ऑस्ट्रेलियन कंपनी डोपलमायर बनाएगी पहाड़ी राज्यों में रोपवे, आसान होगा आवागमन
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उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर, सिक्किम या अन्य पहाड़ी राज्यों में अब आवागमन मुश्किल नहीं होगा। ऐसे दुर्गम इलाकों में आवागमन का सुगम साधन उपलब्ध कराने के लिए केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने ऑस्ट्रेलियन कंपनी डोपलमायर के साथ बातचीत की है। भारत में काम करने के लिए सोमवार को इस कंपनी ने सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी वाप्कोस के साथ एक सहमति ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। इस अवसर पर गडकरी एवं उनके मंत्रालय के कुछ वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
इस अवसर पर गडकरी ने बताया कि अब वाप्कोस और डोपलमायर मिलकर कहीं भी रोपवे बनाने के लिए संभाव्यता अध्ययन (फिजीबिलिटी स्टडी) करेंगे। इसके बाद यही दोनों कंपनी रोपवे परियोजना की विस्तृत रिपोर्ट (डीपआर) भी तैयार करेंगे, उसके बाद रोपवे की स्थापना होगी। इससे न सिर्फ पहाड़ी और दुर्गम इलाकों में आवागमन का आसान जरिया मिलेगा, बल्कि वैसे शहरी इलाकों, जहां घनी आबादी बसी और वहां सड़कों के विस्तार की गुंजाइश नहीं है, वहां भी यह बेहद सहायक होगा। यही नहीं, इससे अंतिम गांव तक संपर्क (लास्ट माइल कनेक्टिविटी) पहुंचाने में भी मदद मिलेगी।
रोपवे बनाने वाली दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी है डोपलमायर
डोपलमायर इस समय दुनिया में रोपवे बनाने वाली सबसे बड़ी कंपनी है और दुनिया के विभिन्न देशों में 15,000 से भी ज्यादा रोपवे बना चुकी है। यह कंपनी न सिर्फ विश्वस्तरीय सुरक्षा मानकों का ध्यान रखती है, बल्कि अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग करती है। तभी तो संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी यूएन हैबिटेट ने भी इस कंपनी से दुनिया भर की शहरों में कंजेशन दूर करने के लिए समझौता किया है।
इस समझौता पत्र पर वाप्सोक के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक आर के गुप्ता और डोपलमायर इंडिया के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी वक्रिम सिंघल ने हस्ताक्षर किए। मंत्रालय से जुड़े अधिकारी बताते हैं कि मेट्रो रेल बनाने में प्रति किलोमीटर लागत करीब 400 करोड़ रुपये आती है जबकि उसके स्थान पर रोपवे बनाया जाए तो महज 0.15 फीसदी लागत से ही इसे तैयार किया जा सकता है।