{"_id":"5805a0ab4f1c1b9f1b702a1f","slug":"assured-of-chance-to-cheat-thousands-from-rajasthan-mp-switch-to-up-board","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"यूपी बन रहा नकलचियों का अड्डा, राजस्थान और MP के हजारों छात्रों ने भरे बोर्ड फॉर्म ","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
यूपी बन रहा नकलचियों का अड्डा, राजस्थान और MP के हजारों छात्रों ने भरे बोर्ड फॉर्म
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Tue, 18 Oct 2016 09:40 AM IST
विज्ञापन
फाइल फोटो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नकल के सहारे पास होने की उम्मीद में राजस्थान और मध्य प्रदेश से हजारों छात्रों ने यूपी बोर्ड की सत्र 2016-17 की परीक्षाओं में शामिल होने के लिए प्रदेश के अलग-अलग स्कूलों में एडमिशन लिया है। अधिकारियों का कहना है कि इसका मुख्य कारण यूपी बोर्ड की परीक्षाओं में होने वाली नकल की संभावना है।
शिक्षा अधिकारियों के मुताबिक लगभग 4,000 छात्रों ने सिर्फ आगरा के स्कूलों में एडमिशन लिया है, जबकि प्रदेश भर में इनकी कुल संख्या बहुत ज्यादा हो सकती है।
माध्यमिक शिक्षा विभाग के एक अधिकारी ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया, 'राजस्थान और मध्य प्रदेश से आने वाले छात्रों के ट्रांसफर सर्टिफिकेट संदिग्ध दिख रहे हैं, इनमें कइयों के सर्टिफिकेट पर जिला शिक्षा अधिकारी का अनिवार्य हस्ताक्षर नहीं है।' इसके अलावा कई प्रमाणपत्रों के स्टैंप इम्प्रेशन स्पष्ट नहीं है और जानकारियां भी संशयपूर्ण हैं। ऐसे मामलों की पहचान की गई है और स्कूल प्रबंधन से सही प्रमाणपत्र मांगे गए हैं।
विज्ञापन
सूत्रों के मुताबिक प्रदेश के रिमोट जिलों में स्थित प्राइवेट कॉलेजों और नकल माफियाओं में सांठगांठ है, जो छात्रों को नकल का भरोसा देते हैं। नकल माफिया छात्रों से 15 से 20 हजार रुपये लेकर नकल कराकर उन्हें अच्छे अंकों से पास कराते हैं।
विज्ञापन
शिक्षा अधिकारियों के मुताबिक लगभग 4,000 छात्रों ने सिर्फ आगरा के स्कूलों में एडमिशन लिया है, जबकि प्रदेश भर में इनकी कुल संख्या बहुत ज्यादा हो सकती है।
विज्ञापन
माध्यमिक शिक्षा विभाग के एक अधिकारी ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया, 'राजस्थान और मध्य प्रदेश से आने वाले छात्रों के ट्रांसफर सर्टिफिकेट संदिग्ध दिख रहे हैं, इनमें कइयों के सर्टिफिकेट पर जिला शिक्षा अधिकारी का अनिवार्य हस्ताक्षर नहीं है।' इसके अलावा कई प्रमाणपत्रों के स्टैंप इम्प्रेशन स्पष्ट नहीं है और जानकारियां भी संशयपूर्ण हैं। ऐसे मामलों की पहचान की गई है और स्कूल प्रबंधन से सही प्रमाणपत्र मांगे गए हैं।
विज्ञापन
सूत्रों के मुताबिक प्रदेश के रिमोट जिलों में स्थित प्राइवेट कॉलेजों और नकल माफियाओं में सांठगांठ है, जो छात्रों को नकल का भरोसा देते हैं। नकल माफिया छात्रों से 15 से 20 हजार रुपये लेकर नकल कराकर उन्हें अच्छे अंकों से पास कराते हैं।
यूपी के सीमावर्ती गांव भी बने नकलचियों का अड्डा
माध्यमिक शिक्षा विभाग के आगरा दफ्तर में ऐसे स्कूलों और संदिग्ध छात्रों की पहचान की गई है। अधिकारियों का कहना है कि प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में स्थित गांवों जैसे बाह, जैतपुर कलां, फतेहपुर सीकरी, खेरागढ़, सैन्या, पिनाहट, जगनेर और किरोली में भी ऐसे मामले सामने आए हैं।
जिला शिक्षा अधिकारी जितेंद्र यादव ने कहा, 'ऑनलाइन परीक्षा फॉर्म भरने में की जाने वाली गड़बड़ियों को पकड़ने के लिए यूपी बोर्ड इस साल नया अपग्रेडेड सॉफ्टवेयर उपयोग कर रहा है। यह सॉफ्टवेयर संदिग्ध छात्रों के परीक्षा फॉर्मों को खारिज कर देता है। जिले भर में पाए गए संदिग्ध मामलों की हम पहचान कर रहे हैं और उनके दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है। नकली छात्रों को परीक्षा में शामिल होने की अनुमति नहीं दी जाएगी। वास्तविक छात्रों के फॉर्म ही बोर्ड को भेजे जाएंगे।'
पिछले सत्र में विभाग ने उड़ाका दल की रिपोर्ट के आधार पर जिले भर में ऐसे 20 स्कूलों की पहचान की थी, जहां बड़े पैमाने पर नकल होती है। आगरा जिले में यूपी बोर्ड से जुड़े 750 स्कूल हैं। इस साल कुल 1 लाख, 34 हजार, 191 छात्रों ने 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षा में शामिल होने के लिए फॉर्म भरा है।
जिला शिक्षा अधिकारी जितेंद्र यादव ने कहा, 'ऑनलाइन परीक्षा फॉर्म भरने में की जाने वाली गड़बड़ियों को पकड़ने के लिए यूपी बोर्ड इस साल नया अपग्रेडेड सॉफ्टवेयर उपयोग कर रहा है। यह सॉफ्टवेयर संदिग्ध छात्रों के परीक्षा फॉर्मों को खारिज कर देता है। जिले भर में पाए गए संदिग्ध मामलों की हम पहचान कर रहे हैं और उनके दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है। नकली छात्रों को परीक्षा में शामिल होने की अनुमति नहीं दी जाएगी। वास्तविक छात्रों के फॉर्म ही बोर्ड को भेजे जाएंगे।'
पिछले सत्र में विभाग ने उड़ाका दल की रिपोर्ट के आधार पर जिले भर में ऐसे 20 स्कूलों की पहचान की थी, जहां बड़े पैमाने पर नकल होती है। आगरा जिले में यूपी बोर्ड से जुड़े 750 स्कूल हैं। इस साल कुल 1 लाख, 34 हजार, 191 छात्रों ने 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षा में शामिल होने के लिए फॉर्म भरा है।