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हिमंत बिस्वा सरमा बोले: कोई मुस्लिम महिला नहीं चाहती कि उसका पति 3 और पत्नियां घर लाए, यूनीफॉर्म सिविल कोड जरूरी

Sat, 30 Apr 2022 10:05 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिसपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिसपुर Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Sat, 30 Apr 2022 10:05 PM IST
सार

उन्होंने कहा कि यूसीसी मेरा मुद्दा नहीं है, यह सभी मुस्लिम महिलाओं का मुद्दा है। अगर उन्हें इंसाफ देना है तो तीन तलाक को खत्म करने के बाद अब यूनीफॉर्म सिविल कोड लाना होगा। 

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Assam CM Himanta Biswa Sarma told Uniform Civil Code is necessary
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा - फोटो : twitter.com/himantabiswa

विस्तार

असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने शनिवार को यूनीफॉर्म सिविल कोड को लेकर बात की। उन्होंने कहा कि हर कोई यूसीसी चाहता है। कोई भी मुस्लिम महिला नहीं चाहती कि उसका पति 3 अन्य पत्नियों को घर लाए। किसी भी मुस्लिम महिला से पूछो तो उसका यही जवाब होगा। उन्होंने कहा कि यूसीसी मेरा मुद्दा नहीं है, यह सभी मुस्लिम महिलाओं का मुद्दा है। अगर उन्हें इंसाफ देना है तो तीन तलाक को खत्म करने के बाद अब यूनीफॉर्म सिविल कोड लाना होगा। 

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उन्होंने आगे बोलते हुए कहा कि असम में मुस्लिम समुदाय का एक धर्म है, लेकिन संस्कृति और मूल के दो अलग-अलग वर्ग हैं। उनमें से एक असम का मूल निवासी है और पिछले 200 वर्षों में प्रवास का कोई इतिहास नहीं है। वह वर्ग चाहता है कि उन्हें विस्थापित मुसलमानों के साथ न मिला दिया जाए और उन्हें एक अलग पहचान दी जाए।
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उन्होंने कहा कि इसके लिए उपसमिति का गठन कर रिपोर्ट प्रस्तुत की, लेकिन यह सब कमेटी की रिपोर्ट है। सरकार ने अभी तक इस पर कोई फैसला नहीं लिया है। यह भविष्य में निर्णय लेगा कि कौन स्वदेशी मुसलमान है और कौन प्रवासी मुसलमान। असम में इसका कोई विरोध नहीं है। वे अंतर जानते हैं, इसे आधिकारिक रूप देना होगा।
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असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा से जब राज्य की सीमा के मुद्दे पर अरुणाचल के सीएम के साथ उनकी पिछली बैठक के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि दिल्ली में बैठक पहले ही हो चुकी है। अब जिला कमेटी बनानी है। यह अगले 2 महीनों में मैदान में उतरेगी और फिर हम इस मुद्दे को गांव-गांव में हल करना शुरू कर देंगे।

बारपेटा कोर्ट द्वारा जिग्नेश मेवाणी की जमानत पर असम के सीएम सरमा ने कहा कि मुझे मामले के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है। महिला पुलिस उपनिरीक्षक पर मारपीट और दुर्व्यवहार करने की शिकायत की गई थी। इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है, जिसमें बारपेटा सत्र अदालत ने फैसला दिया है। 


उन्होंने अब मुझे पत्र लिखकर बारपेटा सत्र न्यायालय के फैसले के खिलाफ गुवाहाटी उच्च न्यायालय जाने की अनुमति मांगी है। उनकी फाइल मेरे पास आ गई है। अगर मैं अनुमति देता हूं तो वह उच्च न्यायालय का रुख करेंगी।

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