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Atiq-Ashraf Murder: अतीक-अशरफ के हत्यारों की कहानी, आखिर क्यों परिवार ने झाड़ा पल्ला? आगे क्या होगा
Wed, 19 Apr 2023 12:17 PM IST
हिमांशु मिश्रा
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु मिश्रा
Updated Wed, 19 Apr 2023 12:17 PM IST
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अतीक और अशरफ की हत्या।
- फोटो :
अमर उजाला
विस्तार
माफिया अतीक अहमद और अशरफ की हत्या करने वाले तीनों शूटरों को बुधवार को प्रयागराज की सीजीएम कोर्ट में पेश किया गया। मंगलवार को हत्याकांड की जांच के लिए गठित एसआईटी टीम ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) दिनेश कुमार गौतम की कोर्ट में प्रार्थना पत्र देकर आरोपियों को तलब करने की मांग की थी।इस दौरान सुरक्षा के मद्देनजर चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात रही। प्रतापगढ़ जेल से लेकर कचहरी तक के रास्ते को छावनी में तब्दील कर दिया गया। ऐसे में आज हम तीनों हत्यारों की कहानी बताएंगे। कैसे तीनों ने अपराध की दुनिया में कदम रखा? कैसे माफिया अतीक अहमद और उसके भाई की सरेराह हत्या कर दी। ये भी जानने की कोशिश करेंगे कि आखिर हत्यारों के परिजनों ने उनसे क्यों पल्ला झाड़ लिया। आइए समझते हैं...
पहले तीनों हत्यारों की कहानी जान लीजिए
1. लवलेश तिवारी: स्नातक फेल
अतीक को पहली गोली मारने वाला लवलेश तिवारी बांदा का रहने वाला है। उसके खिलाफ गुंडागर्दी और झगड़े के कई मुकदमें दर्ज हैं। लवलेश के पिता पेशे से ड्राइवर हैं और उसका परिवार किराए के मकान में रहता है। इंटर करने के बाद उसने लखनऊ यूनिवर्सिटी से स्नातक करने के लिए एडमिशन लिया था, हालांकि फेल होने के बाद पढ़ाई बंद कर दी थी।
चार भाइयों में तीसरे नम्बर पर लवलेश कोई काम नहीं करता था। करीब डेढ़ वर्ष पूर्व एक छात्रा को तमाचा जड़ने पर आठ दिन जेल में रहा था। घटना से लवलेश का परिवार दहशत में है। लवलेश की मां का कहना है कि बगैर संकटमोचन के दर्शन किए वह चाय तक नहीं पीता था। वह रोज मंदिर जाता था। हमेशा दूसरों की मदद करता था।
1. लवलेश तिवारी: स्नातक फेल
अतीक को पहली गोली मारने वाला लवलेश तिवारी बांदा का रहने वाला है। उसके खिलाफ गुंडागर्दी और झगड़े के कई मुकदमें दर्ज हैं। लवलेश के पिता पेशे से ड्राइवर हैं और उसका परिवार किराए के मकान में रहता है। इंटर करने के बाद उसने लखनऊ यूनिवर्सिटी से स्नातक करने के लिए एडमिशन लिया था, हालांकि फेल होने के बाद पढ़ाई बंद कर दी थी।
चार भाइयों में तीसरे नम्बर पर लवलेश कोई काम नहीं करता था। करीब डेढ़ वर्ष पूर्व एक छात्रा को तमाचा जड़ने पर आठ दिन जेल में रहा था। घटना से लवलेश का परिवार दहशत में है। लवलेश की मां का कहना है कि बगैर संकटमोचन के दर्शन किए वह चाय तक नहीं पीता था। वह रोज मंदिर जाता था। हमेशा दूसरों की मदद करता था।
2. अरुण मौर्या : महंगे कपड़ों, जूतों का शौक, जेल भी जा चुका
कासगंज के सोरो के कादरबाड़ी गांव का रहने वाला है। अरुण पर तीन से ज्यादा केस दर्ज हैं। अरुण मौर्या उर्फ कालिया जेल जा चुका है। शूटर अरुण मौर्य का जन्म पानीपत के विकास नगर में हुआ था। अरुण मौर्य यहां अपने दादा और चाचा के परिवार के साथ रहता था। शूटर अरुण मौर्य के चाचा का कहना है कि अरुण एक सप्ताह पहले ही यहां से परिवार को बिना बताए गया था। उस समय वो भी अपने गांव गया हुआ था। उन्हें कहीं से सुनने में आया था कि अरुण दिल्ली शादी में गया है।
अरुण मौर्य ने 10वीं तक ही पढ़ाई की थी। अरुण पानीपत की एक निजी कंपनी में काम करता था। अरुण के पिता दीपक खेती बाड़ी ओर रेहड़ी लगाकर टिक्की-गोलगप्पे बेचने का काम करते हैं। उसका एक छोटा भाई भी है जिसकी उम्र 12 साल है।
अरुण पानीपत की एक फैक्टरी में सिलाई का काम करता था। इसके बदले उसे 10 हजार रुपये महीने मिलते थे। वह महंगे कपड़े, जूते और होटल में रुकने, खाने-पीने का शौकीन था। साथ में काम करने वाले उसके रहन-सहन को देखकर हैरान रहते थे। वह 10 हजार के जूते पहनता था। वह कुख्यात लॉरेंस बिश्नोई से प्रभावित था। उसके गुर्गों के संपर्क में रहकर उससे मिलने की जुगत में लगा रहता था।
