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हिंसक हो सकते हैं असम में विधानसभा चुनाव, अभी से दिखने लगे आसार
Thu, 07 Jan 2021 04:07 AM IST
Jeet Kumar
शरद गुप्ता, नई दिल्ली
शरद गुप्ता, नई दिल्ली
Published by: Jeet Kumar
Updated Thu, 07 Jan 2021 04:07 AM IST
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असम चुनाव (फाइल फोटो)
- फोटो : ANI
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असम भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व राज्यसभा सदस्य बिश्वजीत दाईमारी का बेटा अमृतराज मंगलवार शाम से गायब है। वह कोकराझार के एक बोर्डिंग स्कूल में कक्षा 10 का छात्र था। पुलिस का मानना है कि उसका अपहरण राजनीतिक कारणों से भी किया जा सकता है। असम में अगले चार महीनों में ही विधानसभा चुनाव होने हैं।
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बिश्वजीत बोडो पीपल्स फ्रंट के अग्रणी नेताओं में शुमार होते थे और वे डेढ़ महीने पहले ही भाजपा में शामिल हुए थे। यह घटना असम के बदलते राजनीतिक समीकरणों का एक उदाहरण हो सकती है।
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आगामी चुनाव असमिया गौरव और हिंदू अस्मिता के बीच होने वाला है। जहां भाजपा के साथ असम गण परिषद और यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल (यूपीपीएल) हैं, वही मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने बदरुउद्दीन अजमल की ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) गठबंधन किया है।
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वहीं, तीसरी और असम के गौरव की अलख जगाने वाली ऑल असम स्टूडेंट यूनियन (आसू) के पूर्व महासचिव लुरुनजीत गोगोई ने असम जनजातीय पार्टी बनाई है तो आरटीआई कार्यकर्ता अखिल गोगोई ने रायजोर दल।
पहले भाजपा का समझौता बोडो पीपल्स फ्रंट के साथ था। दोनों दलों ने मिलकर बोडो टेरिटोरियल काउंसिल (बीटीसी) चलाई। बीपीएफ के अध्यक्ष और पूर्व उग्रवादी हगरामा मोलियारी बीटीसी के अध्यक्ष रहे।
लेकिन दो दिन पहले भाजपा ने बीपीएफ से नाता तोड़ विधानसभा चुनाव के लिए यूपीपीएल से गठबंधन कर लिया और उसके अध्यक्ष प्रमोद बोडो को बीटीसी का अध्यक्ष बनवा दिया। बीटीसी के इलाके में राज्य की 126 में से 12 विधानसभा सीटें आती हैं।
माना जा रहा है कि दाईमारी बेटे के अपहरण में पूर्व उग्रवादियों का हाथ हो सकता है। मोलियारी को एक खूंखार आतंकवादी के रूप में जाना जाता है। हालांकि भाजपा से नाता टूटने के बाद भी बीपीएफ के 12 में से तीन विधायक असम में अभी भी मंत्री बने हुए हैं।