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राजस्थान का सियासी संकट: गहलोत सरकार गिराए बिना नहीं बनेगी सचिन पायलट की बात

Mon, 13 Jul 2020 12:34 AM IST
अवधेश कुमार अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: अवधेश कुमार Updated Mon, 13 Jul 2020 12:34 AM IST
सार

  • जरूरी संख्याबल पर आश्वस्त होने के बाद ही मुखर होगी भाजपा
  • भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने फिलहाल बना रखी है पायलट से दूरी

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Ashok Gehlot and Sachin Pilot Crisis in rajasthan congress party
अशोक गहलोत-सचिन पायलट (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

विस्तार

राजस्थान में कांग्रेस में अंतर्कलह के चरम पर पहुंचने के बावजूद भाजपा जल्दबाजी में नहीं है। हालांकि बगावती तेवर अपनाने वाले उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट हाल ही में कांग्रेस छोड़ कर भाजपा में आए ज्योतिरादित्य सिंधिया के जरिये भाजपा नेतृत्व के संपर्क में हैं। दरअसल, भाजपा नेतृत्व की रणनीति पायलट द्वारा गहलोत सरकार को गिराने के बाद ही इस मामले में आगे भूमिका निभाने की है।
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सूत्रों के मुताबिक पार्टी नेतृत्व संख्याबल के मामले में आश्वस्त होना चाहता है। अब तक अधिकतम 20 विधायकों के पायलट के साथ होने की बात आ रही है। जबकि हकीकत यह है कि खुलकर महज 12 विधायक ही पायलट के साथ हैं। उस पर यह स्पष्ट नहीं है कि ये सभी गहलोत सरकार गिराने और जरूरी पड़ने पर भाजपा में शामिल होने के लिए राजी होंगे या नहीं? गहलोत सरकार को 12 निर्दलीय और छोटेदलों के विधायकों का भी समर्थन प्राप्त है।
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पायलट के साथ भाजपा की अपेक्षा के अनुरूप विधायक न होने के कारण ही भाजपा नेतृत्व खुलकर इस मामले में सामने नहीं आए। पायलट फिलहाल राजस्थान इकाई के नेताओं और सिंधिया के संपर्क में है। ऑपरेशन मध्य प्रदेश में भी भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व की भूमिका ऐसी ही थी। कमलनाथ सरकार की विदाई की राह की सभी अड़चनें दूर होने के बाद गृहमंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री से सिंधिया की मुलाकात कराई गई थी। इससे पहले इस ऑपरेशन से राज्य के भाजपा नेता ही जुड़े थे।

 

गहलोत सरकार की विदाई के प्रति भाजपा आश्वस्त

भाजपा को देर-सवेर गहलोत सरकार की विदाई तय लग रही है। पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि राज्य में गहलोत बनाम पायलट की लड़ाई जिस स्तर पर है, उसका निदान मुश्किल है। कांग्रेस नेतृत्व अगर पायलट को सीएम बनाती है तो गहलोत खेमा बगावत करेगा। इसकी उल्टी स्थिति में पायलट खेमा मोर्चा खोलेगा।
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