जिन नेताओं ने अपनी पत्नियों को दौलत में साझेदार बनाया, वे उनपर लक्ष्मी बनकर बरसीं
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नेताओं ने महिलाओं को राजनीति में आगे बढ़ाने के लिए उन्हें 33 फीसदी आरक्षण दिलाने का गंभीर प्रयास भले ही न किया हो, मगर उन्होंने अपनी बीवियों को दौलत में साझेदार जरूर बनाया है। यह भी खास बात रही कि जिन नेताओं ने अपनी बीवियों के नाम धन-दौलत कर रखी है या उन्हें कारोबार में पार्टनर बनाया है तो वे उनपर लक्ष्मी बनकर बरस रही हैं। ऐसे नेताओं को खूब फायदा हुआ है। किसी की संपत्ति पचास गुणा तो कोई 300 गुणा संपत्ति का मालिक बन बैठा।
कई नेता ऐसे भी हैं, जिन्होंने अपनी पत्नी को कारोबार से दूर रखा तो उनकी संपत्ति कम हो गई। हरियाणा विधानसभा चुनाव में विभिन्न पार्टियों या निर्दलीय उम्मीदवारों ने अपना नामांकन दाखिल वक्त जो शपथ पत्र दिया, उसमें ये सब जानकारी निहित हैं। एडीआर रिपोर्ट में भी इसका जिक्र किया गया है। बता दें कि रिपोर्ट में जो भी उम्मीदवार शामिल किए गए हैं, वे दो या उससे ज्यादा बार विधानसभा में पहुंच चुके हैं।
2014 के मुकाबले इस बार सभी पार्टियों ने महिलाओं को कम टिकट दिए
पिछले विधानसभा चुनाव यानी 2014 में आईएनएलडी ने कुल 90 विधानसभा सीटों में से 16 सीटों पर महिलाओं को राजनीति में पैर जमाने का मौका दिया था। इस बार यह पार्टी एक पायदान पीछे रह गई। मौजूदा विधानसभा चुनाव में पार्टी ने 15 महिलाओं को टिकट दिया है। दो पार्टियों में विभाजित होने के बावजूद इनेलो ने महिलाओं पर भरोसा जताया है।
इसके बाद नंबर आता है भाजपा का। 2014 में इस पार्टी ने 15 महिलाओं को टिकट दिया था, लेकिन इस बार 12 महिलाएं चुनाव मैदान में हैं। इस मामले में कांग्रेस पार्टी का ग्राफ कुछ अच्छा नहीं है। पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 10 सीटों पर महिला उम्मीदवार उतारी थी, इस बार 9 महिलाओं को अवसर दिया गया है। इनेलो से अलग होकर नई पार्टी बनी जजपा ने केवल सात महिलाओं को टिकट दिया है।
इस तरह अपने पतियों पर लक्ष्मी बनकर बरसी महिलाएं
हरियाणा सरकार में मंत्री रहे कैप्टन अभिमन्यु ने अपने कारोबार में पत्नी को साझेदार बना रखा है। ट्रांसपोर्ट, कृषि, ब्याज पर पैसा और दूसरे व्यवसायों में उनकी पत्नी साझेदार हैं। नतीजा, 2014 में अभिमन्यु ने 77 करोड़ रुपये की संपत्ति का मालिक होने की घोषणा की थी। इस बार के चुनाव में उन्होंने जो शपथ पत्र दिया है, उसमें उनकी संपत्ति 120 प्रतिशत बढ़कर 170 करोड़ हो गई है।
अजय चौटाला के जेल जाने के बाद उनकी पत्नी नैना सिंह ने कारोबार संभाला। 2014 में नैना सिंह की संपत्ति 60 करोड़ थी तो अब वह 91 करोड़ से ज्यादा हो गई है। यानी 52 फीसदी का इजाफा हुआ है। कुलदीप बिश्नोई ने अपनी पत्नी को खेती के बिजनेस में साझेदार बनाया है। पिछले पांच साल में उनकी आय 32 प्रतिशत बढ़ गई। अर्थात 80 करोड़ से 105 करोड़ पर पहुंच गई।
