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असम: हिमंत बिस्वा बोले- केंद्र उल्फा-आई के साथ शांति वार्ता के लिए तैयार, बातचीत का न्योता भेजा
Tue, 28 Jan 2020 12:27 PM IST
अनवर अंसारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहाटी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहाटी
Published by: अनवर अंसारी
Updated Tue, 28 Jan 2020 12:27 PM IST
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अमित शाह (फाइल फोटो)
- फोटो : ANI
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असम सरकार में मंत्री हेमंत बिस्वा सरमा ने उग्रवादी संगठन उल्फा-आई के लीडर परेश बरुआ को बातचीत के लिए न्योता दिया है। उत्तर पूर्व भारत और असम में लंबे समय से हिंसक गतिविधियों में इस संगठन का हाथ रहा है। हाल ही में गणतंत्र दिवस के मौके पर डिब्रूगढ़ में उल्फा-आई ने चार जगह धमाके किए थे। हालांकि, इनमें कोई हताहत नहीं हुआ था।
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सरमा ने कहा कि केंद्र सरकार भी यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (इंडिपेंडेंट) के साथ शांति वार्ता के लिए तैयार है। एक दिन पहले असम के बोडो इलाके में स्थायी शांति के लिए केंद्र सरकार ने असम सरकार व तीन मुख्य विद्रोही गुटों के साथ त्रिपक्षीय समझौता किया। इसके तहत अब असम से अलग बोडोलैंड बनाने की मांग खत्म होगी।
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बोडो उग्रवादियों के सरकार से समझौते के बाद उल्फा-आई संगठन के प्रमुख परेश बरुआ ने कहा था कि इससे आने वाले समय में राज्य में शांति बहाल होगी। खासकर बोडोलैंड के क्षेत्र में। उन्होंने कहा कि राज्य में इसे लेकर कोई अलग विचार नहीं है। बोडो लोग अपने अधिकारों को लेकर दशकों से लड़ रहे हैं। हम अपनी जमीन पर एकता के साथ रहेंगे। बरुआ के इस बयान से माना जा रहा है कि वह केंद्र सरकार की इस पहल से शांति समझौते पर विचार कर सकते हैं।
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बता दें कि असम के बोडो इलाके में स्थायी शांति के लिए केंद्र ने असम सरकार व तीन मुख्य विद्रोही गुटों के साथ त्रिपक्षीय समझौता किया है। गृहमंत्री अमित शाह की मौजूदगी में सोमवार को गृह मंत्रालय में हुए समझौते के तहत अब कोई गुट अलग बोडो राज्य की मांग नहीं करेगा।
साथ ही असम के खतरनाक उग्रवादी संगठन नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड (एनडीएफबी) के चार गुटों के 1550 विद्रोही 150 हथियारों के साथ 30 जनवरी को आत्मसमर्पण करेंगे। सरकार हथियार डालने वाले विद्रोहियों के पुनर्वास और क्षेत्र के विकास के लिए 1500 करोड़ का आर्थिक पैकेज देगी।
शाह ने इसे ऐतिहासिक करार बताते हुए कहा, केंद्र असम समेत पूरे पूर्वोत्तर के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। समझौता उसी का अहम हिस्सा है। बोडो उग्रवाद के कारण कुछ दशकों में 4000 से ज्यादा लोगों की जान गई है। यह समझौता बोडो लोगों के विकास का रास्ता खोलेगा।
शाह की मौजूदगी में एनडीएफबी, ऑल बोडो स्टूडेंट यूनियन (एबीएसयू) और यूनाईटेड बोडो पीपुल्स ऑर्गनाईजेशन (यूबीपीओ) के शीर्ष नेताओं ने समझौते पर हस्ताक्षर किए। केंद्र की ओर से गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव सत्येंद्र गर्ग और असम के मुख्य सचिव कुमार संजय कृष्ण ने हस्ताक्षर किए। असम के सीएम सर्बानंद सोनोवाल ने गवाह के तौर पर हस्ताक्षर किए। एबीएसयू 1972 से अलग बोडोलैंड के लिए आंदोलन चला रही थी।