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Congress: तालमेल के लिए राजस्थान में गहलोत-पायलट की जोड़ी को चुना, CG में भाजपा को मात देने की यह है तैयारी
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Rahul Gandhi with Mallikarjun Kharge and KC Venugopal
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विस्तार
कांग्रेस पार्टी ने राजस्थान,मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में होने वाले विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर तैयारी तेज कर दी है। सोमवार को पार्टी आलाकमान ने राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ समेत सभी चुनावी राज्यों के लिए पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की गई है। वहीं, तीनों राज्यों में लोकसभा सीट वार पर्यवेक्षक भी नियुक्त कर दिए हैं। राजस्थान के लिए मधुसूदन मिस्त्री को वरिष्ठ पर्यवेक्षक बनाया गया है। जबकि शशिकांत सेंथिल को पर्यवेक्षक गया है।
मध्यप्रदेश में वरिष्ठ पर्यवेक्षक रणदीप सिंह सुरजेवाला और चंद्रकांत हंडोरे को पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया है। छत्तीसगढ़ में उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष प्रीतम सिंह को वरिष्ठ पर्यवेक्षक और मीनाक्षी नटराजन को पर्यवेक्षक गया है। इसी तरह तेलंगाना में वरिष्ठ पर्यवेक्षक दीपदास मुंशी और पर्यवेक्षक सिरिवेल्ला प्रसाद को नियुक्ति किया गया है।
वरिष्ठ नेता मधुसूदन मिस्त्री इससे पहले भी राजस्थान चुनावों की जिम्मेदारी देख चुके हैं। इससे पहले मिस्त्री ने कांग्रेस के संगठन चुनाव करवाए थे, उन्हें राहुल और सोनिया गांधी का नजदीकी माना जाता है। जबकि पर्यवेक्षक सेंथिल तमिलनाडु मूल के हैं, उन्होंने कर्नाटक चुनावों में भी काम किया था। एआईसीसी ने 25 लोकसभा सीटों पर लोकसभा ऑब्जर्वर लगाए हैं। लोकसभा सीट के हिसाब से ऑब्जर्वर लगाए गए नेताओं को विधानसभा चुनावों के लिए जिम्मेदारी दी गई है। हर नेता के पास आठ विधानसभा सीटें रहेंगी।
अमर उजाला से चर्चा में प्रदेश कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि राजस्थान को लेकर कांग्रेस आलाकमान की सक्रियता कुछ ज्यादा नजर आ रही है। पार्टी ने वरिष्ठ नेताओं को कमान सौंपी है। जिससे सीएम अशोक गहलोत के साथ सामंजस्यता बनाई जा सके। इसी तरह पर्यवेक्षक शशीकांत सेंथिल को बनाकर साफ इशारा किया है कि राजस्थान के चुनाव कर्नाटक के तर्ज पर ही लड़े जाएंगे। जो फार्मूला कांग्रेस पार्टी ने कर्नाटक में इस्तेमाल किया, वही फार्मूला राजस्थान में भी इस्तेमाल किया जाएगा। हालांकि सभी की निगाहे स्क्रीनिंग कमेटी और कैंपेन कमेटी पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।
छत्तीसगढ़ में यह जोड़ी करेगी काम
उत्तराखंड की प्रदेश अध्यक्ष रहे प्रीतम सिंह को छत्तीसगढ़ का वरिष्ठ पर्यवेक्षक बनाया गया है। वहीं मीनाक्षी नटराजन को पर्यवेक्षक की जिम्मेदारी दी गई है। उत्तराखंड की राजनीति का प्रीतम सिंह बड़ा नाम हैं। प्रीतम सिंह चकराता विधानसभा से छठी बार के विधायक हैं। उन्होंने उत्तराखंड कांग्रेस अध्यक्ष के अलावा नेता प्रतिपक्ष का दायित्व संभाला था।
प्रीतम सिंह के बारे में कुछ दिनों से कांग्रेस छोड़ने की अटकलें लगाई जा रही थीं। कहा जा रहा था कि कांग्रेस का साथ छोड़कर वरिष्ठ नेता बीजेपी का दामन थाम सकती हैं। अब आलाकमान की तरफ से बड़ी जिम्मेदारी मिलने के बाद अटकलों की गुंजाइश खत्म होती लग रही हैं। कांग्रेस छोड़ने की वजह प्रीतम सिंह की हाईकमान से नाराजगी बताई जा रही थी।
जबकि मध्यप्रदेश के मंदसौर से सांसद रही मीनाक्षी नटराजन इस समय राजीव गांधी पंचायती राज संगठन की राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। वे मंदसौर मध्यप्रदेश के संसदीय क्षेत्र से सांसद भी रही हैं। नटराजन को गांधी परिवार का करीबी माना जाता है। मीनाक्षी नटराजन को मंदसौर से 2014 और 2019 से टिकट मिला था। लेकिन वे हार गईं।
मीनाक्षी ने एनएसयूआई में शामिल होकर छात्र राजनीति से शुरुआत की। वे साल 1999 से 2002 तक एनएसयूआई की राष्ट्रीय अध्यक्ष रहीं। साल 2002 से 2005 तक मध्य प्रदेश यूथ कांग्रेस की अध्यक्ष रह चुकी हैं। राहुल गांधी ने उन्हें एआईसीसी के सचिव के रूप में साल 2008 में चुना।