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असम : नागरिकता बिल का विरोध करने पर साहित्यकार गोहेन के खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज

Fri, 11 Jan 2019 03:36 AM IST
Gaurav Pandey न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहाटी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहाटी Published by: Gaurav Pandey Updated Fri, 11 Jan 2019 03:36 AM IST
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Assam : treason case filed against Hiren Gohain for opposing citizenship bill
साहित्यकार हीरेन गोहेन - फोटो : Al Jazeera

नागरिकता संशोधन विधेयक का विरोध करने पर साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित साहित्यकार हीरेन गोहेन, आरटीआई कार्यकर्ता अखिल गोगोई और वरिष्ठ पत्रकार मंजीत महंत के खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज किया गया है। ये तीनों लोग नागरिक समाज नामक एक गैर सरकारी संगठन के बैनर तले इस विधेयक के खिलाफ मुहिम चला रहे हैं। इसकी जानकारी पुलिस ने बृहस्पतिवार को दी। इस बीच राज्य में विधेयक के खिलाफ लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। प्रदर्शनों को देखते हुए प्रशासन ने गुवाहाटी में धारा-144 लागू कर दी है।

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गुवाहाटी के पुलिस आयुक्त दीपक कुमार ने बताया कि पुलिस ने गोहेन, महंत और कृषक मुक्ति संग्राम समिति के नेता गोगोई के खिलाफ स्वत: संज्ञान लेते हुए आईपीसी की देशद्रोह से संबंधित धारा 124 (ए), आपराधिक साजिश की धारा 120 (बी), सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने या भड़काने से संबंधित धारा 121 और 123 के तहत मामला दर्ज किया है। उन्होंने कहा कि तीनों के खिलाफ यह मामला सात जनवरी को नागरिक समाज की बैठक के दौरान विधेयक के खिलाफ की गई उनकी टिप्पणी को लेकर दर्ज किया गया है। उन्होंने बताया कि अभी मामले की जांच की जा रही है। ये तीनों सिविल सोसायटी समूह नागरिक समाज से जुड़े हैं। यह संगठन विधेयक का विरोध कर रहा है।
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जानेमाने साहित्यकार और गुवाहाटी विश्वविद्यालय से रिटायर प्रोफेसर गोहेन ने कहा कि उन्हें देशद्रोह का मामला दर्ज किए जाने की जानकारी मिली है लेकिन इस बात की जानकारी नहीं है कि किस आधार पर यह दर्ज किया गया है। महंत प्रमुख असमिया अखबार के कार्यकारी संपादक रह चुके हैं।

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असम आंदोलन के शहीदों के परिजन लौटाएंगे सम्मान

असम आंदोलन के शहीदों के परिजनों का प्रतिनिधित्व करने वाले एक संगठन ने बृहस्पतिवार को नागरिकता संशोधन बिल के विरोध में सम्मान लौटाने का फैसला लिया है। इस कदम ने 2015 के अवार्ड वापसी अभियान की याद दिला दी है। सदोऊ असम जातीया शहीद परियाल सम्मानराखी परिषद ने कार्यकारी बैठक में सम्मान लौटाने का संकल्प लिया। संगठन के अध्यक्ष राजेन डेका और सचिव चंद्रकांता तालुकदार ने बताया कि हमने असम सरकार द्वारा 10 दिसंबर 2016 को दिए गए सम्मान को लौटाने का फैसला लिया है। हम यह काम 31 जनवरी से पहले करेंगे।

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