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इस शहर में है अटल बिहारी वाजपेयी का मंदिर, रोज उनकी कविताओं का होता है जाप
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Updated Sat, 18 Aug 2018 10:01 AM IST
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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी भले ही अब इस दुनिया से जा चुके हैं, लेकिन लोगों के दिलों में वो हमेशा जिंदा रहेंगे। लोग उनसे इतना प्यार करते थे कि मध्य प्रदेश के ग्वालियर में उनका एक मंदिर ही बना दिया। इस मंदिर में रोजाना भक्तों की भीड़ रहती है और भजन-आरती के साथ पूजा अर्चना की जाती है। बाकायदा यहां पुजारी भी नियुक्त किया गया है।
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ग्वालियर के लोग उनकी कविताओं से इस कदर प्रभावित हैं कि मंदिर में उनकी कविताओं का ही जाप किया जाता है। हालांकि फिलहाल इस मंदिर में उनकी प्रतिमा नहीं लगाई गई है, सिर्फ उनकी तस्वीर ही लगाकर पूजा की जाती है।
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साल 2005 में सत्यनारायण की टेकारी पर वाजपेयी के नाम से एक छोटे से मंदिर का निर्माण कराया गया था। ये वही जगह है जहां वाजपेयी जी स्कूल के बाद अपना खाली समय बिताने आया करते थे। इस मंदिर का निर्माण अधिवक्ता विजय सिंह चौहान और वाजपेयी के समर्थकों द्वारा कराया गया था।
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विजय सिंह चौहान ने पुराने दिनों को याद करते हुए बताया कि पहले तो वाजपेयी जी इस मंदिर के लिए तैयार नहीं थे, लेकिन बाद में जब उन्हें बताया गया कि यह सब हिंदी भाषा को बढ़ावा देने के लिए किया जा रहा है, तब वो तैयार हो गए। हालांकि उन्होंने मंदिर पर बहुत अधिक पैसा खर्च न करने और उनकी किसी भी तरह की मूर्ति की स्थापना नहीं करने की हिदायत दी थी। इसलिए मूर्ति की जगह मंदिर में वाजपेयी जी की फोटो स्थापित की गई।
उन्होंने बताया कि अटल जी की पढ़ाई-लिखाई ग्वालियर में ही हुई थी और उन्होंने पूरी दुनिया में नाम कमाया था। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र संघ में जो हिंदी में भाषण दिया था, उसे पूरी दुनिया ने सुना और सराहा था। विजय सिंह ने बताया कि हिंदी साहित्य में उनकी योगदान अतुलनीय है और इसीलिए उनके नाम से मंदिर का निर्माण कराया गया है।
जानकारी के मुताबिक, अटल जी की लाल पत्थर की एक प्रतिमा बनाई जा रही है, जिसे अगले तीन महीने के अंदर मंदिर में स्थापित कर दी जाएगी। उनके नाम से यहां पुरस्कारों का भी वितरण किया जाता है। अब तक करीब 700 लोगों को अटल सम्मान दिया जा चुका है।
ग्वालियर के एक प्रख्यात कवि नसीम राफत ने बताया 'मंदिर में हम रोजाना उनकी पूजा करते हैं और उनकी कविताओं का जाप करते हैं। हिंदी प्रेमी और कवियों के लिए यह मंदिर एक बेहतरीन जगह है। वो यहां आकर अपनी रचनाएं और कविताएं सुनाते हैं। साथ ही नौजवान कवि भी वाजपेयी जी की इस मंदिर से प्रेरणा लेते हैं। हम चाहते हैं कि वाजपेयी जी के सम्मान में सरकार एक स्मारक बनवाए।'