अभय चौटाला ने भी अपनी पत्नी के नाम प्रॉपर्टी, बैंक ब्याज और खेती आदि करा रखी है। इनकी संपत्ति 54 फीसदी बढ़ गई है। 2014 में 43 करोड़ थी, अब वह 66 करोड़ हो गई है। रणदीप सुरजेवाला के कारोबार में उनकी पत्नी का भी हिस्सा है। नतीजा, पांच साल में उनकी आय 173 फीसदी बढ़ गई। उनकी आय का ग्राफ चार से 12 करोड़ पर पहुंच गया।
इन नेताओं पर भी लगातार बनी रही लक्ष्मी की कृपा
कुलदीप शर्मा, जो कि पूर्व हुड्डा सरकार में विधानसभा अध्यक्ष रहे, उन्होंने अपनी पत्नी को संपत्ति में हिस्सेदार बना रखा है। पांच वर्ष के दौरान उनकी संपत्ति में 189 प्रतिशत का इजाफा हो गया। संपत्ति चार से 11 करोड़ पर पहुंच गई। कई बार के विधायक श्रीकृष्ण हुड्डा ने अपनी पत्नी को रैंट, खेती और डेयरी के धंधे में सांझेदार बना रखा है। उनकी आय भी 42 प्रतिशत बढ़ चुकी है। दस साल तक प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे भूपेंद्र सिंह हुड्डा की पत्नी आशा हुड्डा प्रॉपर्टी, रैंट, अन्य बिजनेस और खेतीबाड़ी में हिस्सेदार हैं।
इनकी संपत्ति 2014 में आठ करोड़ थी जो कि अब 15 करोड़ हो गई है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और मौजूदा राज्यसभा सांसद बीरेंद्र सिंह ने अपनी पत्नी प्रेमलता को कारोबार में साझेदार बना रखा है। वे विधायक का चुनाव लड़ रही हैं। इनकी संपत्ति भी 45 प्रतिशत बढ़ गई। पूर्व विधायक और मौजूदा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी परमिंद्र ढुल की संपत्ति में 53 फीसदी का इजाफा हुआ है। उनकी पत्नी फार्मिंग में सांझेदार है।
इसी तरह रघुबीर कादियान, महिपाल ढांढा, असीम गोयल, रईस खान, कृष्णलाल पंवार, सुखविंद्र की संपत्ति भी अच्छी खासी बढ़ चुकी है। बलकौर सिंह जो कि शिरोमणि अकाली दल की टिकट पर विधायक बने थे, पांच साल में उनकी संपत्ति 369 प्रतिशत बढ़ चुकी है। यानी 2014 में उनकी संपत्ति 28 लाख थी, इस बार वह एक करोड़ के पार चली गई है।
पत्नी को साझेदार न बनाने वाले नेताओं की संपत्ति में कम हुआ इजाफा
एडीआर रिपोर्ट में डॉ. पवन सिंह के कारोबार में उनकी पत्नी का जिक्र नहीं है। उनकी संपत्ति में 10 फीसदी का इजाफा हुआ है। बलवंत सिंह की संपत्ति 21 फीसदी ही बढ़ सकी। भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला की संपत्ति में उनकी पत्नी के साझेदार होने का जिक्र नहीं है। नतीजा, उनकी संपत्ति केवल नौ फीसदी ही बढ़ सकी। पांच साल में उन्हें केवल 42 लाख रुपये का फायदा हुआ है। अब उनकी आय चार करोड़ से ज्यादा है।
रामचंद्र कंबोज की संपत्ति एक फीसदी घट गई है। रणबीर गंगवा की आय 16 फीसदी कम हो चुकी है। पांच साल पहले उनकी आय 10 करोड़ थी जो अब नौ करोड़ रह गई है। इसी तरह ललित नागर की संपत्ति भी 15 प्रतिशत कम हो गई है। पहले उनके पास 11 करोड़ रुपये की संपत्ति थी जो कि अब नौ करोड़ रह गई है।