कासगंज के सोरो के कादरबाड़ी गांव का रहने वाला है। अरुण पर तीन से ज्यादा केस दर्ज हैं। अरुण मौर्या उर्फ कालिया जेल जा चुका है। शूटर अरुण मौर्य का जन्म पानीपत के विकास नगर में हुआ था। अरुण मौर्य यहां अपने दादा और चाचा के परिवार के साथ रहता था। शूटर अरुण मौर्य के चाचा का कहना है कि अरुण एक सप्ताह पहले ही यहां से परिवार को बिना बताए गया था। उस समय वो भी अपने गांव गया हुआ था। उन्हें कहीं से सुनने में आया था कि अरुण दिल्ली शादी में गया है।
अरुण मौर्य ने 10वीं तक ही पढ़ाई की थी। अरुण पानीपत की एक निजी कंपनी में काम करता था। अरुण के पिता दीपक खेती बाड़ी ओर रेहड़ी लगाकर टिक्की-गोलगप्पे बेचने का काम करते हैं। उसका एक छोटा भाई भी है जिसकी उम्र 12 साल है।
अरुण पानीपत की एक फैक्टरी में सिलाई का काम करता था। इसके बदले उसे 10 हजार रुपये महीने मिलते थे। वह महंगे कपड़े, जूते और होटल में रुकने, खाने-पीने का शौकीन था। साथ में काम करने वाले उसके रहन-सहन को देखकर हैरान रहते थे। वह 10 हजार के जूते पहनता था। वह कुख्यात लॉरेंस बिश्नोई से प्रभावित था। उसके गुर्गों के संपर्क में रहकर उससे मिलने की जुगत में लगा रहता था।
3. मोहित उर्फ सनी सिंह: पुलिस को शक- इसी ने हत्या के लिए हथियार उपलब्ध कराया
सनी हमीरपुर का रहने वाला है और इसका संबंध भाटी गैंग के साथ है। छह महीने पहले ही सनी जेल से बाहर आया था। उसने 12 साल पहले अपना घर छोड़ दिया था। मोहित के घरवालों का कहना है कि उसने केवल आठवीं तक पढ़ाई की। कहा जाता है कि सनी ने ही हत्या के लिए पिस्टल की व्यवस्था की थी।
सनी सिंह की सोशल पोस्टों में मारे गए गैंगस्टर श्री प्रकाश शुक्ला और जेल में बंद कॉन्ट्रैक्ट किलर लॉरेंस बिश्नोई में उसकी गहरी दिलचस्पी का पता चला है। सनी सिंह का कनेक्शन पश्चिमी यूपी के खूंखार अपराधी सुंदर भाटी गैंग से भी मिला है।
पूछताछ में सनी सिंह ने बताया कि जब उसे पता चला कि सिद्धू मूसेवाला को मरवाने वाला लॉरेंश बिश्नोई है तो वो उसका फैंस हो गया। इसके बाद से वह बिश्नोई के इंटरव्यू और उसके वीडियो देखने लगा। सनी सिंह बिश्नोई के वीडियो और इंटरव्यू से इतना ज्यादा प्रभावित हुआ कि उसने भी रैपर सिद्दू मूसेवाला की तरह ही बड़ी हत्या का प्लान बनाया।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, सनी सिंह ही अतीक और अशरफ की हत्या को लीड कर रहा था। उसने ही पूरी प्लानिंग के साथ लवलेश तिवारी और अरुण मौर्य को इस हत्या में शामिल किया। हमीरपुर जेल में बंद रहने के दौरान सनी सिंह की मुलाकात सुंदर भाटी से हुई। हालांकि, कुछ पैसों के लिए उसकी जेल में कैदियों के साथ झड़प हो गई, जिसके बाद उसे बांदा जेल में शिफ्ट कर दिया गया।
सनी हमीरपुर का रहने वाला है और इसका संबंध भाटी गैंग के साथ है। छह महीने पहले ही सनी जेल से बाहर आया था। उसने 12 साल पहले अपना घर छोड़ दिया था। मोहित के घरवालों का कहना है कि उसने केवल आठवीं तक पढ़ाई की। कहा जाता है कि सनी ने ही हत्या के लिए पिस्टल की व्यवस्था की थी।
सनी सिंह की सोशल पोस्टों में मारे गए गैंगस्टर श्री प्रकाश शुक्ला और जेल में बंद कॉन्ट्रैक्ट किलर लॉरेंस बिश्नोई में उसकी गहरी दिलचस्पी का पता चला है। सनी सिंह का कनेक्शन पश्चिमी यूपी के खूंखार अपराधी सुंदर भाटी गैंग से भी मिला है।
पूछताछ में सनी सिंह ने बताया कि जब उसे पता चला कि सिद्धू मूसेवाला को मरवाने वाला लॉरेंश बिश्नोई है तो वो उसका फैंस हो गया। इसके बाद से वह बिश्नोई के इंटरव्यू और उसके वीडियो देखने लगा। सनी सिंह बिश्नोई के वीडियो और इंटरव्यू से इतना ज्यादा प्रभावित हुआ कि उसने भी रैपर सिद्दू मूसेवाला की तरह ही बड़ी हत्या का प्लान बनाया।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, सनी सिंह ही अतीक और अशरफ की हत्या को लीड कर रहा था। उसने ही पूरी प्लानिंग के साथ लवलेश तिवारी और अरुण मौर्य को इस हत्या में शामिल किया। हमीरपुर जेल में बंद रहने के दौरान सनी सिंह की मुलाकात सुंदर भाटी से हुई। हालांकि, कुछ पैसों के लिए उसकी जेल में कैदियों के साथ झड़प हो गई, जिसके बाद उसे बांदा जेल में शिफ्ट कर दिया गया।
तीनों के परिजनों ने क्यों झाड़ा पल्ला?
