : लिब्रहान आयोग की रिपोर्ट संसद के दोनों सदनों में पेश। आयोग ने अटल बिहारी वाजपेयी और मीडिया को दोषी ठहराया और नरसिंह राव को क्लीन चिट दी।
- जुलाई, 2010 : हाई कोर्ट मे रामजन्मभूमि और बाबरी मस्जिद विवाद पर सुनवाई पूरी हुई।
- सितंबर, 2010 : अदालत ने अयोध्या विवाद पर 24 सितंबर को मामले का फैसला सुनाने की घोषणा की थी।
- सितंबर 2010 : इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने अयोध्या के विवादित स्थल को राम जन्मभूमि घोषित किया और तीन हिस्सों में बांट दिया इसको बहुत बड़े फैसले के तौर पर देखा गया।
- फरवरी 2016 : अयोध्या मे विवादित भूमि पर राम मंदिर के निर्माण को लेकर सुब्रमण्यम स्वामी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की और इस मामले को सर्वोच्च न्यायालय तक ले गए।
- जुलाई 2016 : अयोध्या मामले मे एक बड़ा मोड़ उस वक्त आया, जब 96 साल की उम्र में बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि के सबसे उम्रदराज वादी हाशिम अंसारी का अयोध्या में निधन हो गया।
- मार्च 2017 : सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रहे जेएस खेहर ने कहा कि अयोध्या विवाद मामले को आपसी बातचीत से सुलझा लेना चाहिए, और अगर मेरी जरूरत पड़ी तो मैं तैयार हूँ।
- सितंबर, 2010 : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में विवादित 2.77 एकड़ भूमि को सभी तीन पक्षों सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और रामलला विराजमान के मध्य में बराबर-बराबर बांटने का आदेश दिया था,जिसको लेकर ही यह मामला बाद मे सर्वोच्च न्यायालय पहुंचा।
- 6 अगस्त 2019 :6 अगस्त 2019 से इस मामले पर लगातार सुनवाई शुरू हुई जो करीब 40 दिन तक चली।
फिलहाल इस फैसले को सुरक्षित रखा गया है और इंतजार है अयोध्या मामले के फैसले का।