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Assembly Elections 2022: कांग्रेस ने रद्द की रैलियां, क्या अन्य पार्टियों को चुनाव आयोग के निर्देश का इंतजार है?

Wed, 05 Jan 2022 04:19 PM IST
Pratibha Jyoti प्रतिभा ज्योति
Updated Wed, 05 Jan 2022 04:19 PM IST
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सार
पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस वाई कुरैशी ने अमर उजाला डिजिटल से कहा ‘बेशक, रैलियां न करने का फैसला करने वाले राजनीतिक दल ही सबसे अच्छा विकल्प है। वे चाहें तो रैलियां रोकी जा सकती है। आखिर जान है तो जहान है।’
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assembly election 2022 congress cancel all big rallies in up, Up cm Yogi Adityanath Cancels Noida Event, Is the direction of the Election Commission necessary to other parties to stop the rallies in view of the increasing cases of corona?
लखनऊ में इकाना स्टेडियम में कांग्रेस द्वारा आयोजित लड़की हूं लड़ सकती हूं मैराथन में शामिल लड़कियां - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कांग्रेस पार्टी ने कोरोना के कहर के चलते बड़ा फैसला लेते हुए यूपी सहित सभी चुनावी राज्यों में बड़ी रैलियों को टाल दिया है। पार्टी ने कोरोना के बढ़ते मामलों के मद्देनजर राज्य में अपनी 'लड़की हूं, लड़ सकती हूं' मैराथन को भी स्थगित कर दिया है। कांग्रेस ‘लड़की हूं, लड़ सकती हूं’ अभियान के तहत यूपी के तमाम जिलों में रैलियां कर रही थी, लेकिन मंगलवार को बरेली में हुए मैराथन में भगदड़ मच गई थी और कई बच्चियों को चोटें आईं। इससे पहले कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने ट्वीट कर बताया कि उनके घर में भी कोरोना पहुंच गया है और उन्होंने खुद को आइसोलेट कर लिया है। हालांकि कोरोना के बढ़ते मामलों के कारण यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी नोएडा में अपनी चुनावी रैली को रद्द करने का फैसला लिया।


देश में कोरोना तेजी से बढ़ रहा है और कई राज्य नाईट कर्फ्यू से लेकर कई तरह की पाबंदियों की तरफ लौट आए हैं। लेकिन रात में कर्फ्यू और दिन में राजनीतिक पार्टियों की रैलियां जारी हैं। पीएम नरेंद्र मोदी की बुधवार यानी आज पंजाब के फिरोजपुर में एक रैली होने वाली थी, जो रद्द हो गई। भारतीय जनता पार्टी ने कहा है कि पीएम मोदी की सुरक्षा में चूक की वजह से उनकी रैली रद्द हुई है।  

केजरीवाल की रैली में मौजूद आप समर्थक
केजरीवाल की रैली में मौजूद आप समर्थक - फोटो : हिमांशु सोनी
‘क्या आप चाहते हैं कि हम चुनाव में प्रचार करना बंद कर दें?
वहीं जब आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन से जब यह पूछा गया कि उनकी पार्टी कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड और गोवा में चुनावी रैलियां क्यों कर रही है, जबकि कोरोना के मामलों में तेज वृद्धि हो रही है। इस पर उन्होंने यह जवाब दिया ‘क्या आप चाहते हैं कि हम चुनाव में प्रचार करना बंद कर दें? क्या हमें चुनाव नहीं लड़ना चाहिए? हमने दिल्ली में हर संभव पाबंदियां लगाकर पहले ही एक मिसाल कायम कर दी है।’ सत्येंद्र जैन का यह जवाब तब आया है कि जब दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल खुद कोरोना संक्रमित हो गए हैं। उन्होंने कुछ दिनों पहले उत्तराखंड में एक चुनावी रैली की थी।

तो क्या रैलियां रोकने के लिए चुनाव आयोग के निर्देश का इंतजार कर रही हैं अन्य पार्टिया?   
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने पिछले महीने चुनाव आयोग और से उत्तर प्रदेश के चुनावों को कुछ महीने के लिए स्थगित करने को कहा था। हालांकि, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और चुनाव आयोग के बीच एक बैठक के बाद  यह घोषणा की गई कि चुनाव निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार होंगे। चुनाव आयोग ने बीते सप्ताह यूपी के राजनीतिक दलों से भी इस बात पर चर्चा की और पार्टियों ने कोरोना प्रोटोकॉल के पालन के साथ समय पर चुनाव कराने की मांग की। अभी चुनावों की घोषणा होना बाकी है इसलिए पार्टियां उससे पहले ताबड़तोड़ रैलियां करने में जुटी हैं।
 

