गौरक्षा के नाम पर दलितों और मुस्लिमों को बनाया जा रहा निशाना: मायावती
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बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने बृहस्पतिवार को ऊना दलित अत्याचार मामले को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और आरएसएस पर जमकर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि एक तरफ तो वे ‘सबका साथ, सबका विकास’ की बात करते हैं, लेकिन दूसरी तरफ दलितों और मुस्लिमों को गौरक्षा के नाम पर निशाना बनाते हैं।
पीड़ितों के परिवार वालों से मुलाकात के बाद दलितों के समूह को संबोधित करते हुए मायावती ने आरोप लगाया, ‘भाजपा, आरएसएस, शिवसेना और उनके अन्य संगठन सोची-समझी योजना के तहत गौरक्षा के नाम पर पहले मुस्लिमों को लक्ष्य किया और अब वे दलितों को निशाना बना रहे हैं।
गुजरात के नरेंद्र मोदी ‘सबका साथ, सबका विकास’कहते हैं लेकिन वास्तविकता यह है कि दलितों के लिए कोई विकास नहीं हुआ। सिर्फ, कुछ उद्योगपतियों और कारोबारियों को विकास के फल मिल रहे हैं।’ उन्होंने कहा कि जबसे भाजपा केंद्र में आई है तबसे दलित, आदिवासी और अन्य पिछड़ा वर्ग सहित कमजोर वर्ग के लोगों पर पूरे देश में हमला किया जा रहा है। खास तौर से भाजपा शासित प्रदेशों में यह ज्यादा हो रहा है।
दयाशंकर सिंह की अभद्र भाषा एक सोची-समझी योजना
मायावती ने भाजपा और आरएसएस को दलितों के खिलाफ अत्याचार रोकने की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अब वे और सहन नहीं करेंगे। उन्होंने गुजरात में सरकार बनाने के लिए दलितों को मुस्लिमों के साथ गठजोड़ करने को कहा।
उन्होंने कहा, ‘ऊना की घटना के लिए आपको भाजपा सरकार से न्याय की जरूरत है। आपको मुस्लिमों के साथ गठजोड़ कर यहां सरकार बनाने का प्रयास करना चाहिए ताकि आपको न्याय मांगने की जरूरत न पड़े। बल्कि आप ऐसी स्थिति में हों कि न्याय कर सकें।’
बसपा अध्यक्ष मायावती ने आरोप लगाया कि भाजपा की सोची-समझी योजना के तहत ही उत्तर प्रदेश के एक नेता ने उनके खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया था। भाजपा ने गुजरात की मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल का इस्तीफा भी ऐसे समय में मांगा जब मैंने गुजरात आने की घोषणा की ताकि वह न आएं।