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अयोध्या मामला: सुप्रीम कोर्ट ने फिर दोहराया, 18 अक्तूबर तक दलीलें पूरी हो तभी फैसला संभव

Thu, 26 Sep 2019 11:19 AM IST
Nilesh Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Nilesh Kumar Updated Thu, 26 Sep 2019 11:19 AM IST
सार

  • अयोध्या मामले में 18 अक्तूबर तक बहस पूरी हो, सुप्रीम कोर्ट ने डेडलाइन तय की
  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा-  फैसला लिखने के लिए चार हफ्ते का वक्त चाहिए
  • चीफ जस्टिस ने कहा कि यदि हम चार हफ्ते में फैसला दे पाए तो यह चमत्कार होगा

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Ayodhya case: Supreme Court reiterated, all parties should complete arguments by October 18
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

उच्चतम न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) ने अयोध्या मामले में गुरुवार को एक बार फिर कहा कि 18 अक्तूबर तक हर हाल में सुनवाई पूरी करनी होगी। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय पीठ ने स्पष्ट किया कि सभी पक्ष समय सीमा में अपनी दलीलें पूरी कर लें। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि हमें फैसला लिखने में चार हफ्ते लगेंगे, इसलिए निर्धारित समय सीमा को बढ़ाया नहीं जा सकता है। 

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कानून के जानकारों का मानना है कि दोनों पक्षों को ये न लगे कि सुनवाई के लिए समय बढ़ाया जा सकता है, इसलिए सुप्रीम कोर्ट को एक बार फिर से अपनी बात दोहरानी पड़ी है। सीजेआई ने दोनों पक्षों को स्पष्ट किया है कि जो भी करना है इसी समय सीमा में करना होगा। 

गुरुवार को सुनवाई शुरू होते ही सबसे पहले चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि इस मामले की सुनवाई 18 अक्तूबर तक पूरी होनी जरुरी है, क्योंकि इसके बाद चार हफ्ते में हमें फैसला देना है। यदि हम ऐसा कर पाए तो यह चमत्कार से कम नहीं होगा। बता दें कि चीफ जस्टिस गोगोई 17 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं।

पीठ ने हिंदू एवं मुस्लिम पक्षकारों से कहा कि 18 अक्टूबर के बाद एक भी अतिरिक्त दिन नहीं दिया जाएगा। कहा कि अक्टूबर में छुट्टियां हैं और चार हिंदू पक्षकारों के केवल एक वकील को प्रत्युत्तर दलीलें देने की अनुमति दी जाएगी।

इससे पहले 18 सितंबर को भी सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि 31 अक्तूबर तक इस हर हाल में  सुनवाई पूरी कर लेनी होगी। मालूम हो कि शीर्ष अदालत में अब तक 31 दिनों की सुनवाई हो चुकी है। हिंदू पक्षकारों ने अपनी दलीलें रख दी हैं, जबकि मुस्लिम पक्षकारों की दलीलें जारी हैं। 

एएसआई की रिपोर्ट पर यू-टर्न के बाद मुस्लिम पक्षकारों न मांगी माफी

अयोध्या भूमि विवाद मामले में मुस्लिम पक्षकारों ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की 2003 की रिपोर्ट के लेखकीय दावे पर सवाल करने को लेकर गुरुवार को यू-टर्न ले लिया और मामले में  सुप्रीम कोर्ट का समय बर्बाद करने के लिए उससे माफी मांगी।

मुस्लिम पक्षकारों का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव धवन ने प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अगुवाई वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ को बताया कि वे एएसआई रिपोर्ट के सारांश के लेखकीय दावे पर सवाल नहीं उठाना चाहते।

धवन ने कहा कि रिपोर्ट के लेखकीय दावे और सारांश पर सवाल उठाने की जरुरत नहीं है। यदि हमने न्यायालय का समय बर्बाद किया है तो हम इसके लिए माफी मांगते हैं। उन्होंने कहा कि जिस रिपोर्ट की बात की जा रही है, उसका एक लेखक है और हम लेखन पर सवाल नहीं उठा रहे हैं।

बुधवार को रिपोर्ट पर उठाया था सवाल 

मुस्लिम पक्षकारों का प्रतिनिधित्व करने वाली एक अन्य वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा ने बुधवार को एएसआई की रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए कहा था कि हर अध्याय एक लेखक ने लिखा है लेकिन सारांश में किसी का जिक्र नहीं है।

पीठ ने कहा कि धवन ने अपनी शुरुआती टिप्पणी में कहा है कि उन्होंने रिपोर्ट पर सवाल करने का अपना अधिकार छोड़ा नहीं है लेकिन न्यायालय द्वारा स्वीकार किए जाने के बाद सबूतों पर संदेह नहीं किया जा सकता। 

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