चुनाव आयोग (फाइल फोटो)
चुनाव आयोग (फाइल फोटो) - फोटो : ANi
जबकि यह वैज्ञानिक तौर पर प्रमाणित है कि भीड़ कोरोना संक्रमण को बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा सकते है। डॉक्टर और वैज्ञानिक लोगों को बार-बार भीड़-भाड़ वाली जगहों पर जाने से चेता रहे हैं और लोगों को सोशल डिस्टेंसिंग रखने की सलाह दी जा रही है, लेकिन नेताओं की रैलियों में उमड़ रही भीड़ अब लोगों को डराने लगी है। क्योंकि लोग इन रैलियों में न तो मास्क लगा रहे हैं और न ही शारीरिक दूरी का ध्यान रखा जा रहा है।

पश्चिम बंगाल चुनाव में क्या हुआ था?
पिछले साल अप्रैल-मई में हुए पश्चिम बंगाल और असम समेत कई राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए थे, तब कोरोना की दूसरी लहर ने अपना पैर पसारना शुरू कर दिया था। रैलियां रोकने की मांग की गई, लेकिन तब भी कुछ भी नहीं रुका, आखिर जब राज्य में मामले बहुत बढ़ने लगे तो केवल रैलियां रोकने की औपचारिकता की गई। 

क्या चुनाव आयोग रैलियां रोकने के निर्देश दे सकता है?
पार्टियों को पता है कि चुनाव आयोग आचार संहिता लागू होने के बाद ही रैलियों को लेकर कोई फैसला कर सकता है, इसलिए सभी पार्टियों को जोर उससे पहले ज्यादा से ज्यादा रैलियां और जनसंपर्क करने में है। 

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव। - फोटो : अमर उजाला
इस बारे में पूछे जाने पर पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस वाई कुरैशी ने अमर उजाला डिजिटल से बातचीत में कहा ‘चुनाव की घोषणा से पहले चुनाव आयोग इस तरह का कोई निर्देश नहीं दे सकता। न ही यह जरूरी है। रैलियों या किसी भी तरह की भीड़ पर प्रतिबंध लगाने की शक्ति सरकार के पास है।

रैलियां रोकने के लिए पार्टियां ही बेहतर विकल्प
एस वाई कुरैशी कहते हैं ‘बेशक, रैलियां न करने का फैसला करने वाले राजनीतिक दल ही सबसे अच्छा विकल्प है। वे चाहें तो रैलियां रोकी जा सकती है। आखिर जान है तो जहान है। अच्छा हो कि राजनीतिक पार्टियां वर्चुअल रैली करें।’

आयोग के एक पूर्व रिटायर्ड अधिकारी बताते हैं कि वर्चुअल रैली की इजाजत देने में एक समस्या यह है कि छोटी पार्टियां और निर्दलीय प्रत्याशी इसमें असमर्थता जताते हैं। पिछले साल जब भाजपा ने बिहार चुनाव से कई हफ्ते पहले एक बड़ी वर्चुअल रैली की, तो बहुत सी पार्टियों ने इस पर विरोध जताया और कहा कि कई दलों के पास वर्चुअल रैली करने के लिए संसाधन नहीं हैं। हालांकि कुरैशी इस मामले में अलग राय रखते हैं। उनका कहना है कि रैलियों के लिए भी संसाधनों की जरूरत होती है। किसी के पास ज्यादा पैसा है, किसी के पास नहीं। तो वह तर्क विशिष्ट है।

हरिद्वार में भाजपा की रैली
हरिद्वार में भाजपा की रैली - फोटो : अमर उजाला
क्या चुनावों की घोषणा के बाद राजनीतिक पार्टियों की रैलियों पर प्रतिबंध लगेगा?
चुनाव आयोग जल्दी ही पांच राज्यों में होने वाले चुनावों की घोषणा कर सकता है। बताया जा रहा है कि कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए चुनावों की घोषणा के बाद चुनाव आयोग रैलियों और जनसभाओं पर रोक लगा सकता है क्योंकि चुनावों की घोषणा होते ही आयोग राज्यों का प्रशासन उसके हाथ में आ जाएगा और आयोग के लिए फैसला करना आसाना होगा।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की तर्ज पर इन रैलियों पर प्रतिबंध लगाने के लिए जिलाधिकारियों और निर्वाचन अधिकारियों को राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन कानून 2005, महामारी एक्ट 1897 और राज्य आपदा नियमन कानून के तहत पूर्ण शक्ति दी जा सकती है, जो रैलियों को रोकने पर फैसला ले सकेंगे। 

परंपरागत और वर्चुअल दोनों प्रचार माध्यमों पर पार्टियों का होगा जोर
चुनाव आयोग के प्रतिबंध की आशंका को देखते हुए कई पार्टियों ने हाईब्रीड प्रचार की तैयारी शुरू कर दी है। भारतीय जनता पार्टी वर्चुअल और परंपरागत दोनों तरह के चुनाव प्रचार करने पर विचार कर रही है। इसी तरह कांग्रेस और अन्य पार्टियां भी वर्चुअल रैली करने के लिए संसाधनों के इंतजामों में जुटी है। माना जा रहा है कि वर्चुअल रैली की इजाजत मिलने पर सोशल मीडिया का प्रयोग इस चुनाव में और भी ज्यादा बढ़ सकता है। 
 
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