इसे समझने के लिए हमने रिटायर्ड आईपीएस महेंद्र सिंह से बात की। उन्होंने कहा, 'आमतौर पर बड़ा अपराध करने के बाद किसी भी अपराधी के परिवार के सदस्य उससे किनारा कर लेते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि इससे उन्हें और घर के बाकी सदस्यों को दिक्कत होने लगती है। पुलिस के टारगेट पर हमेशा घर के बाकी सदस्य रहते हैं। इस मामले में भी ऐसा ही हुआ है। हालांकि, अब तक जांच से जो सामने आया है, उसके अनुसार एक को छोड़कर बाकी घर के किसी सदस्य का किसी से कोई लेनदेन नहीं था। मतलब दोनों हमेशा अपने परिवार से दूरी बनाकर रखते थे। तीसरा भी काफी कम ही परिवार से ताल्लुक रखता था।'
महेंद्र आगे कहते हैं, 'ऐसे मामलों में जब तक परिवार के सदस्यों की कोई भूमिका साबित न हो, तब तक उनकी पहचान ज्यादा जाहिर नहीं करनी चाहिए। इससे उनके ऊपर खतरा और उनके भविष्य पर खतरा मंडराने लगता है।'
इसे समझने के लिए हमने रिटायर्ड आईपीएस महेंद्र सिंह से बात की। उन्होंने कहा, 'आमतौर पर बड़ा अपराध करने के बाद किसी भी अपराधी के परिवार के सदस्य उससे किनारा कर लेते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि इससे उन्हें और घर के बाकी सदस्यों को दिक्कत होने लगती है। पुलिस के टारगेट पर हमेशा घर के बाकी सदस्य रहते हैं। इस मामले में भी ऐसा ही हुआ है। हालांकि, अब तक जांच से जो सामने आया है, उसके अनुसार एक को छोड़कर बाकी घर के किसी सदस्य का किसी से कोई लेनदेन नहीं था। मतलब दोनों हमेशा अपने परिवार से दूरी बनाकर रखते थे। तीसरा भी काफी कम ही परिवार से ताल्लुक रखता था।'
महेंद्र आगे कहते हैं, 'ऐसे मामलों में जब तक परिवार के सदस्यों की कोई भूमिका साबित न हो, तब तक उनकी पहचान ज्यादा जाहिर नहीं करनी चाहिए। इससे उनके ऊपर खतरा और उनके भविष्य पर खतरा मंडराने लगता है।'
अब आगे क्या होगा?
रिटायर्ड आईपीएस महेंद्र बताते हैं, 'अतीक और अशरफ हत्याकांड की जांच कर रही एसटीएफ की टीम अभी तीनों आरोपियों को रिमांड पर लेने की कोशिश करेगी। जहां, तीनों से पहले अलग-अलग और फिर एकसाथ बैठाकर पूछताछ होगी। तीनों से पूछताछ में ये पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि आखिर उन्होंने क्यों अतीक और अशरफ को मारा? किसने उन्हें सुपारी दी? ऐसे ही तमाम सवालों का जवाब पुलिस जानने की कोशिश करेगी।'
रिटायर्ड आईपीएस महेंद्र बताते हैं, 'अतीक और अशरफ हत्याकांड की जांच कर रही एसटीएफ की टीम अभी तीनों आरोपियों को रिमांड पर लेने की कोशिश करेगी। जहां, तीनों से पहले अलग-अलग और फिर एकसाथ बैठाकर पूछताछ होगी। तीनों से पूछताछ में ये पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि आखिर उन्होंने क्यों अतीक और अशरफ को मारा? किसने उन्हें सुपारी दी? ऐसे ही तमाम सवालों का जवाब पुलिस जानने की कोशिश करेगी।'