असम: तीसरे चरण में 40 सीटों पर संग्राम, आखिरी दौर में दांव पर इन दिग्गजों की किस्मत
- तीसरे और अंतिम चरण में 40 सीटों पर होगा मतदान
- 2016 में इन 40 सीटों पर भाजपा-कांग्रेस ने जीतीं 11-11 सीटें
- 19.9% वोट शेयर भाजपा और 27.2% वोट शेयर कांग्रेस का था 2016 में
विस्तार
असम में आज (6 अप्रैल) तीसरे और अंतिम चरण के विधानसभा चुनाव के तहत लोअर असम और बोडोलैंड प्रादेशिक क्षेत्र के 16 जिलों की 40 सीटों पर मतदान हो रहा है। सत्तासीन भाजपा और उसके सहयोगी दल अपनी जीत को लेकर आश्वस्त हैं तो कांग्रेस और उसके साझेदार भी सफलता के दावे लगातार कर रहे हैं। बता दें कि 2016 के विधानसभा चुनाव में भाजपा और कांग्रेस ने इन 40 सीटों में से बराबर 11-11 सीटें जीती थीं। अहम बात यह है कि पिछले तीन विधानसभा चुनावों से कांग्रेस ने इन इलाकों में अपनी 11 सीटें बरकरार रखी हैं।
29 वर्तमान विधायक दोबारा आजमा रहे किस्मत
2016 के विधानसभा चुनाव के दौरान इन 40 सीटों पर कांग्रेस का वोट शेयर 27 फीसदी से ज्यादा था, जो भाजपा के वोट शेयर से करीब 7 फीसदी ज्यादा था, लेकिन 2011 के मुकाबले इसमें करीब 2.5 फीसदी की गिरावट आई थी। बता दें कि इन 40 सीटों पर वर्तमान 29 विधायक भी किस्मत आजमा रहे हैं। इनमें नौ विधायक भाजपा के हैं, जबकि कांग्रेस के 8 वर्तमान विधायक भी दोबारा चुनावी मैदान में हैं। जानकारी के मुताबिक, बोंगाईगांव विधानसभा सीट पर एजीपी के फणी भूषण चौधरी का वर्चस्व कायम है। वह 1985 से लगातार इस सीट पर चुनाव जीत रहे हैं। उन्होंने 1983 में पहली बार बोंगाईगांव से चुनाव लड़ा था। उस वक्त वह बतौर निर्दलीय उम्मीदवार मैदान में उतरे थे। सूत्रों के मुताबिक, इन 40 विधानसभा सीटों में से 14 पर मुस्लिम मतदाताओं का प्रभाव है और इनमें सात सीटें बोडोलैंड प्रादेशिक क्षेत्र के अंतर्गत आती हैं।
तीन विधानसभा चुनावों में ऐसा रहा सीटों का हाल
| पार्टी | 2006 | 2011 | 2016 |
| भाजपा | 0 | 02 | 11 |
| कांग्रेस | 11 | 11 | 11 |
| एआईयूडीएफ | 03 | 13 | 06 |
| एजीपी | 11 | 02 | 04 |
| अन्य | 15 | 12 | 08 |
2016 में इतना था जीत का अंतर
2016 के विधानसभा चुनाव में प्रमुख राजनीतिक दलों के वोट शेयर में भले ही ज्यादा अंतर नहीं रहा, लेकिन करीब 16 सीटें ऐसी रहीं, जहां जीत का अंतर 20 हजार वोटों से ज्यादा था। 2011 में ऐसी सीटों की संख्या 11 और 2006 में महज तीन थी। 20 वोटों के अंतर वाली इन 16 सीटों में से भाजपा ने 6, कांग्रेस ने 5, एजीपी ने 3 और एआईयूडीएफ व बीओपीएफ ने एक-एक सीट जीती थी। वहीं, 2016 में ही सात विधानसभा सीटों पर जीत का अंतर 5 हजार वोटों से कम था। 2011 में ऐसी सीटें 9 और 2006 में 19 थी।
15 साल में बढ़ा भाजपा का वोट शेयर
| पार्टी | 2006 | 2011 | 2016 |
| भाजपा | 7.8 फीसदी | 8 फीसदी | 19.9 फीसदी |
| कांग्रेस | 24.8 फीसदी | 29.7 फीसदी | 27.2 फीसदी |
| एआईयूडीएफ | 10.1 फीसदी | 18.3 फीसदी | 16.4 फीसदी |
| एजीपी | 20.7 फीसदी | 16.8 फीसदी | 10.6 फीसदी |
| अन्य | 36.6 फीसदी | 27.2 फीसदी | 25.9 फीसदी |
इन सीटों पर रही कांटे की टक्कर
तीसरे चरण की 40 विधानसभा सीटों में से अभयपुरी उत्तर और गोलपारा पूर्व सीटों पर पिछले दो विधानसभा चुनाव के दौरान कांटे की टक्कर देखी गई। वहीं, उत्तरी सलमारा जिले की अभयपुरी दक्षिण सीट पर काफी रोचक मुकाबला रहा। यहां जीत का अंतर महज 191 वोट था।
महिला उम्मीदवारों पर दांव कम
बता दें कि तीसरे चरण में कुल 357 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं, जिनमें महज 25 महिलाएं हैं। इन 40 सीटों से वर्तमान में महज तीन महिला विधायक हैं, जबकि 2006 और 2011 विधानसभा में यह संख्या महज दो थी। अहम बात यह है कि प्रमिला रानी ब्रह्मा मुख्य महिला उम्मीदवार हैं। वह कोकराझार पूर्व सीट से लगातार छह बार से चुनाव जीत रही हैं। एडीआर की रिपोर्ट के मुताबिक, तीसरे चरण में किस्मत आजमा रहे सभी उम्मीदवारों में 18 फीसदी के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। वहीं, 27 फीसदी प्रत्याशियों ने अपनी संपत्ति एक करोड़ रुपये से ज्यादा घोषित की है। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रत्याशियों की औसतन संपत्ति 2.2 करोड़ रुपये आंकी गई है।